एसआईआर के दौरान कुल 13 करोड़ वोटर हटाए गए हैं। अमित शाह और उनके प्रोत्साहन में प्रचारक कह रहे हैं, तीन करोड़ वो हैं जिनकी मौत हो चुकी है, डेढ़ करोड़ दो जगह नाम वाले हैं और तीन करोड़ घुसपैठिए हैं, जिनके नाम कटे। यह साढ़े सात करोड़ ही हो रहे हैं। 5.5 करोड़ के अलावा, तीन करोड़ मरे होंगे तो नए वोटर जुड़ने भी चाहिए और ये मरने वालों से ज्यादा होने चाहिए। कहां गए? अगर दो जगह नाम वालों को अब हटाया गया तो पहले क्यों नहीं हटाया गया था, कौन जिम्मेदार है, उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए? 2024 का चुनाव इसी मतदाता सूची से हुआ है तो वह चुनाव रद्द क्यों नहीं होना चाहिए? तीन करोड़ घुसपैठिए पहले से थे तो हटाए क्यों नहीं गए, 2024 के बाद आए, तो कैसे? गृहमंत्री क्या कर रहे थे? अगर दोबारा सत्यापन करना पड़ रहा तो पहली बार की गलतियों के लिए कौन जिम्मेदार है? ऑपरेटर या मुख्य चुनाव आयुक्त जो सहायक आयुक्तों की सलाह नहीं मान रहे थे?
संजय कुमार सिंह
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री को सीधी चुनौती दी है। आज उसकी खबर अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं के बराबर है। देशबन्धु में यह खबर दो कॉलम में है और टॉप पर छपी खबर का शीर्षक है, विदेशी मदद से प्रधानमंत्री बने मोदी : राहुल गांधी। खबर इस प्रकार है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आरोपों पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए कहा है कि वे झूठ फैला रहे हैं। असलियत यह है कि मोदी खुद विदेशी मदद से प्रधानमंत्री बने और विदेशी मदद से ही अभी तक इस पद पर बने हुए हैं। निश्चित रूप से यह एक बेहद गंभीर आरोप है और हाल में प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर अवरोध होने का आरोप लगाया था। मीडिया का काम है कि उनके इस आरोप के संदर्भ में राहुल गांधी के आरोपों का जवाब मांगे और जनता को बताए। पर वह होना नहीं है क्योंकि मीडिया अपना काम करता नहीं है और सरकार (या प्रधानमंत्री) उसका सहयोग नहीं करते हैं। हालत आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही पत्रकारों को साथ विदेश ले जाना बंद कर दिया था और अभी तक एक भी प्रेस कांफ्रेंस नहीं की है।
ऐसे में राहुल गांधी या कांग्रेस और नरेन्द्र मोदी तथा भाजपा के विदेशी संबंध पर किसी भी मंच पर बात करने की राहुल गांधी की चुनौती महत्वपूर्ण है और दुनिया जानती है कि इसका जवाब मिलने की उम्मीद नहीं के बराबर है। इसलिए आज इस खबर का नहीं होना आश्चर्यजनक नहीं है। लेकिन सरकारी लीपापोती जारी है। हिन्दुस्तान टाइम्स में टॉप पर छपी खबर के अनुसार, अमित शाह ने कहा है कि सरकार संसद में वोट चोरी पर चर्चा के लिए तैयार है। दूसरी ओर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को चुनौती दी है। संसद में चर्चा के लिए भाजपा सरकार का ‘तैयार होना’ पुरानी खबर है और यहां इसकी चर्चा पहले हो चुकी है। संसद के पिछले सत्र के दौरान ज्यादातर समय और खासकर अंतिम दिनों में अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दोनों नहीं आए और लगातार कई दिन नहीं आए। उन्हें बताना था कि कॉक्रोच आंदोलन के दौरान बच्चों पर पेलेट गन किसकी अनुमति से चले।
वे आए ही नहीं, जवाब भी नहीं दिया। इसलिए इस्तीफा मांगा जा रहा था उसपर कुछ कहने की जरूरत नहीं है। कोलकाता के अंग्रेजी दैनिक द टेलीग्राफ ने अमित शाह के आरोप को फ्लैग शीर्षक बनाया है लेकिन मुख्य शीर्षक है, इंडिया (समूह) ने अमित शाह को सड़क पर ला दिया। नई दिल्ली डेटलाइन से जेपी यादव की खबर इस प्रकार है, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को भाजपा के जवाबी हमले के साथ कांग्रेस शासित तेलंगाना पहुंचे और हैदराबाद में तिरंगे के साथ एक किलोमीटर चले। वे सेव डेमोक्रेसी रिमूव एनार्की (लोकतंत्र बचाएं, अराजकता मिटाएं) मार्च का नेतृत्व कर रहे थे। केंद्रीय मंत्रियों समेत भाजपा के वरिष्ठ नेता विपक्ष के वोट चोरी अभियान के खिलाफ भिन्न राज्यों में कई दिनों से जवाबी हमला कर रहे हैं।
इसपर सुप्रिया श्रीनेत ने लिखा है, … एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने कल कुछ देर के लिए महाराजगंज पहुँची। … छात्रों ने कहा, “मैम, आप लोग तो वोट चोरी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं, यह बीजेपी वाले किसके ख़िलाफ़ मार्च निकाल रहे हैं?” मैंने हँस कर कहा – पता नहीं, मैं भी इसी का जवाब ढूँढ रही हूँ। तभी पीछे एक बुजुर्ग खड़े थे ज़ोर से बोले “उसी के ख़िलाफ़ जिसे बदनाम करने के लिए करोड़ों फूंक दिए, और अब उसी ने इनका सारा सच, सारा कच्चा चिट्ठा खोल कर रख दिया है।” मैंने दादा से हाथ मिलाया और गाड़ी में बैठ गई!बात गाँव-गाँव पहुँच चुकी है-मोदी जी झोला तैयार रखिए। रजत शर्मा ने लिखा है, …. अमित शाह ने चुनौती दी कि संसद में बहस हो, तो सरकार हर सवाल का जवाब देगी। असल में लोकतंत्र में सवाल-जवाब का सही मंच संसद है लेकिन कांग्रेस जब तीन-तीन बार मोदी को चुनाव में नहीं हरा पाई तो उसने सड़क का रास्ता चुना और आज बीजेपी ने सड़क पर उतर कर इसी को काउंटर किया। आप समझ सकते हैं कि सरकार को सत्ता बचाने के लिए सड़क पर लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
जहां तक चुनाव आयोग की गड़बड़ियों और एसआईआर का सवाल है, अमर उजाला की आज की लीड का शीर्षक है, यूपी की मतदाता सूचियों की फिर होगी गहन जांच। पीलीभीत में गडबड़ी सामने आने के बाद यह चुनाव आयोग का बड़ा फैसला है। खबरों के अनुसार, एसआईआर में नाम जोड़ने और हटाने का दोबारा सत्यापन होगा। दरअसल पांच चुनावी राज्यों में 2.29 करोड़ वोटर कम हो गए, उनमें उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक 2.04 करोड़ वोटर हैं। खबर है कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा कल बनारस में थे। वहां उन्होंने ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न’ और विपक्ष के आरोपों को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों के सवालों और ‘SIR’ के मुद्दों पर घिरने के बाद संबित पात्रा वहां से उठकर चले गए। इसकी चर्चा सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में है।
वोट चोरी और एसआईआर पर घिरी सरकार पर आरोप है कि टाटा (समूह को) आपराधिक तौर पर नष्ट किया जा रहा है। एसआईआर से संबंधित आरोपों से जूझने के लिए संबित पात्रा ही नहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री सड़कों पर हैं। प्रचारक लगाए गए हैं। दि इंडियन एक्सप्रेस ने आज की इन दोनों खबरों से अलग, एक अन्य खबर को लीड बनाया है। इसके अनुसार, वित्त मंत्री और वित्त मंत्रालय से खबर है कि टाटा समूह देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और उससे संबंधित विवाद (या उसका अपना आंतरिक टकराव) एक ‘नाजुक मामला’ है। उम्मीद की जाती है कि यह जनता में नहीं छलकेगा। फाइनेंशियल एक्सप्रेस लीडरशिप अवार्ड्स की शुरुआत पर वित्त मंत्री ने कहा है कि वे निवेशकों की चिन्ता पर बात करने, सुनने के लिए तैयार हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया में इस खबर के टाटा वाले हिस्से को ही प्रमुखता दी गई है। उन्होंने कहा है, आंतरिक तौर पर सौहार्द के साथ निपटाया जाना चाहिए। मुख्य खबर का शीर्षक दिल्ली में ग्रैप टू की पाबंदियां लागू होने के कारण कारों पर सख्ती और इस वजह से दिल्ली की सीमा पर जाम लगने की खबर है। नवोदय टाइम्स की लीड एक्यूआई 324 होने और ग्रैप टू लागू होने की खबर है। मुद्दा यह है कि प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियां चल रही थीं तो एक्यूआई कम था और जब अन्य कारणों से बढ़ गया तो तमाम गाड़ियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया जो लोगों के लिए तरह-तरह की परेशानियों का कारण है। जाहिर है, ये परेशानियां प्रदूषण के कारण होने वाली परेशानियों से कम और अपेक्षाकृत सस्ती हैं। दिल्ली में इस समय प्रदूषण बढ़ना नया नहीं है। ऐसे में गाड़ियों पर प्रतिबंध से होने वाली परेशानियों का ख्याल रखा जाना चाहिए और व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि इन दिनों प्रदूषण न बढ़े या बढ़े तो किसी और तरीके से कम किया जा सके।
दीवाली के समय पटाखे रोकना एक तरीका हो सकता है लेकिन जब था तब सरकार ने उसे लागू नहीं किया। आज दि एशियन एज की एक खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध में ढील दी और 7 नवंबर व दीवाली के लिए हरित पटाखों की अनुमति दी है। साथ ही अवैध बिक्री पर चिन्ता जताई है। दीवाली के बाद 9 नवंबर से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध है। द हिन्दू की लीड सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली-एनसीआर में दो दिन के लिए हरित पटाखों की अनुमति मिलने की खबर है। अखबार का उप शीर्षक है – सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि दीपावली मनाने के लिए पटाखे फोड़ना एक धार्मिक प्रथा है; लेकिन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना उत्सव के उद्देश्य को विफल कर देता है। जो भी हो, मौसम अपना काम कर रहा है, सरकार के पास कोई विकल्प नहीं है और जो आजमाया गया है वह आम आदमी को परेशान करने वाला है। फिर भी चल रहा है। इससे एक नई परेशानी खड़ी हो गई है और वह है दिल्ली की सीमा पर जाम और भीड़-भाड़।
इस क्रम में आज द हिन्दू की एक खबर उल्लेखनीय है। यह मनरेगा के नए रूप के तहत शिकायत दूर करने के नियम हैं। इससे संबंधित कुछ नियम हटाए भी गए हैं और इनमें एक है, पहली नजर में वित्तीय घपलों के सबूत लगने वाले मामलों में एफआईआर दर्ज कराने का प्रावधान शामिल है। आप समझ सकते हैं कि चल क्या रहा है। दैनिक भास्कर के पहले पन्ने की उल्लेखनीय खबरों में एक खबर वही भी है जो द टेलीग्राफ में लीड है। यहां इसका शीर्षक है, भाजपा की पदयात्रा….शाह बोले – कांग्रेस वेंटीलेटर पर, मोदी से मैराथन नहीं कर सकती।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



