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सुख-दुख

आज के अखबार : कांग्रेस की आलोचना से नरेन्द्र मोदी को महान बनाने की अमित शाह की कोशिश यहां देखिए

Newspaper collage: Modi talking with a young girl at a formal meeting, with a man in the background; lower image shows Amit Shah addressing a gathering.

संजय कुमार सिंह

नरेन्द्र मोदी खबरों से गायब हैं। आज दि एशियन एज में पहले पन्ने पर उनकी यह तस्वीर और खबर छपी है। पीटीआई की यह खबर फोटो कैप्शन के रूप में है। हिन्दी में खबर है, क्रिकेटर सूर्य कुमार यादव और उनके परिवार से एक मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी छोटी सरयू से बात करते हुए। सरयू ने प्रधानमंत्री को कन्नड़ में एक गाना भी सुनाया। कहने की जरूरत नहीं है लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 3 और 4 नवंबर 2026 को सोशल मीडिया (एक्स) पर वीडियो संदेश जारी करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को खुली बहस की चुनौती दी थी। उन्होंने ‘देशद्रोही’, ‘विदेशी ताकतों से कनेक्शन’, वित्तीय प्रणाली और अदाणी जैसे मुद्दों पर किसी भी मंच पर, मीडिया और युवाओं की मौजूदगी में आमने-सामने बहस करने की मांग की थी और सोशल मीडिया पर एक पोल भी चलाया था। देशबन्धु की एक खबर के अनुसार, राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए अब कहा है वोट चोरी के बाद हक छीनने की साजिश।   

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से बहस की इस चुनौती पर सीधा कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि, बीजेपी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस पर पलट वार किया है। दूसरी ओर, बीजेपी नेताओं का यह कहना है कि कांग्रेस खुद कमजोर स्थिति में है और ऐसे आरोप केवल राजनीतिक चर्चा में बने रहने के लिए लगाए जा रहे हैं। दिलचस्प है कि भाजपा बुरी तरह घिर गई है कायदे का जवाब देते नहीं बन रहा है। अमित शाह के नेतृत्व में संसद को बातचीत की जगह के रूप में स्थापित करने की कोशिश चल रही है। इसमें सबसे बड़ी बाधा यह है कि अमित शाह संसद में ही कह चुके हैं कि एसआईआर पर संसद में बातचीत नहीं हो सकती है। राहुल गांधी ने उनके दोनों वीडियो जारी करते हुए कहा, अमितशाह जी, मोदी को कनफ्यूज मत कीजिए।

मोदी का तो पता नहीं, प्रहलाद जोशी कनफ्यूज हो गए। बिना संदर्भ का और क्रॉप किया हुआ वीडियो शेयर करने का आरोप लगाते हुए एक्स पर आए हैं। तथ्य है कि यह काम इन लोगों की पार्टी का आईटी सेल करता रहा है। कांग्रेस को इसका भारी नुकसान भी हुआ है। लेकिन ना जवाब दिया ना जवाबी कार्रवाई की। अब सीधी बातचीत की चुनौती से पूरी भाजपा हैरान परेशान लग रही है। मैंने गूगल जेमिनाई से पूछा कि प्रधानमंत्री से संबंधित आखिरी खबर क्या है? जवाब मिला – चुनौती के बाद के इन दिनों में पीएम मोदी ने 5 नवंबर को भारत के पैरा-एथलीटों से मुलाकात कर उनकी हौसला-अफजाई की। इससे पहले 2 नवंबर को उन्होंने नई दिल्ली में ‘भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट’ का उद्घाटन किया और देश के हरित ऊर्जा लक्ष्यों पर जोर दिया। आप समझ सकते हैं कि प्रधानमंत्री उद्घाटन, भाषण, रैली और मुलाकात जैसे काम ही करते हैं।

ऐसे में आज दि इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर का शीर्षक है – दिल्ली में दीवाली से पहले की हवा 8 साल में सबसे खराब, एनसीआर में ग्रैप थ्री लागू। नवोदय टाइम्स की एक खबर का शीर्षक है – गाड़ियों का धुआँ प्रदूषण का बड़ा कारण : सुप्रीम कोर्ट। तथ्य यह है कि इस बार इलेक्ट्रीक गाड़ियों की संख्या बढ़ी ही होगी और इलेक्ट्रीक कारों से संबंधित नियम घोषित नहीं हुए हैं। आरडब्ल्यूए को क्या करना है, तय नहीं है और सड़क किनारे जो चार्जिंग प्वाइंट बने हैं उससे चार्ज करने पर ट्रैफिक वाले यातायात में बाधा डालने का चालान कर रहे हैं। यह सब पहले तय हो जाना चाहिए था अभी भी नहीं है।

दूसरी ओर, द हिन्दू की आज की लीड के अनुसार कर्नाटक सरकार ने कहा है, पेट्रोल के नमूने में इथेनॉल की मिलावट 31 प्रतिशत तक पाई गई। आप जानते हैं कि यह मिलावट सरकार करती है, छूट नहीं देती है और 20 प्रतिशत मिलावट करने की ही घोषणा है लेकिन कर्नाटक सरकार ने नमूना एकत्र कर मिलावट की जांच करवाई तो ये नतीजे मिले। द हिन्दू की लीड के अनुसार, चुनाव आयोग ने बाहर किए गए मतदाताओं से कहा है कि वे जनगणना प्रपत्र पुनः जमा करें। जाहिर है, ईसीआई के तहत जो किया-कराया गया उसका असर जनगणना पर पड़ रहा है जो पहले ही कई साल की देर से हो रही है। खबर के अनुसार, सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के एएसडीडी यानी (ऐबसेंट (अनुपस्थित), शिफ्टेड (स्थानांतरित) डेड (मृत) और डुपलीकेट (दोहराव) वाले  मतदाताओं (जो अब नहीं हैं) से कहा गया है कि जनगणना प्रपत्र पुनः जमा करके मतदान सूची में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं।

द टेलीग्राफ की आज की लीड के अनुसार, यह सुविधा बंगाल के नागरिकों और हटाए गए वोटर के लिए नहीं है। यही नहीं, चुनाव आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे मतदान केंद्रों पर बहिष्कृत मतदाताओं की नई सूचियां प्रदर्शित करें। इससे आप समझ सकते हैं कि देश में आखिर चल क्या रहा है और हिन्दुओं का कितना भला हुआ है। ऐसा ही एक मामला अग्निवीर के मामले में है और द टेलीग्राफ में छपा है। इस खबर के अनुसार, अग्निवीर की सेवा चार साल से बढ़ाकर छह साल किए जाने की खबर से संबंधित कई सवाल अनुत्तरित हैं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि छह साल की सेवा अवधि आगे नियुक्त होने वाले अग्निवीरों के लिए भी है या नहीं। अमर उजाला और दैनिक भास्कर के पहले पन्ने की कोई खबर मुझे उल्लेखनीय नहीं लग रही है। हालांकि, अमर उजाला ने सेंसेक्स में 1718 अंक की उछाल की खबर दी और भास्कर रिसर्च के अनुसार – अब विदेशी निवेशक लौटने की आस । 

दि इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार, यूपीएससी के 2025 बैच और 2016 बैच के बाद के करीब 100 ओबीसी उम्मीदवारों के प्रशिक्षण और उन्हें सेवा में शामिल करने का मार्ग अब खुल सकता है। श्याम लाल यादव की बाईलाइन वाली खबर इस प्रकार है, केंद्र सरकार अगर शुक्रवार के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनुपालन करती है तो सिविल सेवा परीक्षा में चुने गए 958 उम्मीदवारों और भारतीय वन सेवा परीक्षा में चुने गए 148 उम्मीदवारों (2025 बैच) के लिए सर्विस अलॉटमेंट, ट्रेनिंग और इंडक्शन का रास्ता साफ हो सकता है। इस फैसले से लगभग 100 ओबीसी उम्मीदवारों को भी अपनी मेरिट के आधार पर अलग-अलग सिविल सेवाओं में शामिल होने का मौका मिल सकता है।

2016 के बाद से, ‘क्रीमी लेयर’ में आने के कारण उनके जाति प्रमाण पत्र खारिज कर दिए गए थे। इसकी वजह से उनका चयन भी रद्द हो गया था। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा कि 11 मार्च के फैसले को लागू करने में देरी करने का “कोई ठोस या उचित कारण” नहीं है। हालांकि कोर्ट ने शुरू में केंद्र को इस फैसले को पिछली तारीख से लागू करने के लिए छह महीने का समय दिया था, लेकिन सरकार ने 24 अगस्त को इस मामले को लेकर फिर से कोर्ट का रुख किया गया था। स्पष्ट है कि एक तरफ सरकार ओबीसी को मिल रही सुविधाएं देने से हिचक रही है दूसरी ओर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए आरक्षण का लाभ उठाने वालों ने करोड़ों की फीस वाले पाठ्यक्रम में नामांकन लिया है। उल्लेखनीय है कि जातिगत आरक्षण संवैधानिक जरूरत है और आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए आरक्षण राजनीतिक संतुष्टीकरण है।

सरकार से संबंधित आज की एक और खबर दि एशियन एज में फोटो के साथ छपी है। फोटो की चर्चा पहले कर चुका हूं। अब खबर – शीर्षक है,  अमित शाह ने कहा : चीन के डर से कांग्रेस ने उत्तराखंड के सीमांत गांवों को नजरअंदाज किया। इसके साथ उनका यह दावा भी है कि उत्तराखंड में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनेगी। इसके लिए उन्होंने राज्य विधानसभा में 65 से ज्यादा सीटों का लक्ष्य रखा है। तथ्य यह है कि राज्य में 10 साल से भाजपा की सरकार है और अभी भी चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस (की सरकार) को कोस रहे हैं जो 10 साल से सत्ता में नहीं है। मेरा मानना है कि सत्ता में आने के बाद भाजपा ने जो सब किया है उसके लिए और वोट चोरी रोकने के लिए जरूरी है कि भारतीय जनता पार्टी पर प्रतिबंध लगाया जाए। इस तरह के भाषणों पर चुनाव आयोग कार्रवाई करता था, उसका और अदालतों का डर रहता था लेकिन भाजपा की सरकार चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करती है और जजों का तबादला करवा देती है। यही नहीं, जज की संदिग्ध मौत की जांच नहीं करवाई या होने नहीं दी। 

कुछ अदालती फैसले

देश में कानून व्यवस्था और पुलिसिया ज्यादती का पता आज टाइम्स ऑफ इंडिया में पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर छपी दो कॉलम की एक खबर से लगता है। शीर्षक है – हरियाणवी गायक अंकित बलियान की हत्या के दो आरोपियों ने शामली की एक अदालत में अपील की कि पेश करने के लिए उन्हें बेड़ियों में और बुलेट प्रूफ जैकेट में ले जाया जाए। उन्हें डर है कि उत्तर प्रदेश पुलिस उनका फर्जी एनकाउंटर कर सकती है। अदालत ने इन दो अभियुक्तों की अपील स्वीकार कर ली है। एक अन्य खबर के अनुसार गुवाहाटी हाईकोर्ट ने ऐक्टिविस्ट प्रणब डोले की एनएसए में गिरफ्तारी खारिज कर दी है और कहा है कि सरकार ने यह पता करने की कोशिश ही नहीं की कि सामान्य कानून डोले की गतिविधियों से निपटने के लिए अपर्याप्त हैं क्या? तीसरी दिलचस्प खबर पत्रकार तरुण तेजपाल की है।

बलात्कार के मामले में निचली अदालत से बरी कर दिए जाने के बाद हाईकोर्ट से 10 साल की सजा पाए तरुण तेजपाल को जमानत देने से मना कर दिया है। अदालत ने यह भी कहा है कि पीड़िता का इरादा तेजपाल को सजा दिलाने का नहीं है। तेजपाल ने कहा है कि यह राजनीतिक मामला है फिर भी उन्हें राहत नहीं मिली और पहले की खबर के अनुसार हाईकोर्ट ने उनकी सजा बढ़ाने की भी अपील की है। टाइम्स ऑफ इंडिया की आज की खबर के अनुसार, सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता, एडिशनल सॉलिसीटर जनरल एसवी राजू और गोवा के एडवोकेट जनरल देवीदास पंगम ने सरकार की ओर से तेजपाल के खिलाफ पैरवी की। देश की इसी न्यायव्यवस्था ने एक जज की संदिग्ध मौत की जांच करवाने की जरूरत नहीं समझी थी।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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