नई दिल्ली, 2 नवंबर 2026: इंडिया गठबंधन की 1 नवंबर को रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली के बाद मीडिया प्रवेश को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ा है। कुछ लोगों ने कांग्रेस पर पत्रकारों के साथ बदसलूकी का आरोप लगाया, जबकि वरिष्ठ पत्रकारों ने इसे बिना पास के अनधिकृत प्रवेश और नैरेटिव बनाने की कोशिश बताया है।
रैली मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और चुनावी रोल (SIR) में कथित अनियमितताओं के विरोध में आयोजित की गई थी। इसमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम को शाम 5 बजे तक सीमित रखा था।
इस बीच पत्रकार साक्षी जोशी (@sakshijoshii) ने अपने पोस्ट में लिखा कि कांग्रेस ने करीब 1200 मीडिया पास प्रिंट कराए थे। उन्होंने कहा कि बड़ी रैलियों में गेट पर पास अनिवार्य होता है और जिन्होंने पहले से पास नहीं लिया, वे मूल रिपोर्टिंग प्रक्रिया से अनभिज्ञ हैं। जोशी ने बताया कि उन्होंने एक दिन पहले AICC जाकर पास लिया था।
मुद्दा के एडिटर और द न्यूज लॉन्चर से जुड़े पत्रकार स्वप्निल श्रीवास्तव (@journoswapnil) ने साक्षी जोशी से सहमति जताते हुए कहा कि उन्होंने भी चार दिन पहले कांग्रेस से संपर्क कर अपनी टीम के लिए चार पास मांगे थे। पास प्रिंट होने के बाद उन्हें कॉल आया और उन्होंने पास कलेक्ट कर लिए। श्रीवास्तव ने इसे “बेसिक प्रोटोकॉल” बताया ताकि अव्यवस्था न फैले।
श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों (जिन्हें उन्होंने राइट विंगर्स कहा) ने गेट नंबर 3 की बजाय अलग-अलग गेट से प्रवेश किया, अनजान प्रेस कार्ड दिखाकर मीडिया गलियारे तक पहुंच गए और कांग्रेस सेवादल के कार्यकर्ताओं से झड़प करते हुए वीडियो बनाए। उनका दावा है कि ये लोग इस नैरेटिव को सेट कर रहे थे कि कांग्रेस रैली में पत्रकारों के साथ बदसलूकी कर रही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ कैमरे बंद करवाए और सुरक्षा बल के जवान की मदद से उन लोगों को मीडिया गलियारे से हटवाया।
इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। एक तरफ उन लोगों की शिकायतें हैं जिन्हें प्रवेश नहीं मिला, दूसरी तरफ उन पत्रकारों का पक्ष है जिन्होंने पहले से पास लेकर रिपोर्टिंग की। रैली के भीड़ के आंकड़ों को लेकर भी कांग्रेस और भाजपा के बीच दावे-प्रतिदावे चल रहे हैं, लेकिन मीडिया पास वाला विवाद मुख्य रूप से पत्रकारों के बीच ही चर्चा का विषय बना हुआ है।
साक्षी जोशी का ट्वीट-
Congress reportedly printed 1200 Media passes. Journalists who have basic sense of reporting such big rallies know that they would need such passes at the gate to enter.
If someone pretending to be a journalist doesn’t even have this common sense of being atleast one of those 1200 people then I really doubt that person even qualifies as a journalist.
I can understand the frustration of such people of not being let in while someone else with 21 years of experience as a journalist had a pass. Yes I had a pass because I went all the way to AICC one day before the event , sat there and waited for my pass to be handed over to me.
So go learn basics of reporting and then blab here. Although I don’t need to give any explanations for other people’s childish behaviour but sometimes it’s good to expose them. Yes I could have also been let in if I didn’t have a pass. I have earned that experience. So go learn professionalism first before envying me.
(First picture is of 31st Oct – AICC
second of the pass that this frustrated soul couldn’t even bother to go get for himself)


स्वप्निल श्रीवास्तव-
सहमत हूं @sakshijoshii जी, मैंने खुद 4 दिन पहले ही कांग्रेस से सम्पर्क किया था और अपनी टीम के लिए 4 पास मांगे थे। कांग्रेस के पास प्रिंट कराने के बाद मेरे पास खुद कॉल आई और हमने वो पास कलेक्ट कर लिए। ये एक बेसिक प्रोटोकॉल है.. ताकि अव्यवस्था ना फैले।
लेकिन कल कुछ राइट विंगर्स गेट नम्बर 3 की बजाय अलग-अलग गेट से एंट्री करने के बाद मीडिया गलियारे तक पहुंचे.. उनके पास अननोन से प्रेस कार्ड्स थे और वो कांग्रेस सेवादल के लोगों से झड़प करते हुए इस नैरेटिव का वीडियो बना रहे थे कि कांग्रेस पत्रकारों के साथ रैली में बदसलूकी कर रही है।
कुछ के कैमरे तो मैंने खुद भी बंद करवाए और फिर उन्हें सुरक्षा बल के एक जवान की मदद से जो मीडिया गलियारे में तैनात था वहां से हटवाया।



