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उत्तर प्रदेश

दलित राजनीति : आकाश आनंद पर ऐक्शन के पीछे क्या मायावती का डर है?

बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार और अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी कहे जाने वाले आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करके परिवारवाद के चक्रव्यूह को तोड़ दिया। ऐसा उन्होंने भाजपा से डरकर किया अथवा खिसक रहे दलित वोटबैंक को बचाने के लिए किया, कारण चाहे जो हो लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस गूंज के मायने तलाशे जा रहे हैं…

कैलाश सिंह-

लखनऊ/दिल्ली | इन दिनों बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती द्वारा अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर निकाले जाने वाले ‘ऐक्शन’ के विभिन्न मायने सोशल मीडिया में छाए हैं। राजनीतिक गलियारों में भी इसकी गूंज से कई अर्थ निकाले जा रहे हैं।

अब मायावती ने चाहे भाजपा के ‘ईडी, सीबीआई’ की धौंस से डरकर अथवा परिवार में आंतरिक कलह के चलते यह कार्रवाई की हो लेकिन दलित वोटबैंक बचाये रखना उनकी चिंता का प्रमुख विषय है। कारण चाहे जो हो लेकिन यह तय माना जा रहा है कि देश की तमाम वह राजनीतिक पार्टियां जिनपर परिवारवाद की तोहमत है उनमें मायावती के इस ऐक्शन से दो बात स्पष्ट हो गई कि बसपा परिवारवाद के चक्रव्यूह को तोड़ने वाली पहली पार्टी के रूप में दिखने लगी है, साथ ही कड़े फैसले लेने वाले नेताओं में मायावती आज भी शीर्ष पर हैं।

राजनीतिक विश्लेषक भी मायावती की बदलती भाव- भंगिमा से हैरत में हैं। बसपा को भाजपा की ‘बी टीम’ कहने वाले विपक्षी दल तो मायावती के इस ऐक्शन को ईडी, सीबीआई का डर बताने से गुरेज नहीं कर रहे हैं।

चर्चाओं में यह तर्क दिया जा रहा है कि बसपा के उत्तराधिकारी कहे जाने वाले आकाश आनंद का व्यक्तित्व पार्टी की रैलियों, सभाओं में दिये जाने वाले उनके भाषणों से फायर ब्रांड नेता के रूप में विकसित होने लगा था। वह भाजपा के खिलाफ भी आग उगलने से परहेज नहीं करते रहे।

दरअसल केन्द्र में चाहे कांग्रेस की सरकार रही हो या मौजूदा समय में भाजपा की है, इनपर ईडी, सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों का इस्तेमाल आय से अधिक सम्पति अर्जित करने वाले राजनीतिक दलों या उनके नेताओं के खिलाफ इस्तेमाल करने की तोहमत लगती रही है, यह कोई नई बात नहीं है। एनसीपी नेता अजित पवार, प्रफुल्ल पटेल के अलावा कांग्रेस के नेताओं की तो कतार लगी है जो पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिए।

इस मामले में सड़क से लेकर संसद तक यदि कोई लड़ रहा है तो वह हैं कांग्रेस नेता राहुल गाँधी। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो राहुल गाँधी की सलाह अथवा निर्देश पर कांग्रेस के लगभग चार दर्जन नेता बाराती घोड़े की तरह जल्द ही पार्टी से बाहर नज़र आयेंगे और अस्तबल के जंगी घोड़े मोर्चा संभालेंगे। इसकी रिपोर्ट अगले एपिसोड में मिलेगी।

कुछ हद तक आय से अधिक सम्पति को लेकर ईडी, सीबीआई से न डरने वालों में सपा मुखिया अखिलेश यादव का नाम भी लिया जा रहा है, लेकिन मायावती को इस डर के साये में घिरा होने की चर्चा ए आम है।

लेखक तहलका न्यूज नेटवर्क के राजनीतिक संपादक हैं।

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