दिनांक: 6 नवंबर 2026 | स्थान: बेंगलुरु / नई दिल्ली
स्रोत: कर्नाटक खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस + NABL लैब रिपोर्ट

https://x.com/umashankarsingh/status/2118679239105163468?a=W6w-A066kbO24EcnGjk&s=46
इंडियन ऑयल के सैंपल में 31.2% और HPCL में 30.5% एथनॉल मिला। E20 के नाम पर E31 बेचा जा रहा है। करोड़ों वाहन चालकों के साथ छलावा।
कर्नाटक के खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अरशद ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में NABL-मान्यता प्राप्त और ISO-प्रमाणित लैब (श्रीराम रिसर्च इंस्टीट्यूट, बेंगलुरु) की रिपोर्ट जारी कर केंद्रीय सरकार की E20 पेट्रोल नीति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
राज्य के सात जिलों — बेंगलुरु, कोलार, चिक्कबल्लापुर, बेंगलुरु रूरल, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु — से इकट्ठा किए गए 63 पेट्रोल सैंपल्स में से कई में एथनॉल की मात्रा 20% की निर्धारित सीमा से कहीं ज्यादा निकली।
लैब रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े
- IOCL (इंडियन ऑयल): 31.2% एथनॉल
- HPCL Power: 30.5% एथनॉल
- HPCL (नॉर्मल): 27%
- BPCL Speed: 26.5%
- Nayara Energy: 26.1%
- Shell: 25.5%
कई और सैंपल्स 22-24% के आसपास रहे। यानी E20 के नाम पर बेचे जा रहे पेट्रोल में असल में E27 से E31 तक का मिश्रण निकल रहा है।
“E20 तो अपने आप में मिलावट है। मिलावट में भी मिलावट हो रही है?” — रविश कुमार
सरकार की चुप्पी और पारदर्शिता का अभाव
मंत्री रिजवान अरशद ने बताया कि पहले सैंपल्स तेल कंपनियों (IOCL और BPCL) की अपनी लैब्स को भेजे गए थे, लेकिन उन रिपोर्ट्स में एथनॉल की मात्रा बताई ही नहीं गई, जबकि यह टेस्टिंग का अनिवार्य पैरामीटर है। इसके बाद प्राइवेट NABL लैब में टेस्ट कराया गया तो यह आंकड़े सामने आए।
केंद्र सरकार बार-बार दावा करती रही है कि E20 सुरक्षित है और 20% से ज्यादा बढ़ाने का कोई प्लान नहीं है। लेकिन जमीन पर हकीकत यह है कि पंप पर जो E20 लिखा जा रहा है, वो असल में कितना है, इसकी कोई जवाबदेही नहीं है।
आम आदमी पर सीधा असर
- माइलेज गिरने से हर लिटर पर ज्यादा खर्च
- पुरानी गाड़ियों (जो E20 के लिए डिजाइन नहीं) में रबर पार्ट्स, होज, सील और फ्यूल पंप खराब होने का खतरा
- देश के लगभग 35 करोड़ वाहनों में से 99% E20 से ज्यादा के लिए बने ही नहीं हैं
- पंपों पर एथनॉल प्रतिशत का कोई डिस्प्ले नहीं
- वार्षिक हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ आम उपभोक्ताओं पर
कर्नाटक सरकार ने केंद्र से तेल कंपनियों पर कार्रवाई, प्रभावित उपभोक्ताओं के लिए मुआवजा फंड (E20 Spoilage Fund), पंपों पर अनिवार्य एथनॉल प्रतिशत डिस्प्ले और E10 का विकल्प मांगा है।
सवाल यह है: जब तेल कंपनियों की अपनी लैब्स एथनॉल प्रतिशत छिपा रही हैं, तो आम आदमी कैसे भरोसा करे कि उसे सही पेट्रोल मिल रहा है?
यह रिपोर्ट अभी कर्नाटक की है और तेल कंपनियों का आधिकारिक जवाब आना बाकी है। लेकिन अगर देशभर में यही स्थिति है तो E20 का “सफल” रोलआउट उपभोक्ताओं के लिए महंगा और नुकसानदेह साबित हो रहा है।
पेट्रोल में एथनॉल की मिलावट पर खुलासा करते हुए आज कर्नाटक के खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्री रिजवान अरशद ने लैब रिपोर्ट जारी की हैं। रिपोर्ट बता रही हैं कि इंडियन ऑयल, HP जैसी कई कंपनियों के पेट्रोल में एथनॉल की मिलावट 27-31% है, जबकि इसको E20 के नाम पर बेचा जा रहा है।ये देश के करोड़ों वाहन चालकों के साथ छलावा है,एक तो तेल महँगा,ऊपर से मिलावटी और फिर ईंजन का बेड़ागर्क।
-आदेश रावल
इस पर रिज़वान अरशद और तेलंगाना के भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष के बीच बहस होनी चाहिए। मतलब क्या है भाई? E20 तो अपने आप में मिलावट है। मिलावट में भी मिलावट हो रही है?
-रवीश कुमार

