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मोदी के भाषण में भास्कर के ‘नो निगेटिव मंडे’ का उदाहरण

तीन देशों की यात्रा के आखिरी पड़ाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टोरंटो के रिकोह स्टेडियम में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए अपने भाषण में दैनिक भास्कर के ‘नो निगेटिव मंडे’ कैंपेन का उदाहरण दिया। 

तीन देशों की यात्रा के आखिरी पड़ाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टोरंटो के रिकोह स्टेडियम में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए अपने भाषण में दैनिक भास्कर के ‘नो निगेटिव मंडे’ कैंपेन का उदाहरण दिया। 

मोदी ने कहा, ‘ आपको एक हैरानी की बात बताता हूं। यह सबसे बड़ा सरप्राइज है। मेरे लिए भी सरप्राइज है, लेकिन मेरे लिए यह एक सुखद आश्चर्य है। एक अखबार के मालिक ने मुझे चिठ्ठी लिखी है। उसमें लिखा गया है कि देश का जो मूड है, उससे हमने अपने अखबार की एक नीति बनाई है, वह नीति यह है कि सप्ताह में एक दिन हमारा अखबार, सिर्फ और सिर्फ पॉजिटिव न्यूज ही छापेगा। यह छोटी घटना नहीं है मित्रों। भले ही आज एक अखबार ने यह काम शुरू किया है, लेकिन खुद इसे कहना बड़ी बात है। 

उन्होंने कहा कि यह विचार मैंने नहीं दिया, हमारे पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम बार-बार कहते थे कि पॉजिटिव न्यूज का एक कॉलम बनाइए। यह मैंने कहने की हिम्मत नहीं की। मुझे खुशी हुई कि बदले हुए जन-मन का कहां-कहां फैलाव हो रहा है। उससे लगता है कि आप जिन सपनों को लेकर जीते हैं, उन सपनों को साकार होते देखेंगे।’

दैनिक भास्कर विश्व का ऐसा पहला अखबार है, जिसने कुछ महीने पहले ‘नो निगेटिव न्यूज’ कैंपेन की शुरुआत की है। इसके तहत अखबार के सोमवार के संस्करण में केवल पॉजीटिव खबरों को महत्‍व दिया जाता है। निगेटिव न्‍यूज केवल सूचनात्‍मक रूप में छापा जाता है। साथ में टैग भी लगता है कि यह निगेटिव न्‍यूज है, लेकिन आपके लिए जानना जरूरी है।

दैनिक भास्कर से साभार

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2 Comments

2 Comments

  1. Rajesh Deoliya

    April 17, 2015 at 12:45 pm

    Yah marketing stunt ke alava kuch nahi hae. Akhbaar ka kaam hae correct news dena. Kpi news positive ya nigetive nahi hoti.

  2. pradeep jain

    April 18, 2015 at 5:58 am

    सोमवार को निगेटिव न्यूज नहीं छापने की शुरुआत नईदुनिया अखबार ने की थी जो एक महान संपादक के आने के बाद बंद हो गई थी। दैनिक भास्कर ने नईदुनिया की छोड़ी हुई परंपरा को फिर से नए कलेवर के साथ दिया है। दरअसल दैनिक भास्कर ने नईदुनिया की कई अच्छी बातों को आत्मसात किया है। दुर्भाग्य रहा नईदुनिया का कि हर अच्छी शुरुआत का अंत दुःखद हुआ। खेल हलचल, भाव-ताव, कृषि की खबरे, सेहत, स्पैक्ट्रम आदि इसके उदाहरण हैं।

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