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उत्तर प्रदेश

अमर उजाला के ब्यूरो चीफ को अंग्रजी से बहुत प्यार हैं इसलिए हिन्दी लेखों में अंग्रेजी हेडिंग घुसेड़ देते हैं

आठ अक्टूबर को हिन्दी के प्रमुख स्तंभकार और साहित्य मनीषी आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की जयंती थी। आचार्य शुक्ल हिन्दी के कवि थे। उनका ज्यादातर जीवन मीरजापुर जिले में बीता। यहां पर उनका पैतृक आवास भी है जहां पर उनके पौत्र रहते है। पर यहां चिंता की बात बड़े अखबार के बड़े पत्रकारों के लेखनी की है। जो हिन्दी अखबार में अंग्रेजी को ऐसे घुसेड़ते हैं जैसे कि वह अंग्रेजी का अखबार हो और उनका पाठक अंग्रेजी मर्मज्ञ हैं।

mirzapur

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आठ अक्टूबर को हिन्दी के प्रमुख स्तंभकार और साहित्य मनीषी आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की जयंती थी। आचार्य शुक्ल हिन्दी के कवि थे। उनका ज्यादातर जीवन मीरजापुर जिले में बीता। यहां पर उनका पैतृक आवास भी है जहां पर उनके पौत्र रहते है। पर यहां चिंता की बात बड़े अखबार के बड़े पत्रकारों के लेखनी की है। जो हिन्दी अखबार में अंग्रेजी को ऐसे घुसेड़ते हैं जैसे कि वह अंग्रेजी का अखबार हो और उनका पाठक अंग्रेजी मर्मज्ञ हैं।

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आठ अक्टूबर के अंक में मीरजापुर अमर उजाला ब्यूरो प्रभारी पवन तिवारी ने एक लेख लिखा। जिसकी हेंडिग है ‘बोथ आर करेक्ट बट शुक्ल इज मोस्ट करेक्ट।’ वैसे तो इन पर बाइलाइन बहुत छपा है। पर ब्यूरो प्रभारी यहां पर नये आये है तो चलता है एक और नया बाइलाइन। पर इतने बड़े पत्रकार और ब्यूरो प्रभारी को इतना तो पता होना चाहिए कि अखबार हिन्दी का है और लेख भी हिन्दी के मुर्धन्य साहित्यकार के बारे में लिखा जा रहा है तो खबर की हेडिंग हिन्दी में लिखे। यही नहीं खबर के अन्दर भी कई शब्द है जो अंग्रेजी में लिखे है जैसे- पीरियड, एक्सप्लेशन, लांगमैन, फ्लैश बैक।

एक बात बता दूं कि बोथ आर करेक्ट बट शुक्ल इज मोस्ट करेक्ट वाली लाइन इन्होंने एक कहानी से ली है जिसमें एक अंग्रेजी के अध्यापक द्वारा यह बात कही गयी है।

 

भड़ास को भेजे गए पत्र पर आधारित।

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