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आयोजन

नियति को नियंत्रित करने वाली शक्तियों में राजनीति सबसे प्रमुख है

वरिष्ठ पत्रकार संजय सिंह की पुस्तक राज-रंग का भव्य लोकार्पण

गोरखपुर। जब से मनुष्य है तभी से राजकाज चल रहा है। राजनीति मनुष्य के साथ अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। नियति को नियंत्रित करने वाली शक्तियों में राजनीति सबसे प्रमुख है। यह बातें रविवार को गोरखपुर क्लब के विशाल सभागार में वरिष्ठ पत्रकार संजय सिंह द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘राज-रंग’ का विमोचन करते हुए बतौर मुख्य अतिथि साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. विशवनाथ प्रसाद तिवारी ने कही। पुस्तक के विमोचन का कार्यक्रम गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब ने किया था।

वरिष्ठ पत्रकार संजय सिंह की पुस्तक राज-रंग का भव्य लोकार्पण

गोरखपुर। जब से मनुष्य है तभी से राजकाज चल रहा है। राजनीति मनुष्य के साथ अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। नियति को नियंत्रित करने वाली शक्तियों में राजनीति सबसे प्रमुख है। यह बातें रविवार को गोरखपुर क्लब के विशाल सभागार में वरिष्ठ पत्रकार संजय सिंह द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘राज-रंग’ का विमोचन करते हुए बतौर मुख्य अतिथि साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. विशवनाथ प्रसाद तिवारी ने कही। पुस्तक के विमोचन का कार्यक्रम गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब ने किया था।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी अपने समय के सबसे बड़े नेता थे और वह एक पत्रकार भी थे। महात्मा गांधी के बाद उनके कुछ शिष्यों का प्रभाव कुछ दिनों तक चलता रहा, लेकिन 1970 ई. के बाद भारतीय राजनीति में क्षरण की प्रक्रिया शुरू हुई और अब तक लगभग पांच दशक हो गए राजनीति में गिरावट लगातार जारी है। किसी भी राजनीतिक दल में बहुत ही कम ऐसे नेता हैं, जिनका राजनीतिक शुचिता से संबंध है। उन्होंने कहा कि यह सब बातें इस पुस्तक में भी मिल जाएंगी, क्योंकि जब से राजनीति का क्षरण शुरू हुआ है, तब से अब तक के नेताओं का साक्षात्कार इस पुस्तक में है। उन्होंने पुस्तक के लिए संजय सिंह को बधाई दी।

समारोह को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार एवं आलोचक ज्योतिष जोशी ने कहा कि पत्रकारिता का इतिहास बहुत बड़ा है। पत्रकारिता ने पूरी दुनिया में क्रांति की लौ जगाई, समाज सुधार किया। भारत ही नहीं पूरी दुनिया की राष्ट्रीयताओं में उनके स्वाधीनता के संघर्ष में पत्रकारों के साथ महत्वपूर्ण भूमिका अधिवक्ताओं की रही है। उन्होंने कहा कि गांधी जी कहते थे कि मेरी दृष्टि में धर्म और नैतिकता एक सिक्के के दो पहलू हैं। इसी राजनीति ने नैतिकता की तिलांजलि दे दी। धर्म और नैतिकता को पर्यायवाची मानने वाले गांधी जी अकेले ऐसे नेता थे, जिन्होंने गांव को भारत की आत्मा कहा और उन्होंने स्वराज की कल्पना की। उन्होंने कहा था कि हमें खुद को टटोलना होगा। अगर हम स्वराज के लायक नागरिक नहीं खड़ा कर सकते तो देश में स्वराज भी नहीं आएगा। श्री जोशी ने संजय सिंह की किताब पर विस्तार से प्रकाश डाला।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रख्यात साहित्यकार व आलोचक प्रो. राम देव शुक्ल ने कहा कि भारतीय समाज की विडम्बना है कि जो नेता नहीं है, वह रुपए खर्च कर इलाहाबाद के महामंडलेर से स्वयं महामंडलेर की उपाधि प्राप्त कर लेता है। उन्होंने रामकृष्ण हेगड़े के साक्षात्कार पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए संजय सिंह की अगली पुस्तक के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त रखते हुए वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. अनंत मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता लम्बी होती है। दोनों में कोई भेद नहीं है। उन्होंने कहा कि राज-रंग जो शब्द है जो रजो गुण से संबंधित है। न्यूज फॉक्स के संपादक रामेंद्र सिन्हा ने कहा कि अपनी मातृभूमि पर अपनी ही पुस्तक के विमोचन करने का सौभाग्य कम ही लोगों को मिलता है। संजय सिंह को यह सौभाग्य आज प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि किताब लिखने का समय कम ही लोगों को पाता है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रेस क्लब के अध्यक्ष मार्कण्डेय मणि त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में पुस्तक के लेखक वरिष्ठ पत्रकार संजय सिंह ने सभी अतिथियों व कार्यक्रम में शामिल लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन आकाशवाणी के पूर्व उद्घोषक व प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष सव्रेश दूबे ने किया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्ज्लन से हुआ। कार्यक्रम को वरिष्ठ पत्रकार पूर्व संपादक सुजीत पांडेय, गोजए के अध्यक्ष रत्नाकर सिंह, आकाशवाणी के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अब्बासी, रघुनाथ चंद आदि लोगों ने संबोधित किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विभिन्न मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकार, साहित्यकार और नागरिक उपस्थित थे।

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