अश्विनी मिश्रा-
क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे ताकतवर दवा कोई गोली नहीं, बल्कि ‘भूखा रहना’ है?
40 वर्षों का अनुभव रखने वाले प्रसिद्ध उपवास विशेषज्ञ डॉ. एलन गोल्डहैमर (Dr. Alan Goldhamer) ने इंसान के शरीर, बीमारियों और उपवास (Fasting) को लेकर कुछ ऐसे चौंकाने वाले सच बताए हैं, जो हर आम इंसान की आंखें खोल देंगे।
यहाँ इस पूरी बात को समझकर कोई भी अपनी सेहत की कायापलट कर सकता है:
- आधुनिक दुनिया की सबसे बड़ी बीमारी: “अति-भोजन” (Dietary Excess)
प्राचीन काल में इंसानों के लिए खाना ढूंढना मुश्किल था, लेकिन आज खाना हर जगह और जरूरत से ज्यादा मौजूद है। बीपी, डायबिटीज, दिल की बीमारियां और कुछ कैंसर पहले ‘राजाओं की बीमारियां’ कहलाते थे, क्योंकि केवल अमीर ही जरूरत से ज्यादा खा पाते थे। आज लगभग 76% आबादी मोटापे या अधिक वजन की शिकार है। हम बीमार इसलिए नहीं हैं कि शरीर कमजोर है, बल्कि इसलिए हैं क्योंकि हम जरूरत से ज्यादा खा रहे हैं। - ‘विसेरल फैट’ (पेट की अंदरूनी चर्बी) – एक छुपा हुआ ट्यूमर
शरीर में दो तरह की चर्बी होती है: एक जो त्वचा के नीचे दिखती है (Subcutaneous fat) और दूसरी जो पेट के अंदरूनी अंगों (लिवर, आंतों) के चारों ओर जमा होती है (Visceral fat)। यह अंदरूनी चर्बी एक ट्यूमर की तरह काम करती है, जो शरीर में लगातार सूजन (Inflammation) और केमिकल छोड़ती है। यही सूजन बीपी, हार्ट अटैक और कैंसर की जड़ है। - फास्टिंग के दौरान शरीर के अंदर क्या जादुई बदलाव होते हैं?
फ्यूल का बदलना (Glucose to Ketones): आम तौर पर दिमाग और शरीर ग्लूकोज (शुगर) से चलते हैं। जब आप उपवास करते हैं, तो 24 घंटे में शरीर का जमा ग्लूकोज खत्म हो जाता है। इसके बाद शरीर फैट को जलाकर ‘कीटोन्स’ बनाता है, जो दिमाग का सुपर-ईंधन बन जाता है।
दिमाग की सुरक्षा (BDNF): फास्टिंग से दिमाग में बीडीएनएफ (BDNF) बढ़ता है, जो अल्जाइमर और भूलने की बीमारी से बचाता है।
ऑटोफैगी (Autophagy – शरीर की आंतरिक सफाई): जब खाना बंद होता है, तो शरीर बेकार, सड़ी-गली और कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाओं को खुद खाकर खत्म करने लगता है।
विसेरल फैट का तेजी से खात्मा: मेडिकल अध्ययनों में पाया गया कि उपवास के दौरान शरीर सबसे पहले खतरनाक अंदरूनी चर्बी को तेजी से पिघलाता है, जबकि मांसपेशियां सुरक्षित रहती हैं। - हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज में क्रांतिकारी नतीजे
डॉ. गोल्डहैमर के क्लीनिकल रिसर्च में 174 ऐसे मरीजों पर अध्ययन किया गया जिन्हें गंभीर हाई बीपी था। डॉक्टरी देखरेख में केवल पानी पर उपवास (Water-only Fasting) कराने के बाद 174 में से 174 मरीजों का ब्लड प्रेशर बिना किसी दवाई के पूरी तरह सामान्य हो गया। यही नहीं, फास्टिंग इंसुलिन रेजिस्टेंस को खत्म करती है, जिसे दुनिया की कोई दवा पूरी तरह ठीक नहीं कर सकती। - पेट के बैक्टीरिया (Gut Microbiome) और हॉर्मोन्स का ‘रीबूट’
कंप्यूटर जैसा रीस्टार्ट: जैसे हैंग हुआ कंप्यूटर रीस्टार्ट करने पर ठीक हो जाता है, वैसे ही पानी का उपवास हमारे पेट के बैक्टीरिया को रीसेट कर देता है। केवल 7 दिनों के पानी के उपवास से हानिकारक बैक्टीरिया 80% तक घट जाते हैं।
चूँकि शरीर का 90% से अधिक सेरोटोनिन और डोपामाइन (खुशी देने वाले रसायन) पेट में बनते हैं, उपवास से डिप्रेशन और चिंता भी दूर होती है।
महिलाओं में पीसीओएस (PCOS), अनियमित पीरियड्स और फाइब्रॉएड जैसी समस्याओं में एस्ट्रोजन हॉर्मोन का संतुलन वापस लौट आता है। - कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों पर प्रभाव
पॉडकास्ट में ऐसे केस स्टडी साझा किए गए जहां लिम्फोमा (कैंसर) के मरीज, जिन पर कीमोथेरेपी बेअसर हो चुकी थी, डॉक्टरी देखरेख में लंबे उपवास और शुद्ध खानपान के जरिए पूरी तरह ठीक (Remission) हुए। ऑटोइम्यून बीमारियां (जैसे गठिया/Arthritis) जो आंतों के लीकेज और सूजन से होती हैं, उपवास के दौरान आंतों के ठीक होने से शांत हो जाती हैं। - भोजन का ‘डोपामाइन ट्रैप’ (S-O-S से सावधान!)
खाने की कंपनियां हमारे दिमाग को धोखा देने के लिए 3 चीजों का इस्तेमाल करती हैं: S-O-S यानी Salt (नमक), Oil (तेल), और Sugar (चीनी)। ये असली भोजन नहीं हैं, बल्कि भोजन से निकाले गए गाढ़े रसायन हैं जो दिमाग में डोपामाइन (आनंद का अहसास) को कृत्रिम रूप से बढ़ाते हैं। इससे पेट भर जाने के बाद भी हम जरूरत से ज्यादा खाते चले जाते हैं। उपवास आपकी जीभ के स्वाद (Taste Palate) को रीसेट कर देता है, जिससे सादा और प्राकृतिक खाना फिर से स्वादिष्ट लगने लगता है। - हर आम इंसान के लिए उपवास का सही तरीका:
- रोजाना 12 घंटे का उपवास: रात के खाने और अगली सुबह के नाश्ते के बीच कम से कम 12 घंटे का अंतर रखें। सोने से 3–4 घंटे पहले खाना बंद कर दें।
- वजन घटाने के लिए (16:8): 16 घंटे भूखे रहें और 8 घंटे की खिड़की में ही पौष्टिक भोजन करें।
- सालाना सफाई: स्वस्थ लोग भी साल में एक बार कुछ दिनों का उपवास रखकर पूरे शरीर को रीसेट कर सकते हैं।
- आराम सबसे जरूरी: उपवास के दौरान शरीर को पूर्ण आराम मिलना चाहिए ताकि वह मांसपेशियों को तोड़ने के बजाय सिर्फ खराब चर्बी जलाए।
- रीफीडिंग (उपवास तोड़ना): लंबे उपवास को अचानक भारी खाने से न तोड़ें, बल्कि ताजे फल-सब्जियों के रस और हल्के भोजन से धीरे-धीरे सामान्य खानपान पर आएं।
(नोट: 3 दिन से अधिक का कड़ा पानी का उपवास हमेशा किसी योग्य डॉक्टर की देखरेख में ही होना चाहिए।)
सार: स्वास्थ्य किसी गोली, कैप्सूल या पाउडर की डिब्बी में नहीं बिकता। अगर आप अपनी जीवनशैली ठीक कर लें और समय-समय पर अपने शरीर को खाने से आराम दें, तो आपका शरीर खुद को किसी भी बीमारी से ठीक करने की अद्भुत ताकत रखता है!

