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प्रेस काउंसिल गठन में इतनी देरी क्यों लग रही भाई? हाईकोर्ट ने PCI से मांगा जवाब

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के गठन में हो रही देरी को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार और परिषद से जवाब तलब किया है। मुंबई प्रेस क्लब की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और प्रेस काउंसिल को चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी।

याचिका में कहा गया है कि प्रेस की स्वतंत्रता और नैतिकता सुनिश्चित करने वाली यह अर्ध-न्यायिक संस्था बीते आठ महीनों से निष्क्रिय है। दरअसल, 14वीं प्रेस काउंसिल का कार्यकाल 8 अक्टूबर 2024 को समाप्त हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी 15वीं काउंसिल का गठन नहीं हो पाया है।

मुंबई प्रेस क्लब का कहना है कि नए सदस्यों के चयन की प्रक्रिया 9 जून 2024 को शुरू तो की गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह अधूरी रह गई। याचिका में कोर्ट से आग्रह किया गया है कि काउंसिल का गठन शीघ्र कराया जाए ताकि मीडिया पर निगरानी रखने वाली यह संवैधानिक संस्था सक्रिय हो सके।

गौरतलब है कि प्रेस काउंसिल में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को अध्यक्ष बनाया जाता है और इसमें कुल 28 सदस्य होते हैं—20 निर्वाचित और 8 नामित। निर्वाचित सदस्य पत्रकारों, संपादकों और समाचार एजेंसियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि नामित सदस्यों में सांसद और विशेषज्ञ शामिल होते हैं।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि काउंसिल की अनुपस्थिति में पत्रकारिता की जवाबदेही और आचरण संबंधी निगरानी कमजोर हो रही है। ऐसे में कोर्ट से अपेक्षा है कि वह हस्तक्षेप कर प्रेस काउंसिल का गठन शीघ्र सुनिश्चित कराए।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह मामले की गंभीरता को समझते हुए तभी कोई अंतिम निर्णय लेगा, जब केंद्र और प्रेस काउंसिल अपना स्पष्टीकरण देंगे।

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