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छत्तीसगढ़

पहचान छुपाकर विदेश में छिपा था महादेव ऐप का प्रमोटर सौरभ चंद्राकर, ओमान से भारत लाया गया, देखें फर्जी पासपोर्ट!

Three men standing in a hallway, the front man wearing a dark vest with a badge on the left chest, looking at the camera.

महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। उसके पास से इंडोनेशिया में जारी एक फर्जी पासपोर्ट भी बरामद हुआ है। बताया जा रहा है कि इसी पासपोर्ट के सहारे वह विदेश में अपनी असली पहचान छिपाकर रह रहा था। हैरानी की बात यह है कि पासपोर्ट अजंता मेंडिस के नाम पर जारी किया गया था। हालांकि, यही फर्जी दस्तावेज उसकी गिरफ्तारी की वजह बन गया। इसी पासपोर्ट के कारण जुलाई में ओमान में उसे हिरासत में लिया गया था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर फर्जी पहचान के जरिए लंबे समय से विदेश में छिपा हुआ था। इंटरपोल की ओर से जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। इसके बाद सीबीआई की एक विशेष टीम ओमान पहुंची और उसे भारत लेकर आई। सौरभ चंद्राकर को एक दिन पहले भारत लाया गया था। सोमवार को उसे दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय से रायपुर की अदालत में पेश करने के लिए ले जाया गया।

Indonesian passport biodata page with a male photo, name, birth date, nationality, passport number E3387986, issued 21 Jun 2024, expires 21 Jun 2034, issued in Jakarta Utara.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सौरभ की भारत वापसी को जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि उसकी गिरफ्तारी से कथित अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क और उसके संचालन से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। खास तौर पर यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि इस सिंडिकेट को चलाने के लिए किस-किस को ‘प्रोटेक्शन मनी’ यानी सुरक्षा के बदले रकम दी जाती थी।

सीबीआई के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर दो मामलों में वांटेड है और दोनों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक मामले में भी उसके खिलाफ जांच चल रही है। इस मामले में भी केस दर्ज किया गया है।

कैसे चलता था महादेव सट्टेबाजी का नेटवर्क

छत्तीसगढ़ सरकार की मांग पर सीबीआई ने महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े मामलों की जांच शुरू की थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक देश के बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट में शामिल था। इसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था। देश के अलग-अलग हिस्सों में फैले पैनल और फ्रेंचाइजी के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और दूसरे खेलों पर सट्टा लगवाया जाता था। इस नेटवर्क के माध्यम से यूजर्स को जोड़ा जाता और उनसे दांव की रकम वसूली जाती थी।

जांच में सामने आया कि सट्टेबाजी से होने वाली कमाई को छिपाने के लिए दूसरे लोगों के नाम पर खोले गए बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। इन खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। रकम को कई खातों और लेन-देन के जरिए घुमाकर उसकी असली पहचान छिपाई जाती थी। इसके बाद हवाला नेटवर्क के माध्यम से पैसा विदेश भेजे जाने का आरोप है।

सीबीआई की जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि सिंडिकेट को बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर ‘प्रोटेक्शन मनी’ दी जाती थी। जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि इस रकम का लाभ किन लोगों तक पहुंचा और नेटवर्क को किस स्तर पर संरक्षण मिल रहा था।

सीबीआई ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, भारतीय दंड संहिता की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं तथा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किए हैं। इन आरोपपत्रों में सौरभ चंद्राकर को प्रमुख आरोपियों में शामिल किया गया है।

वहीं, प्रवर्तन निदेशालय भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच कर रहा है। एजेंसी भारत और विदेश में स्थित कई संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई कर चुकी है। अब सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि सट्टेबाजी नेटवर्क, पैसों के लेन-देन और कथित राजनीतिक एवं प्रशासनिक संरक्षण से जुड़े सवालों के जवाब मिल सकेंगे।


रितेश मिश्रा-

(सौरभ चंद्राकर और महादेव बैटिंग ऐप)

खबर है कि सौरभ चंद्राकर को रायपुर लाया जा रहा है। CBI ला रही है। मुझे याद है कि जब सबसे पहले इस महादेव बेटिंग स्कैम पर लिखा था, उसी दिन या उससे एक दिन पहले रायपुर के सारे प्रमुख हिन्दीं प्रिंट मीडिया में महादेव बेटिंग ऐप का विज्ञापन छपा था।

खैर, अगस्त 2022 से छोटी-छोटी खबरें सट्टा पकड़े जाने की बहुत सारे जिलों से आ रही थीं। सितंबर तक खबरें ज्यादा आने लगीं। सामान्य बात थी। आरोपी थाने से छूट जाते थे, मुचलके पर।

अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में मैंने महादेव बेटिंग ऐप पर लोगों और पुलिस अधिकारियों से बात करनी शुरू की। सबसे ज्यादा गहरे तक हमारे पुराने मित्र और पत्रकार विनोद तिवारी (दुर्ग) घुसे हुए थे। सबसे पहले उन्होंने मुझे कहा, “ये कोई सट्टा का मामला नहीं है, इसमें बहुत बड़ा स्कैम है।”

फिर मैंने एक हफ्ते लगातार अलग-अलग जिलों के पुलिस अधिकारियों से बात की। स्कैम नहीं लगा। लेकिन फिर एक दिन एक पुलिस अधिकारी (जिनका नाम नहीं लिख सकता) ने मुझे करीब एक घंटा समझाया। मैंने उनसे अगले दो दिन लगातार सवाल किए और फिर अक्टूबर 2022 में पहली स्टोरी लिखी कि ये स्कैम है क्या। करीब पंद्रह सौ वर्ड्स की स्टोरी थी वो।

उन्होंने कहा था कि करीब चार से छह हजार करोड़ का स्कैम है। मैंने सावधानी बरतते हुए अपनी कॉपी में 2,000 करोड़ का स्कैम लिखा और पूरा modus operandi लिखा।

खबर अब भी 22 अक्टूबर 2022 की डेट में इंटरनेट पर है। इससे पहले महादेव के बड़े-बड़े विज्ञापन हर अखबार में छपते थे। लेकिन उसके बाद से नहीं छपे।

उसके दो दिन बाद मैं इलाहाबाद चला गया। मुझे याद है, मुझे बहुत फोन आए। दिल्ली, मुंबई और अन्य जगहों से। कोई कहता, “मुझे फिल्म बनानी है, मुझे डॉक्यूमेंट दे दीजिए।” कोई डॉक्यूमेंट्री के लिए पूछता। मैं इलाहाबाद में था, तो मैंने बहुत लोड नहीं लिया। पता नहीं किसके फोन रहे होंगे।

करीब दस दिन बाद जब मैं रायपुर आया, तो मुझे किसी बहुत बड़े अधिकारी ने बताया (वो मेरे फेसबुक पर हैं भी) कि ED डॉक्यूमेंट्स और पहली FIR पर काम कर रही है। कुछ दिन बाद एक दूसरे भाई ने मुझे सबूत दिए कि ED ने एक केस रजिस्टर किया है। मैं बस्तर में था और वहीं से मैंने एक स्टोरी की।

तब भी मैंने कहा था कि इस ऐप स्कैम में बड़े लोग निपटेंगे। अथाह पैसा था सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के पास।

Man in a bright yellow shirt being lifted and celebrated by a crowd waist-deep in a pool.

खैर, बाद में दो दिन भिलाई में रहकर मैंने सौरभ चंद्राकर पर एक प्रोफाइल लिखी। बहुत सारी चीजें लिख पाया, बहुत-सी चीजें आज भी मेरे जेहन में हैं। उसके बाद काफी स्टोरी की मैंने और अभी तक कर रहा हूँ।

खैर, सौरभ चंद्राकर आज रायपुर की एक अदालत में पेश होगा। अभी बहुत कुछ होना है। बहुत कुछ बताना है सौरभ को।

पत्रकार रितेश मिश्रा हिंदुस्तान टाइम्स के राज्य संवाददाता (छत्तीसगढ़) हैं।

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