नोएडा। न्यूज़ चैनल लाइव टाइम्स (Live Times) से इस्तीफा देकर निकलीं एंकर वैष्णो सोनी ने संस्थान के कामकाज और HR विभाग के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि संस्थान ने अब तक उनकी अक्टूबर की सैलरी और फुल एंड फाइनल (F&F) सेटलमेंट का भुगतान नहीं किया है। बार-बार कॉल और मैसेज करने के बावजूद उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।
वैष्णो सोनी फरवरी 2026 में लाइव टाइम्स के आउटपुट विभाग में एंकर के तौर पर शामिल हुई थीं। उनके मुताबिक, अक्टूबर के मध्य में उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया और नोटिस पीरियड भी माफ कर दिया गया। लेकिन नौकरी छोड़ने के बाद अपनी ही मेहनत का पैसा पाने के लिए उन्हें लगातार HR और प्रबंधन के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
F&F में 31 दिन का गणित, PF की गलत एंट्री
HR की ओर से भेजे गए F&F सेटलमेंट स्टेटमेंट में अक्टूबर के 12 दिनों का वेतन दर्शाया गया। साथ ही PF कटौती की एक एंट्री भी दिखाई गई, जिस पर वैष्णो ने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि पूरे कार्यकाल के दौरान उनकी सैलरी से PF की ऐसी कोई नियमित कटौती नहीं हुई थी।
वैष्णो के मुताबिक, जब उन्होंने वेतन की गणना पर सवाल उठाए तो HR ने 31 दिनों वाले महीने के आधार पर सैलरी कैलकुलेट करने की बात कही। जबकि उनका दावा है कि नौकरी के दौरान हर महीने उनकी सैलरी 30 दिनों के आधार पर ही कैलकुलेट होती रही। ऐसे में केवल F&F के समय गणना का आधार बदलना कई सवाल खड़े करता है।
बाद में HR ने ईमेल के जरिए स्वीकार किया कि PF की कटौती स्टेटमेंट में गलती से दर्ज हो गई थी। वैष्णो का सवाल है कि अगर कर्मचारी के पैसे से जुड़ी इतनी बड़ी गलती हो सकती है, तो इसकी जवाबदेही आखिर कौन लेगा?
नौकरी देते वक्त लंबी फेहरिस्त, छोड़ने पर जवाबदेही क्यों नहीं?
वैष्णो ने संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि नौकरी पर रखते समय कर्मचारियों से तमाम दस्तावेज मांगे जाते हैं और इंटरव्यू के नाम पर कई घंटों तक राउंड चलते हैं। उनके मुताबिक, उनकी अपनी इंटरव्यू प्रक्रिया लगभग 4-5 घंटे चली थी, मानो किसी बेहद प्रतिष्ठित सरकारी सेवा के लिए चयन होना हो।
उनका सवाल है कि जब किसी कर्मचारी को जोड़ने के लिए इतनी लंबी प्रक्रिया और दस्तावेजों की जरूरत होती है, तो नौकरी छोड़ने के बाद उसका वेतन, एक्सपीरियंस लेटर और रिलीविंग लेटर समय पर देना संस्थान की जिम्मेदारी क्यों नहीं बनता?
वैष्णो का आरोप है कि एक्सपीरियंस और रिलीविंग लेटर हासिल करने के लिए भी उन्हें कई दिनों तक लगातार कॉल और मैसेज करने पड़े। अब अक्टूबर की सैलरी और F&F के लिए भी उन्हें इसी तरह की परेशानी झेलनी पड़ रही है।
HR का रवैया या कर्मचारियों पर एहसान?
वैष्णो ने HR विभाग के व्यवहार पर भी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि HR मुकेश राणा ने उनका फोन नंबर ब्लॉक कर दिया है, जिसके चलते वे अपनी ही सैलरी और सेटलमेंट के सिलसिले में उनसे संपर्क नहीं कर पा रही हैं।
उन्होंने कहा कि HR से लेकर उच्च अधिकारियों तक का रवैया कई बार ऐसा लगता है, मानो कर्मचारी को नौकरी देकर उस पर कोई एहसान किया गया हो। जबकि नौकरी कर्मचारी की मेहनत और संस्थान के साथ एक पेशेवर अनुबंध का हिस्सा है, किसी पर किया गया एहसान नहीं।
वैष्णो का यह भी आरोप है कि एक ओर कर्मचारियों से समय की पाबंदी और प्रोफेशनलिज्म की उम्मीद की जाती है, वहीं दूसरी ओर उनके भुगतान और बुनियादी अधिकारों के मामले में वही गंभीरता नहीं दिखाई जाती।
उन्होंने बारिश के दौरान दफ्तर पहुंचने के लिए दबाव बनाए जाने का भी जिक्र किया। उनका सवाल है कि अगर खराब मौसम में भी कर्मचारी से हर हाल में दफ्तर पहुंचने की अपेक्षा की जाती है और इसे प्रोफेशनलिज्म बताया जाता है, तो क्या समय पर वेतन देना उसी प्रोफेशनलिज्म का हिस्सा नहीं है?
नाइट शिफ्ट और कर्मचारियों से व्यवहार पर भी सवाल
वैष्णो ने संस्थान में शिफ्ट व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जाहिर की है। उनका आरोप है कि कर्मचारियों पर उनकी सहमति और परिस्थितियों की परवाह किए बिना नाइट शिफ्ट करने का दबाव बनाया जाता है। उनके मुताबिक, किसी मीडिया संस्थान में काम करने का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि कर्मचारी के निजी जीवन, सुविधाओं और सम्मान को नजरअंदाज कर दिया जाए।
उन्होंने अन्य मीडिया प्रोफेशनल्स और नौकरी तलाश रहे युवाओं से अपील की है कि किसी भी संस्थान से जुड़ने से पहले वहां के कार्य वातावरण, HR की जवाबदेही और कर्मचारियों के प्रति व्यवहार की जानकारी जरूर लें।
वैष्णो का कहना है कि युवाओं को ऐसा कार्यस्थल चुनना चाहिए जहां काम के साथ-साथ कर्मचारी के सम्मान और अधिकारों को भी महत्व दिया जाए। उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर के अवसरों पर भी विचार करने की सलाह दी है, जहां नौकरी की शर्तों, शिफ्ट और कर्मचारी अधिकारों को लेकर स्पष्टता हो।
श्रम विभाग जाने की तैयारी, प्रबंधन के जवाब का इंतजार
वैष्णो ने HR को भेजे ईमेल में कोड ऑन वेजेज, 2019 की धारा 17(2) का हवाला देते हुए बकाया भुगतान की मांग की है। उनका कहना है कि संस्थान के अन्य कर्मचारियों को अक्टूबर का वेतन मिल चुका है, जबकि उनका भुगतान अब तक लंबित है। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने जल्द से जल्द सेटलमेंट पूरा कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।
वैष्णो ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द भुगतान नहीं हुआ तो वह श्रम विभाग में शिकायत दर्ज कराएंगी और उपलब्ध दस्तावेजों, ईमेल, मैसेज और कॉल रिकॉर्डिंग के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई करेंगी।
यह मामला केवल एक कर्मचारी के बकाया वेतन का नहीं, बल्कि मीडिया संस्थानों में HR की जवाबदेही, कर्मचारियों के सम्मान और नौकरी छोड़ने के बाद उनके अधिकारों से जुड़ा सवाल भी खड़ा करता है।

