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सियासत

केजरीवाल के लिए इवीएम अब पवित्र हो गई!

Girish Malviya-

सबसे पहले पंजाब के भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद की बहुत बहुत बधाई, आप पार्टी ने पंजाब में अविश्वसनीय ढंग से सफलता प्राप्त की है……इस प्रचंड बहुमत को देखते हुए एक छोटा सा सवाल मन में आया है, सोचता हूं कि यहां आप सबसे इस बारे में डिस्कस कर ही लिया जाए !

आपको याद होगा कि 2017 में भी अरविंद केजरीवाल ने पहली बार दिल्ली के बाहर गोवा और पंजाब में पूरी दमदारी से चुनाव लड़ा था और अपनी सफलता के प्रति वह आश्वस्त भी थे……. लेकिन जब परिणाम आया तो अरविंद केजरीवाल के चेहरे की हवाइयां उड़ रही थी, क्योंकि पंजाब में आप पार्टी महज 20 सीटें मिली थी जबकि वोट शेयर उसका 23.72 प्रतिशत था और गोवा में तो आप पार्टी के कुल 39 में से 38 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गयी थी.

EVM की पुरानी खबर

अरविंद केजरीवाल ने बौखलाते हुए पंजाब में कांग्रेस पर इल्जाम लगा दिया था कि पंजाब में उसने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के साथ छेड़छाड़ की है जिसके कारण आम आदमी पार्टी के 20-25 प्रतिशत वोट शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन के खाते में चले गए। केजरीवाल ने भरे हुए संवाददाता सम्मेलन में खुलेआम इल्जाम लगाया था कि “कई बूथों पर उनकी पार्टी को केवल ‘दो, तीन या चार’ वोट ही मिले, जबकि वहां दर्जनों की संख्या में उनके अपने कार्यकर्ता और परिजन भी थे।”

केजरीवाल ने कहा था कि आम आदमी पार्टी को महज 20 सीटें मिलना ‘समझ से परे’ है और यह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता पर एक ‘‘बड़ा सवाल खड़ा” करता है क्योंकि विभिन्न राजनीतिक पंड़ितों ने पार्टी के लिए ‘‘भारी जीत” की भविष्यवाणी की थी।, ‘‘जब आप को भारी जीत एक पूर्व निर्धारित निष्कर्ष था तो अकालियों को 30 प्रतिशत वोट कैसे मिल गए? किसी ने नहीं कहा था कि कांग्रेस इतना अच्छा प्रदर्शन करेगी और दो तिहाई बहुमत ले आएगी। हमें संदेह है कि ईवीएम में गड़बड़ी के कारण ‘आप’ के हिस्से के 20-25 प्रतिशत मत शिअद-भाजपा को चले गए।”

केजरीवाल ने यह मांग की कि पंजाब में लगभग 32 स्थानों पर ईवीएम में दर्ज मतों की तुलना वीवीपीएटी (वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रायल) से कराई जाए, जहां पेपर ऑडिट प्रणाली सक्रिय थी। उन्होंने कहा, ‘‘यह चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और मतदान प्रणाली में लोगों के विश्वास की बात है, प्रथम दृष्टया हमारे पास गड़बड़ी के पुख्ता सबूत हैं।”

केजरीवाल इतने पर ही नही रुके….. दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में आम आदमी पार्टी ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में कथित गड़बड़ी किए जाने का डेमो तक उन्होने दिखा दिया सदन के अंदर आप विधायक सौरभ भारद्वाज डमी ईवीएम लेकर पहुंचे थे और बताया कि कैसे ईवीएम की मदद से परिणामों को बदला जा सकता है

2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भी आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा था कि EVM जीत गई है और गुजरात हार गया है.

हालांकि जब चुनाव आयोग में ईवीएम की गड़बड़ी को देखने के लिए हेकेथोन का आयोजन किया तो आम आदमी पार्टी ने उसमे भाग लेने से इन्कार कर दिया उसके बाद हुए दिल्ली विधानसभा उप चुनाव की एक सीट पर आप पार्टी ने ईवीएम से हुए चुनाव में बडी जीत दर्ज की ओर उसके बाद ईवीएम को लेकर सारी बहस ठंडी पड़ गई…..

यह तो बात हुई 2017 की,अब आते है 2022 पर ……2022 में आम आदमी पार्टी जब प्रचंड बहुमत से पंजाब में 92 सीटे जीत चुकी और गोवा में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल कर चुकी है….. अब केजरिवाल और सौरभ भारद्वाज दोनो खामोश हो गए है कोई ईवीएम पर बयान नही दे रहा हैं, ईवीएम अचानक से पवित्र घोषित हो चुकी है, मीडिया भी जिसका काम था कि इस बारे में पुछताछ करे वह पंजाब में आम आदमी का मुख्यमंत्री बनते देख गदगद हो रहा है……

ठीक यही पैटर्न आपको 2009 में देखने को मिला था जब लोकसभा चुनाव में मिली हार पर आडवानी जी और पार्टी प्रवक्ता नरसिम्हा जी बकायदा किताबे लिखकर ईवीएम को लोकतंत्र का दुश्मन करार दे रहे थे, लेकिन जब मोदी ने 2014 में पार्टी को टेक ओवर किया और बहुमत हासिल किया तबसे बीजेपी के लिए भी ईवीएम पवित्र हो गई….

है न कमाल !……

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