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उत्तर प्रदेश

मशहूर शायर इनआम हनफी का इलाहाबाद में इंतिकाल

इलाहाबाद : शायर इनआम हनफी का बुधवार सुबह निधन हो गया। शाम सवा पांच बजे अतरसुरइसा के हसन मंजिल स्थित कब्रिस्तान में न्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उनके निधन पर वरिष्ठ पत्रकार मुनेश्वर मिश्र ने कहा कि इनआम साहब एक अच्छे शायर के साथ ही एक बेहतरीन इंसान भी थे। उन्होंने बाटनिकल सर्वें आफ इंडिया में बतौर साइंटिस्ट असिस्टेंट के रूप में नौकरी की और 1997 में सेवानिवृत्त हुए।  

इलाहाबाद : शायर इनआम हनफी का बुधवार सुबह निधन हो गया। शाम सवा पांच बजे अतरसुरइसा के हसन मंजिल स्थित कब्रिस्तान में न्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उनके निधन पर वरिष्ठ पत्रकार मुनेश्वर मिश्र ने कहा कि इनआम साहब एक अच्छे शायर के साथ ही एक बेहतरीन इंसान भी थे। उन्होंने बाटनिकल सर्वें आफ इंडिया में बतौर साइंटिस्ट असिस्टेंट के रूप में नौकरी की और 1997 में सेवानिवृत्त हुए।  

शोक सभा में शिवपूजन सिंह, प्रभाशंकर शर्मा, इम्तियाज अहमद गाजी आदि ने कहा कि इनआम हनफी साहब इलाहाबाद सहित पूरे देश में एक बेहरतरीन शायर के रूप में जाने जाते थे। उनका निधन अपूरणीय क्षति है। वे अपने पीछे चार पुत्र और दो पुत्रियां छोड़ गए हैं। एक अगस्त 1939 को जन्मे इनआम हनफी की चार किताबें प्रकाशित हुई हैं, जिनमें कागजी पैरहन, लफ्जों की परवाज और सुखन वाराने इलाहाबाद काव्य संग्रह हैं, और फ्लोरा आफ रायपुर दुर्ग जीव विज्ञान की किताब है।

शोक सभा में नरेश कुमार महरानी, हसनैन मुस्तफाबादी, अनुराग अनुभव, जफर बख्त, डॉ. पीयूष दीक्षित, डॉ. डीआर सिंह, डॉ. राजीव सिंह, रोहित त्रिपाठी रागेश्वर, मनीष सिंह, शैलेंद्र जय, सागर होशियारपुरी, रमेश नाचीज आदि मौजूद रहे।

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