नदीम अख्तर-
बुरा मानो या भला: निधि राज़दान IIMC की मेरी सीनियर हैं। कुछ वक्त पहले सुना था कि इनको oxford (ऑक्सफोर्ड नहीं, अमेरिका वाला हार्वर्ड) में प्रोफेसर की नौकरी दिलाने के नाम पे किसी ने ठग लिया। सुनकर दिल बैठ गया। इतनी तेज़ तर्रार पत्रकार और एंकर को कोई नौकरी दिलाने के नाम पे कैसे ठग सकता है?
जो हर बात में सवाल पूछे, उसे कैसे ठगा जा सकता है? वह भी ऑक्सफ़ोर्ड में नौकरी दिलाने के नाम पे? कारण ये है कि ndtv की नौकरी छोड़ने के बाद निधि ने ऐलान कर दिया था कि वह प्रोफेसर होकर ऑक्सफोर्ड जा रही हैं। फिर ठगी वाली बात आई और निधि ने इस बाबत दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी। उस मामले का बाद में क्या हुआ, किसी को पता नहीं। आपको पता हो तो खबर में कमेंट करके बताइएगा।
खैर। हमें तो चपरासी और स्वीपर की नौकरी दिलाने के लिए भी किसी दलाल की तरफ से ऑफर नहीं आया। अपना कद इतना बड़ा कहाँ! भाई लोगों ने चपरासी के लायक भी नहीं समझा। वरना ऑफर तो आ ही जाता।
अब सुन रहा हूं कि निधि ने जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से शादी कर ली है। लेकिन हर बार की तरह इस दफा भी ये पता नहीं चला कि मुस्लिम तरीके से निकाह हुआ या हिंदू पद्धति से सात फेरे लेकर सात जन्मों की कसमें खाईं गईं।
बहरहाल शादी हो गई है तो मेरी तरफ से भी मुबारकबाद और बधाई। इससे पहले एक और हिंदी टीवी एंकर ने एक पूर्व मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश के राजा से शादी कर ली थी। टीवी एंकर्स को प्यार बड़े लोगों से ही होता है। सीएम से नीचे बात नहीं करते।

मेरी पूर्व सहयोगी निधि और उमर अब्दुल्ला के लिए बेहद खुशी हो रही है। आप दोनों को जीवनभर खुशियों की शुभकामनाएं। यह खास अवसर NDTV के कई पूर्व साथियों को एक साथ आने और पुरानी यादों को स्नेह के साथ फिर से ताजा करने का मौका भी है।
-राजदीप सरदेसाई, वरिष्ठ पत्रकार
सुमंत कबीर-
वयस्क स्त्री-पुरुष के बीच “सहमति के संबन्ध” पर किसी आदर्शवाद में विश्वास नहीं करता। क्योंकि यह “प्रकृति का आवेग” है। जिसके प्रहार से पहाड़ तक उखड़ जाते हैं, मनुष्य क्या है? सामाजिक मर्यादा तो मात्र मानव निर्मित मामूली तटबंध हैं, जो टूटते, बनते रहते हैं।
लेकिन जब यह रिश्ता “मीडिया और सत्ता” का गठबंधन हो जाए तो लोकजीवन को चौकन्ना होना पड़ेगा। सन 2005 में निधि और नीलेश मिश्रा का विवाह हुआ। फिर सन 2007 में तलाक हो गया।
कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता दिग्विजय सिंह ने भी अधेड़ हो रही एक औसत महिला एंकर पत्रकार से विवाह किया। IIMC के एक टीचर की पत्नी से। तलाक भी बाद में लिया या नहीं? पता नहीं। महिला एंकर दिहाड़ी मजदूर से राधोगढ़ की असहाय प्रजा की राजमाता बन गई। ऐसी प्रजा, जिसे पता ही नहीं, उनकी नई राजमाता का कुल-वंश क्या है? ना जानने का हक है। क्योंकि भारत में “संसदीय लोकतंत्र” है।
मीडिया और समाज का रिश्ता भरोसे का है। जब ऐसे बंधन बनते हैं तो बतौर समाज प्रश्न उठता है, यह रिश्ता महज पवित्र प्रेम है या इसकी बुनियाद में लोक विश्वास को हलाल किया गया?
महिला हो या पुरुष? एक पत्रकार की पहचान और पूंजी लोक_पहरुआ की है। लेकिन यह लोक पहरुआ यदि लैंगिक आधार पर सत्ता की सीधी चढ़ जाए तो समाज को खटका जरूर होगा। यह जरूर है, बाजारवाद के अंधड़ में पत्रकार भी डिब्बाबन्द प्रोडक्ट बन चुका है। जिन पर एक्सपायरी की सूचना पहले से है। इसलिए ऐसे विमर्श बेमानी हैं।
उमर अब्दुल्ला और निधि को बधाई!
मृत्युंजय कुमार-
“गोदी मीडिया” शब्द गढ़ने वाले रवीश कुमार की परम मित्र और NDTV की साथी निधि राजदान ने आज मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से निकाह कर लिया। बधाई।

मैं यहाँ मॉरल पुलिसिंग नहीं कर रहा। मेरी आपत्ति निजी रिश्ते पर नहीं है। दोनों बालिग हैं, स्वतंत्र हैं। लेकिन यहाँ सवाल पत्रकारीय नैतिकता का है।
जिस दौरान निधि जी “निष्पक्ष पत्रकार” के तौर पर कश्मीर और राजनीति पर ज्ञान दे रही थीं, उसी दौरान उनका मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ प्रेम-संबंध चल रहा था। एक निष्पक्ष पत्रकार एक मुख्यमंत्री को डेट कर रही थी और दर्शकों को ये बताया जा रहा था कि ये निष्पक्ष पत्रकारिता है।
ये कोई पहला मामला नहीं है:
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से भी एक “निष्पक्ष नॉन-गोदी” पत्रकार ने शादी की। एक और “निष्पक्ष नॉन-गोदी” पत्रकार रातों-रात TMC की राज्यसभा सांसद बन गईं और उनके पति आज भी देश को निष्पक्षता का ज्ञान देते हैं।
ये तो वो रिश्ते हैं जो शादी तक पहुंचे। दिल्ली में जिसने भी 5-10 साल रिपोर्टिंग की है, वो जानता है कि कितनी “निष्पक्ष क्रांतिकारी” पत्रकारें मंत्रियों के हरम की शोभा बनती थीं।
उसके बदले में जो प्लॉट, पद्मश्री, राज्यसभा और लुटियन्स दिल्ली में बंगले मिले, उसके सामने आज की कथित “गोदी मीडिया” तो सच में अंडर पेड और टुच्ची लगती है।
गोदी मीडिया कम से कम गोद में बैठती है, बिस्तर पर नहीं लेटती।
फिर भी जोड़े को बधाई, पत्रकारीय नैतिकता को श्रद्धांजलि और क्रांतिकारी बिस्तर पत्रकारिता की जयजयकार।
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