महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुनाई गई कथित ऑडियो क्लिप को लेकर भाजपा के मीडिया मैनेजमेंट पर सवाल उठे हैं। क्लिप को लेकर दावा किया गया है कि इसमें अखबारों में लेख छपवाने, टीवी एंकरों के वीडियो के जरिए नैरेटिव बनाने और सोशल मीडिया पर किसी मुद्दे को लेकर माहौल तैयार करने की रणनीति पर बातचीत हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ता विश्वंभर चौधरी ने इन कथित संवादों के आधार पर भाजपा पर मीडिया को प्रभावित करने और अखबारों के संपादकों पर दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं।
जरांगे पाटिल ने दावा किया कि यह क्लिप विधानसभा चुनाव के समय भाजपा की एक बैठक की है। उनके मुताबिक, इसमें भाजपा की आईटी सेल से जुड़ी एक महिला की बातचीत है। क्लिप के एक हिस्से में जरांगे के खिलाफ माहौल बनाने और उन्हें नुकसान पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा होने का दावा किया गया है। इसमें मराठा नेता उदयनराजे भोसले के साथ प्रवीण दरेकर और नितेश राणे को आगे करने तथा जरूरत पड़ने पर दूसरे लोगों के जरिए अपनी बात रखवाने की चर्चा होने का दावा है।
कथित बातचीत में टीवी एंकर अर्णब गोस्वामी के वीडियो लोगों तक पहुंचाने और उनके जरिए देश की आर्थिक स्थिति तथा राहुल गांधी से जुड़े मुद्दों पर नैरेटिव तैयार करने का भी जिक्र बताया गया है। इसके अलावा, अखबारों और सोशल मीडिया के जरिए जरांगे के खिलाफ माहौल बनाने तथा मीडिया मैनेजमेंट के लिए निजी खर्च करने की सलाह दिए जाने का दावा भी किया गया है।
क्लिप के दूसरे हिस्से को लेकर जरांगे ने दावा किया कि इसमें श्रीकांत शिंदे के जरिए 500 करोड़ रुपये पहुंचने की बात कही गई है। बातचीत में विधानसभा चुनाव के दौरान जरांगे की भूमिका और उनके राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी चर्चा होने का दावा है। जरांगे ने आरोप लगाया कि पिछले तीन साल से उन्हें बदनाम करने की साजिश चल रही है और मीडिया तथा टीवी के जरिए उनके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मामले की जांच कराने की मांग की है।
सवालों में अखबारों के संपादकों के जिक्र
कथित ऑडियो क्लिप को लेकर विश्वंभर चौधरी ने अखबारों के संपादकों और मीडिया संस्थानों के संदर्भ में भी सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, बातचीत में एक व्यक्ति यह कहता सुनाई देता है कि वह लेख लिखता है, लेकिन क्या लोकसत्ता उसे प्रकाशित करेगा। इसके जवाब में ‘अजय’ नाम का व्यक्ति कथित तौर पर कहता है, ‘देखता हूं कैसे नहीं छापता।’ चौधरी ने इस संवाद को अखबारों पर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर पेश किया है।
चौधरी ने दावा किया कि लोकसत्ता में भाजपा के पक्ष को जगह दिए जाने के बावजूद संपादक को धमकी देने जैसी भाषा का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने महाराष्ट्र टाइम्स के संपादक पराग करंदीकर को कथित बातचीत में ‘नॉर्मल’ बताए जाने पर भी सवाल उठाया। चौधरी ने पूछा कि इसका क्या मतलब है और किसी लेख के विरोध में लिखने पर लोकसत्ता के संपादक गिरीश कुबेर को ‘डीप स्टेट’ से जोड़ने जैसी बात कहने का आधार क्या है?
चौधरी ने कहा कि मीडिया संस्थानों को इन आरोपों का संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बड़े अखबारों के साथ इस तरह का व्यवहार किए जाने का दावा है, तो छोटे और क्षेत्रीय अखबारों पर किस तरह का दबाव हो सकता है।
जरांगे पाटिल की ओर से सुनाई गई कथित ऑडियो क्लिप और चौधरी के आरोपों ने मीडिया की स्वतंत्रता, राजनीतिक दलों के कथित मीडिया मैनेजमेंट और संपादकीय फैसलों को प्रभावित करने की कोशिशों पर बहस खड़ी की है। हालांकि, फिलहाल क्लिप की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसमें सुनाई देने वाली बातचीत और उससे जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।
ऑडियो क्लिप सुनिए…
(हालांकि, भड़ास4मीडिया इस ऑडियो क्लिप की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है।)

