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दैनिक भास्कर के हिडन कैमरा स्टिंग में 45 वर्षीय महिला का दावा – “पैसे दो तो किसी पर भी केस करा दूंगी”

Video news thumbnail showing a woman speaking, with bold red and white headlines about a sting exposing a Kushinagar racket and alleged fake rape accusations.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले से झूठे मुकदमों के नाम पर वसूली के एक सनसनीखेज कथित नेटवर्क का मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर ने इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट पब्लिश की है। उसके स्टिंग में रामकोला क्षेत्र की 45 वर्षीय महिला जरीना खातून ने बड़े दावे किए हैं।

वीडियो में हिडन कैमरे पर महिला खुद को पुलिस की मुखबिर बताती हुई सुनाई देती है। आरोप है कि वह फर्जी रेप, छेड़छाड़ और POCSO के केस दर्ज कराने की धमकी देकर पैसे और जमीन की वसूली करती है।

स्टिंग के दौरान जरीना ने दावा किया कि वह पैसे लेकर किसी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराने में मदद कर सकती हैं और थाने में उसकी अच्छी पहुंच है। उसने यह भी दावा किया कि जरूरत पड़ने पर नाबालिग लड़कियों के माध्यम से POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया जा सकता है।

पीड़ितों में 80 वर्षीय रामजीत खरवार का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि उन्हें जेल भेजने और संपत्ति जब्त कराने की धमकी देकर समझौते के लिए दबाव बनाया गया। रिपोर्ट में कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि जमीन विवाद और आपसी रंजिश में उन पर छेड़छाड़ के केस दर्ज कराए गए और बाद में रकम या जमीन देने पर विवाद खत्म हुआ। 

रिपोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणियों का भी जिक्र है। फरवरी 2024 में कोर्ट ने कहा था कि अगर शिकायत झूठी साबित होती है तो शिकायतकर्ता पर कार्रवाई होनी चाहिए।


दीपिका नारायण भारद्वाज-

दैनिक भास्कर द्वारा किए गए एक खोजी स्टिंग ऑपरेशन में उत्तर प्रदेश में कथित तौर पर चल रहे एक संगठित वसूली गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। आरोप है कि यह गिरोह दुष्कर्म, छेड़छाड़ और पॉक्सो जैसे सख्त कानूनों का दुरुपयोग कर निर्दोष पुरुषों को झूठे मुकदमों में फंसाने और उनसे पैसे तथा संपत्ति वसूलने का काम करता था।

News broadcast thumbnail with bold red banner headlines about a sting exposé in Kushinagar; partial face visible on the right.

जांच में सामने आया कि कुछ महिलाएं स्थानीय पुलिसकर्मियों के साथ मिलीभगत करके काम कर रही थीं। आरोप है कि पुलिस की मदद से गैर-जमानती धाराओं में तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाती थी, जिसके बाद पीड़ितों पर समझौते के लिए दबाव बनाया जाता था।

इस पड़ताल में कुशीनगर के रामकोला की 45 वर्षीय जरीना खातून की भूमिका प्रमुखता से सामने आई। बताया गया है कि वह खुद को थाने का चौकीदार बताती थी, जबकि वास्तव में पुलिस के लिए मुखबिर के तौर पर काम करती थी।

दैनिक भास्कर के अंडरकवर कैमरे में जरीना स्थानीय पुलिस पर अपने प्रभाव का प्रदर्शन करती दिखाई दी। उसने एक सब-इंस्पेक्टर को फोन करके कथित झूठा मुकदमा दर्ज कराने का समय तय करने की बात भी प्रदर्शित की।

स्टिंग में जरीना ने कथित तौर पर बताया कि वह नाबालिग लड़कियों या विवाहित महिलाओं को तैयार करके उनके जरिए गैर-जमानती धाराओं में मुकदमे दर्ज करवाती है। इसके बाद मजिस्ट्रेट के सामने उनके बयान दर्ज कराए जाते हैं और फिर आरोपित पुरुषों से मुकदमे से बाहर समझौता कराने के नाम पर एक से तीन लाख रुपये तक की मांग की जाती है।

जरीना के कथित वसूली नेटवर्क के शिकार बताए गए कुछ लोगों की कहानी भी जांच में सामने आई है।

  • 80 वर्षीय रामजीत खरवार: पड़ोसी मुर्तजा के साथ जमीन के विवाद के बाद उनके खिलाफ कथित झूठा छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज कराया गया। इस मामले में उन्हें एक महीने तक जेल में रहना पड़ा।
  • अंगद, किराना दुकानदार: बताया गया कि उन्होंने जरीना के बेटे को अपनी दुकान में चोरी करते हुए पकड़ लिया था। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर दुष्कर्म के प्रयास के झूठे मामले में फंसा दिया गया।
  • रणजीत गोविंद राव: रास्ते को लेकर हुए विवाद के बाद उन पर दुष्कर्म के प्रयास का झूठा आरोप लगाने की बात सामने आई। आरोप है कि उन्हें अपनी जमीन का हिस्सा छोड़ने और पैसे देने के लिए मजबूर किया गया।

इस स्टिंग ऑपरेशन ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं कि क्या महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए सख्त कानूनों का इस्तेमाल कुछ लोग निजी दुश्मनी निकालने और अवैध वसूली के औजार के रूप में कर रहे हैं? साथ ही, यदि पुलिसकर्मियों की मिलीभगत के आरोप सही हैं तो यह कानून-व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल है।

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