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खुद के अखबार ‘पहाड़वासी टाइम्स’ के संपादक प्रताप रावत बन गए अमर उजाला में स्ट्रिंगर!

‘पहाड़वासी टाइम्स’ के संपादक प्रताप रावत उर्फ मामू बने स्टिंगर. लंबे समय से समय से ‘पहाड़वासी टाइम्स’ के संपादक रहे प्रताप रावत उर्फ मामू ने अब अमर उजाला में बतौर स्टिंगर ज्वाइनिंग दे दी है. दरअसल ‘पहाड़वासी टाइम्स’ उत्तरकाशी का साप्ताहिक अखबार है जो कि प्रताप रावत का खुद का अखबार है. पिछले तीन चार सालों से ‘पहाड़वासी टाइम्स’ में बतौर संपादक पहचान बना चुके थे लेकिन हाल ही में अमर उजाला के संवाददाता रविन्द्र थलवाल के ऋषिकेश हिन्दुस्तान अखबार में चले जाने के बाद अमर उजाला उत्तरकाशी में संवाददाता का पद खाली हो गया था. पहले राष्ट्रीय सहारा के पत्रकार प्रकाश रांगड़ के अमर उजाला में जाने की चर्चा जोरों पर थी लेकिन वह अब भी राष्ट्रीय सहारा में ही डटे हैं. इस बीच हाल ही में तीन चार दिन पहले ‘पहाड़वासी टाइम्स’ के संपादक प्रताप रावत ने अमर उजाला में बतौर स्टिंगर ज्वाइनिंग दी तो उनके जानने वाले भी हैरान रह गए और कहना ही पड़ा उनको भी कि संपादक बन गए स्टिंगर.

‘पहाड़वासी टाइम्स’ के संपादक प्रताप रावत उर्फ मामू बने स्टिंगर. लंबे समय से समय से ‘पहाड़वासी टाइम्स’ के संपादक रहे प्रताप रावत उर्फ मामू ने अब अमर उजाला में बतौर स्टिंगर ज्वाइनिंग दे दी है. दरअसल ‘पहाड़वासी टाइम्स’ उत्तरकाशी का साप्ताहिक अखबार है जो कि प्रताप रावत का खुद का अखबार है. पिछले तीन चार सालों से ‘पहाड़वासी टाइम्स’ में बतौर संपादक पहचान बना चुके थे लेकिन हाल ही में अमर उजाला के संवाददाता रविन्द्र थलवाल के ऋषिकेश हिन्दुस्तान अखबार में चले जाने के बाद अमर उजाला उत्तरकाशी में संवाददाता का पद खाली हो गया था. पहले राष्ट्रीय सहारा के पत्रकार प्रकाश रांगड़ के अमर उजाला में जाने की चर्चा जोरों पर थी लेकिन वह अब भी राष्ट्रीय सहारा में ही डटे हैं. इस बीच हाल ही में तीन चार दिन पहले ‘पहाड़वासी टाइम्स’ के संपादक प्रताप रावत ने अमर उजाला में बतौर स्टिंगर ज्वाइनिंग दी तो उनके जानने वाले भी हैरान रह गए और कहना ही पड़ा उनको भी कि संपादक बन गए स्टिंगर.

एक अन्य जानकारी के अनुसार वर्ष 2008 से निरन्तर प्रकाशित पत्रिका ‘नये समीकरण’ में ग्रुप एडिटर के पद पर लायंस क्लब ऑफ़ आगरा ईस्ट के पदाधिकारी कपिल अग्रवाल को जिम्मेदारी दी गई है.

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2 Comments

2 Comments

  1. [email protected]

    October 18, 2015 at 12:24 pm

    अमर उजाला मे पहले ही कम चूतिये भरे है जो rawat जी भी चले आये. गर्त मे जा रहा है पहाड़ का अमर उजाला. १० – १० साल से केवल अपनी नौकरी चला रहे है लोग. अब तो पेंशन लेकर ही जायेंगे. एक एक बीत पे सालो से लोग जमे हुए है. डेस्क से लगातार गलतिया जा रही है, कोई पूछने वाला नहीं है. जमे जमाये लोग है.

  2. Rajesh Nautiyal

    November 10, 2015 at 4:14 am

    अमर उजाला मे पंकज गुप्ता ने उसे लाया

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