भारत-चीन सीमा पर हालात को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के एक वीडियो में अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच कई जगहों पर झड़पों की बात कहे जाने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि इस वीडियो को ITBP के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया गया। इसके बाद विवाद बढ़ा और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को स्थिति पर सफाई देनी पड़ी।
इस घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि यदि सीमा पर सैनिकों के बीच झड़पें हुई हैं या कुछ स्थानों पर तनाव जारी है, तो इसकी जानकारी सार्वजनिक करने में क्या परेशानी है? हालांकि, वीडियो में DG ITBP के कथित बयान और उसे हटाए जाने के पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
आरके सिंह ने भी उठाए थे सवाल
पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह भी अरुणाचल प्रदेश में चीन की गतिविधियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनके हवाले से दावा किया गया है कि चीन ने भारतीय क्षेत्र में कुछ पेट्रोलिंग पॉइंट पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री से सवाल किया कि भारतीय सेना को इन पेट्रोलिंग पॉइंट को छोड़ने का आदेश किसने दिया। उनका कहना है कि यह देश की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।
आरके सिंह का प्रशासनिक अनुभव भी इस मुद्दे को चर्चा में लाता है। केंद्रीय मंत्री बनने से पहले वह देश के गृह सचिव रह चुके हैं। ऐसे में उनके आरोपों पर सरकार की ओर से तथ्यात्मक स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है।
वीडियो हटाने पर सरकार की पारदर्शिता को लेकर सवाल
ITBP के आधिकारिक अकाउंट से वीडियो हटाए जाने के दावे ने सीमा पर वास्तविक स्थिति और सरकारी संचार की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। आलोचकों का आरोप है कि संवेदनशील सीमा संबंधी जानकारी सामने आने के बाद उसे हटाना चीन को क्लीन चिट देने जैसा है।
यह विवाद वर्ष 2020 में भारत-चीन सीमा पर तनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान की याद भी दिलाता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय क्षेत्र में न कोई घुसा है और न ही किसी ने कब्जा किया है। उस समय भी विपक्ष ने सरकार से सीमा की स्थिति पर सवाल पूछे थे।
हालांकि, मौजूदा मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ITBP के DG ने वास्तव में क्या कहा, वीडियो किस वजह से हटाया गया और विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर क्या स्पष्टीकरण दिया। इन तथ्यों की पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
सीमा सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उपलब्ध तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करे। सवाल केवल एक वीडियो का नहीं, बल्कि देश की सीमाओं पर वास्तविक हालात और उनसे जुड़ी जानकारी को लेकर सार्वजनिक जवाबदेही का भी है।
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