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उत्तर प्रदेश

उपजा प्रेस क्लब के सचिव धीरु यादव पर मुकदमा, भास्कर टुडे का ट्रेडमार्क और फर्जी प्रेस कार्ड जारी करने का मामला

बरेली | यूपी के बरेली में “भास्कर टुडे डॉट कॉम” नामक पंजीकृत ट्रेडमार्क के दुरुपयोग और फर्जी प्रेस कार्ड बांटने का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में उपजा प्रेस क्लब बरेली के सचिव और विधिक अन्वेषण आयोग के चेयरपर्सन धीरेन्द्र सिंह उर्फ धीरु यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित राजीव कुमार ने शिकायत दर्ज कराई कि वह “भास्कर टुडे डॉट कॉम” ट्रेडमार्क (रजिस्ट्रेशन नंबर 5172820) के कानूनी मालिक हैं और इस नाम से न्यूज पोर्टल संचालित करते हैं। लेकिन धीरेन्द्र यादव ने इस ट्रेडमार्क की नकल कर एक फर्जी वेबसाइट बनाई और फर्जी प्रेस कार्ड जारी कर उत्तराखंड, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में वितरित किए।

इतना ही नहीं, आरोपी ने “भास्कर टुडे” के नाम से फर्जी आरएनआई नंबर का इस्तेमाल किया और अपनी फर्जी पहचान के जरिए आर्थिक लाभ कमाने का प्रयास किया।

पुलिस जांच और एफआईआर

पीड़ित ने इस मामले की शिकायत पहले भी की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आदेश पर क्षेत्राधिकारी हाइवे द्वारा जांच कराई गई, जिसके बाद थाना बिथरी चैनपुर में एफआईआर दर्ज की गई।

आरोपियों पर लगे गंभीर धाराएं : भारतीय दंड संहिता 2023 की धारा 318 (4) – धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा, धारा 336 (3) – इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज में छेड़छाड़

कैसे किया गया ट्रेडमार्क और प्रेस कार्ड का दुरुपयोग?

शिकायत के मुताबिक, धीरेन्द्र यादव ने “भास्कर टुडे” के नाम से फर्जी प्रेस कार्ड, स्टिकर और पहचान पत्र जारी किए और खुद को पत्रकार बताकर जनता को गुमराह किया। उन्होंने इस फर्जी पहचान का उपयोग करके कई लोगों को धोखा दिया और राजीव कुमार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया।

पीड़ित की मांग : सख्त कार्रवाई हो

राजीव कुमार ने मांग की है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाए और इस प्रकार के फर्जीवाड़े पर कड़ी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे पत्रकारिता जगत और मीडिया की साख पर सवाल खड़ा करता है।

प्रेस और मीडिया की साख दांव पर

फर्जी प्रेस कार्ड और ट्रेडमार्क दुरुपयोग जैसे मामले पत्रकारिता जगत के लिए एक बड़ी चुनौती बन रहे हैं। अगर इस पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे अपराधों को और बढ़ावा मिलेगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर कितना सख्त कदम उठाता है।

देखें एफआईआर कॉपी….


इस प्रकरण को लेकर उपजा के सचिव धीरेंद्र सिंह (धीरू यादव) ने भड़ास को बताया कि- “राजीव चौधरी नाम के एक व्यक्ति हमारे पास काम करते थे। मेरे नाप पर ट्रेडमार्क वगैरा सबकुछ चल रहा था। इन्होंने सब धोखाधड़ी करके चुपचाप अपने नाम करवा लिया। जो प्रेस कार्ड की बात है वे राष्ट्रीय सभ्यता के नाम से बने। इन्होंने मेरे ऑफिस का ताला इत्यादि तोड़ दिया।

लोकतंत्र भास्कर और भास्कर टुडे का आरएनआई मैंने कराया। मुझे चेयरमैन बनाकर रखा लेकिन बाद में मेरे साथ धोखा कर दिया।

मेरे उपर जो मुकदमों की बात बताई जा रही है, उनमें से दो में समझौता हो चुका है। एक मामला जो चल रहा है वह मेरे प्लॉट के विवाद से जुड़ा है। लेकिन अब समय है, मुझे बदनाम करने और छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।”

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