अतिरिक्त काम के भुगतान की मांग करने पर नौकरी से हटाने का आरोप, कर्मचारियों ने वेतन और बकाया भुगतान को लेकर उठाए सवाल
देहरादून। अमर उजाला की देहरादून यूनिट में रात्रि डिस्पैच का काम करने वाले सात कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व नोटिस के काम से हटाए जाने का मामला सामने आया है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें न तो हटाने का कोई कारण बताया गया और न ही बकाया भुगतान किया गया। इनमें एक कर्मचारी ऐसा भी है, जो पिछले 14 वर्षों से नाइट सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत था।
ये सभी कर्मचारी इंप्रेशन प्रिंटिंग पैकेजिंग लिमिटेड के अंतर्गत कार्य कर रहे थे। आरोप है कि यूनिट के जीएम हंसराज शर्मा ने सातों कर्मचारियों को काम पर आने से मना कर दिया। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें सीधे तौर पर कह दिया गया कि अगले दिन से काम पर आने की जरूरत नहीं है।
अतिरिक्त काम के भुगतान की मांग पर हटाने का आरोप
कर्मचारियों से रोजाना 10 से 11 घंटे तक काम कराया जा रहा था। जब उन्होंने निर्धारित समय से अधिक काम करने के बदले अतिरिक्त भुगतान की मांग की, तो उन्हें नौकरी से हटाने की बात कह दी गई।
कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें न तो कोई जॉइनिंग लेटर दिया गया था और न ही नौकरी से हटाने से पहले कोई नोटिस जारी किया गया। उनका कहना है कि काम बंद कराने से पहले उनसे कोई बातचीत भी नहीं की गई।
9 से 9.5 हजार रुपये मासिक वेतन
शिकायतकर्ता ने बताया कि रात्रि डिस्पैच में काम करने वाले कर्मचारियों को प्रतिमाह लगभग 9,000 से 9,500 रुपये वेतन दिया जा रहा था। उनका आरोप है कि यह वेतन निर्धारित सरकारी न्यूनतम मजदूरी की दर से कम है।
कर्मचारियों ने सवाल उठाया है कि जब वे लंबे समय से संस्थान के लिए काम कर रहे थे, तो उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक काम से कैसे हटाया जा सकता है। उनका कहना है कि नौकरी से हटाए जाने के बाद उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी
यह मामला कर्मचारियों की शिकायत के आधार पर सामने आया है। जीएम हंसराज शर्मा और संबंधित कंपनी का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
मामले में यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कर्मचारियों को किस श्रेणी में नियुक्त किया गया था, उनके वेतन का भुगतान किस कंपनी के माध्यम से होता था और निर्धारित न्यूनतम मजदूरी के नियम उन पर किस प्रकार लागू होते हैं।

