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तारा-रक़ीबुल प्रकरण में फंसे डीएसपी ने पत्रकार को मारा थप्पड़

झारखण्ड के चर्चित तारा-रक़ीबुल प्रकरण में फंसे देवघर जिले के डीएसपी अनिमेष नैथानी ने आज प्रभात खबर के जिला संवाददाता आशीष कुंदन को थप्पड़ जड़ दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार नेशनल शूटर तारा शाहदेव उत्पीड़न कांड के मुख्य आरोपी रक़ीबुल से रिश्ते रखने के आरोप में देवघर जिले के डीएसपी अनिमेष नैथानी से रांची पुलिस ने पूछताछ की थी, जिसमें डीएसपी नैथानी ने रक़ीबुल से जान पहचान होने की बात काबूली थी।

झारखण्ड के चर्चित तारा-रक़ीबुल प्रकरण में फंसे देवघर जिले के डीएसपी अनिमेष नैथानी ने आज प्रभात खबर के जिला संवाददाता आशीष कुंदन को थप्पड़ जड़ दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार नेशनल शूटर तारा शाहदेव उत्पीड़न कांड के मुख्य आरोपी रक़ीबुल से रिश्ते रखने के आरोप में देवघर जिले के डीएसपी अनिमेष नैथानी से रांची पुलिस ने पूछताछ की थी, जिसमें डीएसपी नैथानी ने रक़ीबुल से जान पहचान होने की बात काबूली थी।

आज इसी मामले में सफाई देने के लिए डीएसपी नैथानी ने अपने कार्यालय में पत्रकारों को बुलाया था। वार्ता के दौरान जब प्रभात खबर के पत्रकार आशीष कुंदन ने रक़ीबुल से संबंधो के बारे में डीएसपी से सवाल किया तो डीएसपी आपे से बाहर हो गए और वहीं सब के सामने आशीष को थप्पड़ मार दिया। गुस्साए नैथानी ने बाकी पत्रकारों को भी बाहर जाने को कह दिया। घटना से हतप्रभ सभी पत्रकार नैथानी के कार्यालय से बाहर आ गए।

इसके बाद प्रेस क्लब की आपात बैठक बुलाई गयी। बैठक में घटना की तीव्र निंदा की गयी और डीएसपी नैथानी को निलंबित करने की मांग की गयी। बैठक में उपस्थित सभी पत्रकारों ने एक सुर में कहा कि यदि 36 घंटे के अंदर डीएसपी नैथानी को निलंबित नहीं किया गया तो सभी सरकारी कार्यक्रमों का बहिष्कार किया जाएगा। वहीं मामले को लेकर देवघर नगर थाने में तहरीर दे दी गयी है।

प्रभात खबर के स्थानीय संपादक सुशील भारती ने डीएसपी नैथानी की इस हरकत को कायरतापूर्ण बताते हुए उनके निलंबन की मांग की है। देवघर जिले के सभी राजनीतिक दलों ने भी अख़बार के संवाददाता को थप्पड़ मारने की इस घटना की तीव्र निंदा करते हुए कहा कि अगर 36 घंटे के अंदर डीएसपी नैथानी को निलंबित नहीं किया गया तो इसके लिए आंदोलन चलाया जायेगा।

 

अनंत झा की रिपोर्ट।

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3 Comments

3 Comments

  1. Ajay Kumar

    September 4, 2014 at 5:18 pm

    मित्रों नैथानी को कलम से ऐसा नाथे की सड़क पर का नटुआ बन जाए .इसके अलावे कोर्ट में नाथने से भी नहीं चुकेंगे.सभी पत्रकार मित्रों इसके द्वारा किया गया पर्यवेक्षण का रोजाना ऑपरेशन कर हाई लाइट करते रहें.अगर आपलोगों से नहीं संभले तो उसे बिहार भेज दे.

  2. sunil kumar

    September 6, 2014 at 3:10 pm

    देवघर में इस तरह की सभी घटनाएँ प्रभात खबर के लोगों साथ ही हो रही है। यह सिलसिला २०१० से शुरू हुआ। पहले देवघर में डांस सिखाने वाली संस्था एक संस्था की एकपक्षीय खबर छापने के कारण झंझट हुआ। तब संस्था के लोगों ने प्रभात खबर कार्यालय पर हमला किया और वहां के मैनेजर (अभी भी वही मैनेजर हैं ) पंकज कुमार सहित प्रभात खबर के कई लोगों को पीटा। दोनों तरफ से मुकदमा हुआ। करीब दो साल मुकदमा लड़ने के बाद २०१२ में प्रभात प्रभात खबर वालों ने उन्हीं लोगों से कोर्ट में समझौता भी कर लिया।
    २०१३ में प्रभात खबर का चीफ फोटोग्राफर (जिसको घटना के बाद प्रभात खबर ने अपना फोटोग्राफर मैंने से भी इंकार कर दिया। हालाँकि पहले दिन उसी अख़बार ने यह खबर छापी और उसे अपना फोटोग्राफर बताया) को पुलिस वालों ने पीट दिया। कुछ माह बाद डेस्क पर काम करने वाले एक कर्मचारी को देवघर के कुछ लड़कों ने पीट दिया। इस पर प्रभात खबर ने कई दिन तक अभियान चलाया। फुल पेज खबर और प्रतिक्रिया छपी।
    अब उसके क्राइम रिपोर्टर को एसडीपीओ ने थप्पड़ मारा।
    यहाँ प्रेस काउन्सिल में भी सबसे ज्यादा शिकायतें प्रभात खबर की ही जाती हैं।
    आखिर प्रभात खबर के साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है ? देवघर में और भी अख़बारों के पत्रकार हैं। उनके साथ ऐसा क्यों नहीं होता ? इस पर विचार क्यों नहीं होता ?

  3. deepak

    September 6, 2014 at 3:12 pm

    देवघर में इस तरह की सभी घटनाएँ प्रभात खबर के लोगों साथ ही हो रही है। यह सिलसिला २०१० से शुरू हुआ। पहले देवघर में डांस सिखाने वाली संस्था एक संस्था की एकपक्षीय खबर छापने के कारण झंझट हुआ। तब संस्था के लोगों ने प्रभात खबर कार्यालय पर हमला किया और वहां के मैनेजर (अभी भी वही मैनेजर हैं ) पंकज कुमार सहित प्रभात खबर के कई लोगों को पीटा। दोनों तरफ से मुकदमा हुआ। करीब दो साल मुकदमा लड़ने के बाद २०१२ में प्रभात प्रभात खबर वालों ने उन्हीं लोगों से कोर्ट में समझौता भी कर लिया।
    २०१३ में प्रभात खबर का चीफ फोटोग्राफर (जिसको घटना के बाद प्रभात खबर ने अपना फोटोग्राफर मैंने से भी इंकार कर दिया। हालाँकि पहले दिन उसी अख़बार ने यह खबर छापी और उसे अपना फोटोग्राफर बताया) को पुलिस वालों ने पीट दिया। कुछ माह बाद डेस्क पर काम करने वाले एक कर्मचारी को देवघर के कुछ लड़कों ने पीट दिया। इस पर प्रभात खबर ने कई दिन तक अभियान चलाया। फुल पेज खबर और प्रतिक्रिया छपी।
    अब उसके क्राइम रिपोर्टर को एसडीपीओ ने थप्पड़ मारा।
    यहाँ प्रेस काउन्सिल में भी सबसे ज्यादा शिकायतें प्रभात खबर की ही जाती हैं।
    आखिर प्रभात खबर के साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है ? देवघर में और भी अख़बारों के पत्रकार हैं। उनके साथ ऐसा क्यों नहीं होता ? इस पर विचार क्यों नहीं होता ?

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