-गुणानंद जखमोला-
व्यभिचार अब राजनीति का एक अहम हिस्सा, राजनीति में आत्मघाती हथियार के तौर पर इस्तेमाल हो रही हैं औरतें
यूं तो हमेशा ही लंबा लिखता हूं। जीवन प्रिंट मीडिया में ही बीता है, आज कुछ अधिक लंबा लिख रहा हूं। समय मिले तो पढ़ना और समझना। बता दूं, मैं उस आखिरी पीढ़ी के पत्रकारों में शुमार हूं जो जनहित के मुद्दे उठा रहे हैं। निकट भविष्य में जनता की बात कहने वाले पत्रकार ढूंढे से भी नहीं मिलेंगे। इसे भी समझना।
कल असम की जेनी 23 साल बाद बिना नंबर प्लेट की कार से देहरादून के प्रेस क्लब पहुंची और उसने मीडिया के सामने पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाए। उसने 16 साल की उम्र में मधुबन, मसूरी और दिल्ली में अपने यौन शोषण के आरोप लगाए और बेटे के डीएनए टेस्ट की बात कही। केस री-ओपन करने की मांग की। मैं जेनी की मांग का समर्थन करता हूं। बिल्कुल, यदि न्याय आधा-अधूरा मिला है तो दोबारा केस खोला जाना चाहिए। भले ही यह राजनीतिक हो, लेकिन उसका यौन उत्पीड़न हुआ ही न।
मीडिया ने किसे दी तवज्जो?
जेनी के शोर में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधर साहू की गिरफ्तारी और उसका लचकते हुए मीडिया के सामने आना पूरी तरह दब गया। मीडिया को जेनी प्रकरण रेखा आर्य की जान से अधिक रोमांचक लगा। कैबिनेट मंत्री पर 22 साल से जो जुल्म हो रहा था, वह जेनी के यौन शोषण से कहीं कमतर नहीं है। फिर क्या बात है कि मीडिया ने साहू से अधिक जेनी को तवज्जो दी?
नेताओं और उनके रिश्तेदारों का सोशल एटिकेट
साहू का एक किस्सा सुनिए। कई साल पहले की बात है। मैं रेखा आर्य के निवास पर उनका इंटरव्यू करने गया था। तभी एक पीजेंट शो जीतने वाली युवती भी वहां आ गई। कमरे में हम तीनों बैठे थे। अचानक ही साहू लट्ठे का कच्छा पहने कमरे में आया और उस युवती को घूरने लगा। मैंने रेखा आर्य की ओर देखा, उन्होंने मेरी ओर, और वह झेंप गईं। फिर उन्होंने साहू से कहा कि पत्रकार से बात कर रही हूं, तब जाकर साहू वहां से गया। यह नेताओं और उनके रिश्तेदारों का सोशल एटिकेट है।
एक चैनल की डिबेट में बैठा था। वहीं एक रेप विक्टिम से मुलाकात हुई। इसके साथ भाजपा के एक पदाधिकारी ने रेप किया तो मामला दर्ज भी हुआ, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई। अहम बात यह है कि यह महिला भाजपा के लिए ही निशुल्क काम करती थी, पार्टी की विचारधारा से प्रभावित थी। इसका रेप कराने में भाजपा की एक महिला नेत्री का योगदान था।
मैंने देहरादून में कांग्रेस और भाजपा की अनेक महिलाओं को देखा है, जो देखते ही देखते हवाई चप्पल और 250 रुपये के सलवार-सूट से ब्रांडेड कपड़ों और हाई हील्स तक पहुंच गईं और एसयूवी में सफर कर रही हैं। कई महिलाएं तो बाकायदा नेताओं पर मक्खी की तरह भिनभिनाती हैं। बेटा नशे का शिकार है, बेटी पढ़ाई और करियर को लेकर परेशान है और मां नेताओं के साथ समाजसेवा कर रही है, किन शर्तों पर?
पांच सितारा होटल की डील
दो-तीन साल पहले की बात है। एक नेता दिल्ली गया। पांच सितारा होटल में ठहरा। एक बनिये को प्रोजेक्ट देना था। जैसा कि होता ही है, पांच सितारा होटल में डील हुई। पहले मोटा लिफाफा, फिर महंगी दारू, फिर भोजन। भोजन के बाद नेताजी किंगसाइज बेड पर लेट गए और अपने सिर को हथेली पर टिकाते हुए रहस्यमयी शब्दों में बोले, अब क्या? बनिये का बेटा, जो महज 30-32 साल का था, नेताजी की बात समझ नहीं पाया। उसने सोचा, नेताजी को खाने के बाद पान-सुपारी चाहिए होगी। पीए से पूछा तो वह बोला, धत्त! नेताजी को गरम गोश्त चाहिए। वह घबरा गया, उसके लिए यह पहली बार था। खैर, पीए ने सारा इंतजाम किया। तीन घंटे के 50 हजार, और फिर नेताजी ने साइन किए और सो गए।
हमाम में सब नंगे
दरअसल, व्यभिचार अब राजनीति का एक अहम हिस्सा है। हमाम में सब नंगे हैं वाली बात है। देवभूमि के अधिकांश नेताओं के चटपटे किस्से हम पत्रकारों के पास एक से बढ़कर एक हैं। पर देवभूमि में नेता अब औरतों को आत्मघाती हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। यानी नुकसान तो हर हाल में औरत का ही होता है। पुरुष प्रधान समाज है, बातें भले कर लो कि समानता है। नेता जंग जीतने के लिए किसी भी हद तक जा रहे हैं।
यह दुर्भाग्य है कि जिस उत्तराखंड के लिए हम लड़े, मरे, उस प्रदेश में दिनों-दिन इन निर्लज्ज, भ्रष्ट और व्यभिचारी नेताओं की तादाद बढ़ रही है। इस गंद को हर हाल में दूर किया जाना चाहिए। दल कोई भी हो, नेता कोई भी हो, जो दागी है, उसे सत्ता से दूर फेंक दिया जाना चाहिए। वरना यह प्रदेश इतने छोटे से समय में ही तेजी से बर्बादी की राह पर बढ़ रहा है।

