आज दैनिक भास्कर की लीड। छोटी सी खबर में नामों, शब्दों आदि का दोहराव है। दोनों फोटो बराबर में होती तो देखने में सुंदर लगता, मुख्य शीर्षक के अलावा बाकी सब शीर्षक एक लाइन में हो सकता था।
संजय कुमार सिंह
आज सबसे पहले दैनिक भास्कर की इस खबर के बारे में। यह मेरे 10 अखबारों में अकेली लीड है और बिल्कुल असामान्य। आज जब बदलती पत्रकारिता की बात हो रही है तो इसकी भी बात होनी चाहिए। खबर के अनुसार,…. रविवार को खरगे जब पटना में एक कार्यक्रम संबोधित कर रहे थे, तब एक व्यक्ति ने चीखते हुए कहा कि जब तक देश में विद्रोह नहीं होगा, मोदी सरकार कहीं नहीं जाएगी। इस पर खरगे ने मंच से ही चिल्लाते हुए कहा कि मोदी क्या, मोदी का बाप भी जाएगा। मैं खरगे के कहे का बचाव नहीं कर रहा हूं पर मुझे लगता है कि यह बहुत सामान्य जवाब था और ‘मोदी के बाप’ का मतलब वह नहीं है जो बना दिया गया है। हो भी नहीं सकता है और कभी नहीं होता है। पर वह मुद्दा नहीं है। मेरी चिन्ता का विषय भी नहीं।
खबर के अनुसार, …. इसके बाद लोगों ने उस व्यक्ति को पीटा और बाहर कर दिया। दूसरी खबरों में उसे कांग्रेस का आदमी कहा गया है। पीट कर बाहर कर दिए जाने आदि की सूचना है। जाहिर है, यह सब कुछ बहुत असामान्य है और खबर पूरा विवरण है, शीर्षक वह नहीं होना चाहिए था जो भाजपा चाहती है। शीर्षक खबर का होना चाहिए था। इसमें खरगे ने जो कहा वह प्रतिक्रिया है। अभद्र टिप्पणी नहीं। खबर यह है कि भाषण के बीच किसी श्रोता ने ऐसा कहा और ऐसे कहा कि वह भाषण देने वाले को सुनाई पड़ा, उन्होंने जवाब दिया आदि आदि। जवाब पूरी खबर का छोटा सा हिस्सा है। यह जवाब चाहे जितना गलत या अनुचित हो, सामान्य प्रतिक्रिया है। स्वाभाविक और सामान्य प्रतिक्रिया है। कोई भी यही कहता, किसी के लिए कहता। उसके बाप होते तब भी कहता और कहा जाता रहा है। जिसने छेड़ा उसके लिए था। जैसे छेड़ा उसमें यही सुनता या यही जवाब होता।
यह वैसे ही है जैसे अमित शाह ने संसद में ‘साला’ कह दिया था। बड़े आराम से कह दिया – रिकार्ड से निकाल दिया जाए। अगर यह लीड है तो वह ज्यादा बड़ी लीड थी। अखबार का काम पार्टी के लिए प्रचार करना या पार्टी का मुद्दा उठाना नहीं है। अखबार का काम खबर देना है और पूरी खबर होते हुए भी प्रस्तुति ऐसी है जैसे प्रचार लग रहा है। कहा जा सकता है कि टिप्पणी मोदी पर नहीं है, टोकने वाले को जवाब है। टिप्पणी अभद्र हो सकती है, जवाब सही हो या नहीं, सामान्य है। हम सब लोग ऐसे ही जवाब देते हैं। भाजपा को इसे मुद्दा बनाने का पूरा हक है लेकिन अखबार और संपादक को देखना होता है कि वह खबर दे, विज्ञप्ति न छापे।
आज कुछ अखबारों में न्यायमूर्ति संजय कौल की किताब से जुड़ी दि इंडियन एक्सप्रेस की कल की खबर का फॉलोअप है। यह बदलती पत्रकारिता का संकेत हो सकता है। वैसे तो यह 2014 के बाद की याद में अपने किस्म की पहली खबर है और संभव है एजेंसी से चलने के कारण भी जगह पा गई हो। लेकिन एजेंसी से चलना भी मायने रखता है। आज के अखबारों की खासियत यह भी है कि 10 अखबारों में आठ से ज्यादा लीड है। ऐसा तब होता है जब कोई खास या बड़ी खबर न हो। इसलिए न्यायमूर्ति संजय कौल की किताब की खबर छपना संयोग भी हो सकता है। किताब का जो अंश छपा है वह पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ से संबंधित है इसलिए उसके छपने का अपना कारण भी हो सकता है लेकिन मुझे बहुत दिनों बाद इंडियन एक्सप्रेस की कोई खबर अगले दिन पहले पन्ने पर दिखी।
कुछ महीने पहले या पिछले साल तक की स्थितियों में मल्लिकार्जुन खरगे से संबंधित आज की खबर कइयों की लीड हो सकती थी। आज ऐसा नहीं है यह भी बदलती पत्रकारिता का संकेत है। हालांकि, इसीलिए दूसरी खबरों को महत्व मिला होगा या देना पड़ा होगा। तय फॉर्मूले से अलग काम करने में दिक्कत होती ही है। इसलिए संभव है कि आज की खबर इस सरकार में किताबों पर चलती रही सेंसर के खिलाफ न होकर एक सामान्य सूचना हो। जवाहर सरकार ने लिखा भी है, भारत के संघर्षरत लोकतंत्र के लिए, सीजेआई चंद्रचूड़ अब तक की सबसे बड़ी निराशा रहे हैं। गोगोई जैसे अन्य लोग तो ‘आप-जानते-ही-हैं-क्या’ (यानी सत्ता के इशारे पर चलने वाले) के रूप में जाने जाते थे, और कुछ लोग ‘भक्त’ थे या हैं। लेकिन चंद्रचूड़ ने अलग होने का दिखावा किया और लाखों लोगों की सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
ऐसा कहने और मानने का कारण यह भी हो सकता है कि अपने कार्यकाल में चंद्रचूड़ इस बात को लेकर उत्सुक लगे थे कि इतिहास उन्हें एक सीजेआई के रूप में कैसे याद रखेगा। अब न्यायमूर्ति कौल के संस्मरण से इसके संकेत मिलने शुरू हुए हैं और इसमें पठनीयता भी है। लेकिन चंद्रचूड़ के कार्यकाल में जिस तरह गणेश पूजा के मौके पर प्रधानमंत्री उनके घर गए और खुद ही उसे सार्वजनिक किया उस पर चंद्रचूड़ के रुख से मैंने चंद्रचूड़ को बहुत लिजलिजा मान लिया था और वही संजय कौल के संस्मरण में है। इसलिए मुझे इसमें कोई खबर नहीं दिख रही है। और इसका पहले पन्ने पर छपना महत्वपूर्ण लग रहा है। हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस की मूल खबर के साथ भी चंद्रचूड़ का पक्ष है।
चुनाव आयोग से संबंधित इंडियन एक्सप्रेस की एक्सक्लूसिव खबर के साथ ऐसा नहीं हुआ था। संजय कौल की किताब की खबर तो फिर भी प्रचार है। चुनाव आयोग से संबंधित इंडियन एक्सप्रेस की खबर शुद्ध खबर थी भले महेश जेठमलानी के आरोपों के अनुसार कांग्रेस के विज्ञापन के बदले की गई हो। जो खबर थी वह तो ऐसी थी जो किसी को भी मालूम होती तो छपनी चाहिए थी और खबर में ही बताया गया था कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने सरकार को चिट्ठी लिखी थी, सरकार ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता की आड़ ली लेकिन खबर तो फिर भी और जैसा होता है, चिट्ठी की फोटोकॉपी जो पहचान छिपाकर भेजी जा सकती थी और पहले पन्ने की खबर थी फिर भी नहीं छपी थी या छपी हो तो चर्चा में नहीं थी।
वैसे ही जैसे झारखंड के सांसदों को झोला भर कर रिश्वत देने और उसे बैंक में जमा कराए जाने की खबर बड़ी मुश्किल से चर्चा में आई थी। उन दिनों खबरों के फॉलो अप का रिवाज था पर उसका नहीं हुआ था। अब नहीं होना आम है। मुख्य चुनाव आयुक्त वाली खबर तक ऐसी ही रही। आज नई शुरुआत हुई है। अमूमन ऐसी खबरें अखबारों के रिपोर्टर मूल खबर के हवाले से फाइल करते थे। हेडलाइन मैनेजमेंट और मोदी सरकार के खिलाफ खबरें छपना बंद होने के बाद अव्वल तो सरकार विरोधी खबरें होती ही नहीं थीं और जो हुईं उनकी चर्चा दूसरे मीडिया संस्थानों ने नहीं के बराबर की। सोशल मीडिया पर ऐसी खबरों की चर्चा या उन्हें साझा करने वाले भी खेमों में बंटे हुए थे। ऐसे में आज पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डीवाई चंद्रचूड़ की आलोचना करने वाली खबर दूसरे अखबारों में पहले पन्ने पर छपी है तो बदलाव है या शुरुआत – समय बताएगा।

हिन्दी अखबारों में आज यह खबर देशबन्धु में छह कॉलम की लीड है और एजेंसियों के हवाले से है। इस खबर का शीर्षक है, सरकार के प्रति जरूरत से ज्यादा नरम थे चंद्रचूड़। अमर उजाला में यह खबर पांच कॉलम का एंकर है और एजेंसी के हवाले से ही है। यहां शीर्षक है, जज नियुक्ति में केंद्र की सलाह लेते थे पूर्व सीजेआई। नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने पर आज भी भरपूर विज्ञापन है और गिनती की खबरें हैं। इनमें फॉलोअप नहीं है और जो लीड है लगभग वही आज दैनिक भास्कर में लीड है। दैनिक भास्कर में भी इंडियन एक्सप्रेस की खबर का फॉलो अप पहले पन्ने पर नहीं है और आधे पन्ने का विज्ञापन है। दैनिक भास्कर की लीड का शीर्षक है – खरगे ने मोदी पर फिर अभद्र टिप्पणी की; शाह का जवाब : कांग्रेस ने हदें पार कीं। अमर उजाला में यह खबर सेकेंड लीड है। अमर उजाला की लीड भी आज सबसे अलग है। शीर्षक है – काशी में 20 लाख ने देखा एयर शो।
अंग्रेजी अखबारों में आज इंडियन एक्सप्रेस में तो किताब वाली खबर होनी ही नहीं थी। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह चार कॉलम की खबर है जो जारी है और टाइम्स न्यूज नेटवर्क की है। शीर्षक है, डीवाई चंद्रचूड़ सरकार के प्रति जरूरत से ज्यादा नम्र थे। हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया की खबर तीन कॉलम में है। यहां शीर्षक है, पूर्व मुख्य न्यायाधीश से अपेक्षाएं ज्यादा थीं। द हिन्दू में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है लेकिन यहां पहले पन्ने पर एक खबर है जो दूसरे अखबारों में नहीं है। खबर कांग्रेस नेता अल्का लांबा और सप्तगिरि उलका की प्रेस कांफ्रेंस की है। द हिन्दू में इस खबर का शीर्षक है, कांग्रेस ने मणिपुर के मुख्यमंत्री का इस्तीफा और नए चुनाव की मांग की।
द हिन्दू ने अगर कांग्रेस की प्रेस कांफ्रेंस और मणिपुर के मामले को इतनी प्रमुखता दी है तो एक सरकारी खबर को लीड भी बनाया है। इसका शीर्षक है, सरकार ने कहा, पूर्वोत्तर में ड्रग्स के खिलाफ छापामारी में 18 लोग गिरफ्तार, 100 करोड़ रुपये का पता चला। आप जानते हैं कि पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अमित शाह ने पंजाब से नशा खत्म करने की घोषणा की है और यह 2029 तक पूरा होना है। इस छापे और खबर को इसी लिहाज से देखना चाहिए। खबर का उपशीर्षक भी है, गृह मंत्रालय का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों और पुलिस ने मिजोरम के आइजोल, चम्फाई और जोखावथर; मणिपुर के चुराचांदपुर; और असम के कछार इलाके में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय ‘नार्को-हवाला’ नेटवर्क को निशाना बनाया है।
दि एशियन एज में आज वायु सेना प्रमुख से पीटीआई की बातचीत के आधार पर एक खबर चार कॉलम में छपी है जो एयरफोर्स डे और बनारस में गंगा पर वायुसेना के प्रदर्शन से संबंधित है। इस खबर का शीर्षक है, (ऑपरेशन) सिन्दूर के बाद शांत खड़े रहने की गुंजाइश नहीं है। लीड प्रधानमंत्री का भाषण है जो बैंकों के लिए साइबर खतरे के संबंध में है। उन्होंने बैंकों से अधिकतम सुरक्षा की अपील की। आज इंडियन एक्सप्रेस की लीड भी यही खबर है। इसका शीर्षक है, युद्ध अर्थव्यवस्थाओं को निशाना बनाते हैं, भारत के बैंकिंग को साइबर टेरर से बचाना जरूरी है। खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री उड़ीशा में भारतीय किजर्व बैंक के डाटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन कर रहे थे।
कहने की जरूरत नहीं है कि देश में साइबर हमले और डेटा लीक से बचने के उपाय नहीं के बराबर हैं। डिजिटल ठगी से जो बर्बादी हुई है उसकी सामान्य रिपोर्टिंग नहीं के बराबर है जबकि आम लोग और छोटे व्यवसाय इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। यह सब शुरू में ही रोक दिया जाना चाहिए था लेकिन भाजपा का साइट हैक किए जाने के बावजूद नहीं हुआ। इसका नुकसान देश को हुआ है जिसका हिसाब शायद ही कभी हो। यही स्थिति नशे के बारे में है। सच्चाई यह है कि जेल में बंद एक गुंडा तक नियंत्रण में नहीं है। और सरकार छोटे-मोटे अपराधियों के घर पर बुलडोजर चलवाती रही है।
इसके बावजूद अकेले द हिन्दू ने अमित शाह के ‘अभियान’ को लीड बनाया गया है। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड विदेश मंत्री के विचार हैं। उन्होंने कहा है, अंतरराष्ट्रीय संकट में ग्लोबल नॉर्थ को प्रयास बढ़ाना चाहिए। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, अमेरिकी चुनाव के बाद ईरान का मामला बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं ट्रम्प। इस संबंध में दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच जंग और बयान दोनों तेज हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि ईरान ने डील नहीं की तो सोमवार को बड़ा हमला झेलेगा। उन्होंने कहा, ईरान को अमेरिका से डील के लिए तैयार होना ही पड़ेगा।
ट्रम्प ने फिर दावा किया कि ईरान डील के लिए उत्सुक है। ट्रम्प के बयान पर ईरान ने पलटवार किया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरांगची ने कहा है कि अमेरिका फिर आजमा ले, ईरान झुकने या पीछे हटने को तैयार नहीं है। ईरान अमेरिका को मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। इस बीच, ईरान ने रविवार को बंदर अब्बास पोर्ट के पास अमेरिकी लुकास ड्रोन को मार गिराया। हूती विद्रोहियों ने यमन पर मिसाइलें दागीं। खबर यह भी है कि ब्रिक्स फोरम का ईरानी संसदीय दल रविवार को नई दिल्ली पहुंचा। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद कालिबाफ पहले की घोषणा के अनुसार, दल में नहीं हैं।
द टेलीग्राफ की लीड किताबों की दुकान पर बुलडोजर चलाए जाने के विरोध की खबर और पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्री द्वारा इसका बचाव है। मुख्य मंत्री देश विरोधी और सनातन विरोधी लेखन से नाराज लगे। और किताबों के खिलाफ काम करने वालों का बचाव किया। यहां भी विज्ञापन है और गिनती की खबरें हैं।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



