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आठ लाख रुपये की ओपनिंग से 400 से ज्यादा शो तक पहुंची ‘पायर’, क्या ‘हनुमान अंश’ की तरह बदलेगी किस्मत?

Pyre Movie Review

विनोद कापड़ी की फिल्म ‘पायर’ की शुरुआती कमाई भले ही कम रही हो, लेकिन दर्शकों की बढ़ती दिलचस्पी और सिनेमाघरों में शो की संख्या में इजाफा इस फिल्म को लेकर नई उम्मीदें जगा रहा है। पहाड़ों में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती के प्रेम, अकेलेपन और अपने बच्चों की प्रतीक्षा की कहानी कहने वाली इस फिल्म की तुलना अब ‘हनुमान अंश’ से की जा रही है, जिसने धीमी शुरुआत के बाद बॉक्स ऑफिस पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी।

हालांकि, ‘पायर’ के लिए यह राह आसान नहीं है। एक ओर फिल्म को दर्शकों की सराहना मिल रही है, वहीं दूसरी ओर सीमित बजट, छोटे स्तर पर रिलीज और बड़े सितारों की गैरमौजूदगी जैसी चुनौतियां भी हैं।

आठ लाख की शुरुआत, फिर बढ़े शो

विनोद कापड़ी की फिल्म ‘पायर’ 30 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म को शुरुआत में सीमित स्क्रीन और शो मिले, लेकिन इसके बाद सिनेमाघरों में इसकी मौजूदगी बढ़ने लगी। डीएनए की रिपोर्ट के शीर्षक के मुताबिक, फिल्म की शुरुआती कमाई करीब आठ लाख रुपये थी और बाद में इसके शो की संख्या में 400 से अधिक का इजाफा हुआ।

फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन के शुरुआती आंकड़े भी इस बदलाव की ओर संकेत करते हैं। बॉक्स ऑफिस ट्रैकिंग वेबसाइट बॉलीवुड हंगामा के मुताबिक, फिल्म ने पहले दिन लगभग 10 लाख रुपये की कमाई की थी। दूसरे दिन इसकी कमाई बढ़कर 27 लाख रुपये और तीसरे दिन करीब 49 लाख रुपये तक पहुंच गई। इस तरह शुरुआती सप्ताहांत में फिल्म का कुल कारोबार लगभग 86 लाख रुपये रहा।

हालांकि, बॉक्स ऑफिस के अलग-अलग ट्रैकर्स के आंकड़ों में अंतर है। इसलिए शुरुआती कमाई और शो की संख्या को लेकर उपलब्ध आंकड़ों को अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

‘हनुमान अंश’ से क्यों हो रही है तुलना?

फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने भी बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत में अपेक्षाकृत धीमी रफ्तार दिखाई थी। लेकिन दर्शकों की प्रतिक्रिया और सकारात्मक प्रचार के चलते फिल्म की कमाई में बाद के हफ्तों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ ने 52 दिनों में दुनिया भर में 400 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया था। फिल्म ने भारत में 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की नेट कमाई भी की।

‘पायर’ के मामले में भी शुरुआती कमाई के बाद शो की संख्या बढ़ना एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। लेकिन दोनों फिल्मों की विषयवस्तु, बजट, दर्शक वर्ग और रिलीज का पैमाना अलग है। इसलिए ‘हनुमान अंश’ की सफलता को ‘पायर’ की संभावित सफलता का निश्चित संकेत नहीं माना जा सकता।

उत्तराखंड के पहाड़ों में बुनी गई प्रेम और अकेलेपन की कहानी

‘पायर’ की कहानी उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में पदम सिंह और हीरा देवी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। दोनों ही पेशेवर कलाकार नहीं हैं, बल्कि वास्तविक जीवन में पहाड़ों में रहने वाले ग्रामीण हैं।

फिल्म में बुजुर्ग दंपती अपने बेटे की वापसी की प्रतीक्षा कर रहा है। बेटा बेहतर जीवन और रोजगार की तलाश में शहर चला गया है। पहाड़ों से लोगों के पलायन के कारण गांव खाली होते जा रहे हैं और बुजुर्ग दंपती अपने जीवन के अंतिम वर्षों में अकेले रह गए हैं।

बेटे का एक पत्र उनकी उम्मीदों को फिर से जीवित करता है। इस कहानी के माध्यम से फिल्म बुजुर्ग माता-पिता के अकेलेपन, परिवार से दूर होते रिश्तों और पहाड़ों से पलायन जैसे मुद्दों को सामने लाती है।

आठ साल में पूरी हुई फिल्म

फिल्म के निर्देशक विनोद कापड़ी ने इस कहानी पर काम करने की शुरुआत करीब आठ साल पहले की थी। वर्ष 2017-18 के दौरान उत्तराखंड में एक बुजुर्ग दंपती से हुई मुलाकात ने उन्हें इस फिल्म की कहानी लिखने के लिए प्रेरित किया था।

कापड़ी ने मुख्य भूमिकाओं के लिए नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक शाह से भी संपर्क किया था। दोनों कलाकार फिल्म में काम करने के लिए तैयार थे, लेकिन बाद में कापड़ी ने वास्तविक पहाड़ी ग्रामीणों को ही इन भूमिकाओं में लेने का फैसला किया।

फिल्म की शूटिंग और निर्माण की प्रक्रिया लंबी रही। इसके बाद इसे अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भी प्रदर्शित किया गया, जहां इसे कई पुरस्कार मिले।

स्वतंत्र फिल्मों के लिए चुनौतीपूर्ण है सिनेमाघरों तक पहुंचना

विनोद कापड़ी ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा कि बड़े सितारों के बिना स्वतंत्र फिल्मों को सिनेमाघरों और ओटीटी प्लेटफॉर्म तक पहुंचाना बेहद कठिन है। उनके मुताबिक, कई बार फिल्म की कहानी और उसकी गुणवत्ता के बजाय बड़े सितारों की मौजूदगी को अधिक महत्व दिया जाता है।

‘पायर’ के निर्माण और रिलीज की लंबी प्रक्रिया इसी चुनौती को दिखाती है। फिल्म को बड़े पैमाने पर रिलीज कराने के लिए कापड़ी को काफी संघर्ष करना पड़ा।

ऐसे में फिल्म के शो बढ़ना और दर्शकों का सिनेमाघरों तक पहुंचना स्वतंत्र सिनेमा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि, फिल्म की वास्तविक व्यावसायिक सफलता का आकलन उसके आगे के प्रदर्शन और अंतिम बॉक्स ऑफिस आंकड़ों से ही किया जा सकेगा।

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