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सियासत

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन कार्यस्थल में कर्मचारी के शोषण को बढ़ावा दे रही हैं!

अमित चतुर्वेदी-

पिछले दिनों पुणे में एक 26 साल की लड़की जो बाय प्रोफेशन CA थी और एक कंपनी के लिए काम करती थी उसने ऑफिस में काम के अत्यधिक दबाव से तंग आकर आत्महत्या कर ली। कल माननीय मंत्री महोदया निर्मला सीतारमन जी ने इस विषय पर बात करते हुए कहा, इंसान में आंतरिक शक्ति होनी चाहिए ताकि वो कार्यस्थल में काम के दबाव को झेल सके।

इसका निहितार्थ ये होता है कि उस लड़की जिसने अत्यधिक वर्क प्रेशर के चलते आत्महत्या कर ली उसमें इतनी आंतरिक शक्ति नहीं थी।

सामान्यतः ये बात ग़लत नहीं है लेकिन एक मंत्री बतौर उनका ऐसा कहना सही नहीं है। ये अपने आप में एक निहायत ही insensitive और पीड़ित को ही ग़लत ठहराने वाली एक generalised बात है। वो ऐसा कह कर कार्यस्थल में कर्मचारी के शोषण को जस्टिफाई ही नहीं कर रहीं बल्कि बढ़ावा दे रही हैं।

देश में एक आदमी है जिसके बारे में प्रचारित किया जाता है कि वो प्रतिदिन 18-20 घंटे काम करता है। फिर थोड़े दिनों पहले नारायण मूर्ति कहता है कि हफ़्ते में 70 घंटे काम करने का नियम होना चाहिए। ये उसी साज़िश को आगे बढ़ाने वाली बात है।

उनका घूमना, दिन में 6 बार कपड़े बदलना, घूम घूम कर प्रचार करना, लोगों के गले पड़ना और हर महीने विदेश यात्रा पर निकल जाना भी जिनके काम के घंटे बढ़ा रहा हो उनका उदाहरण देकर देश में हर मालिक के हाथ में कर्मचारी के लिए चाबुक पकड़ाने की साज़िश रची जा रही है। जो अभी भी नहीं चेत रहे उनकी संतानें और आने वाली पीढ़ियाँ ऐसे मूर्ख चमचों का हाल जीते जी शाहजहाँ जैसा करेंगी और उनके मरने के बाद पितृ पक्ष में पानी तक नहीं देंगी..

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