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सियासत

इंडियन एक्सप्रेस में अफसरों के सेवा विस्तार वाली टिप्पणी पर मनीष सिसोदिया ने नरेंद्र मोदी से पूछा सवाल!

Two men stand side by side; the left man in a yellow shirt gestures with his hand, the right man wears a dark textured vest and glasses.

मनीष सिसोदिया-

प्रधानमंत्री जी, ये गिने-चुने अफसर रिटायरमेंट के बाद भी बार-बार सेवा-विस्तार पाकर देश के सबसे बड़े प्रशासनिक पदों पर काबिज हैं। इतने बड़े देश में सिर्फ चंद अफसरों को बार-बार सेवा-विस्तार देकर शीर्ष पदों पर बिठाए रखने की क्या मजबूरी है?

आपकी सरकार ने 31 जुलाई 2025 को लोकसभा में कहा था कि रिटायरमेंट के बाद सेवा-विस्तार केवल असाधारण परिस्थितियों में, जनहित में दिया जाता है। तो देश को बताइए- इन्हीं चुनिंदा अफसरों को बार-बार बनाए रखने की असाधारण मजबूरी क्या है? कौन-सा जनहित है, जिसे कोई दूसरा योग्य अधिकारी पूरा नहीं कर सकता?

जिन अफसरों के अवसर इन फैसलों से हमेशा के लिए ख़त्म हो रहे हैं, उन्होंने भी तीस-तीस साल जिलों में काम किया है, विभाग चलाए हैं, संकट संभाले हैं। कोई छह महीने बाद रिटायर होगा, कोई एक साल बाद। ऊपर बैठे अफसर को एक-दो साल और मिल गए, तो नीचे किसी योग्य अधिकारी का अवसर हमेशा के लिए खत्म हो सकता है।

इससे भी बड़ा सवाल है- बार-बार सेवा-विस्तार की उम्मीद लगाए बैठा अफसर बिना किसी दबाव के देशहित में फैसले कैसे लेगा? जब अपने अगले सेवा-विस्तार की चिंता उसके फैसलों पर हावी होने लगे, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रशासन कैसे बचेगा? ऐसी निर्भरता पैदा करना ही स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रशासन के बुनियादी सिद्धांत के खिलाफ है।

आपके चंद पसंदीदा अफसरों को बनाए रखने की कीमत दूसरे योग्य अधिकारी और देश की संस्थाएँ क्यों चुकाएँ?

प्रधानमंत्री जी, जवाब दीजिए!


Newspaper clipping with a bold headline that reads 'Retiring the Rules' and a dense paragraph about cabinet extensions and ministerial changes, plus a row of small color swatches at the bottom.

बार-बार सेवा विस्तार… और फिर सेवानिवृत्ति के बाद भी दूसरे पदों पर नियुक्ति…द इंडियन एक्सप्रेस में कूमी कपूर की टिप्पणी।
-श्यामलाल यादव, वरिष्ठ पत्रकार

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