रवीश कुमार-
आर के सिंह मोदी सरकार में ही ऊर्जा मंत्री रहे हैं। उन्होंने अगर 62000 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया है तो बिहार सरकार को दस्तावेज़ सामने रखने चाहिए।
आखिर कोई क्यों नहीं चाहेगा कि पूर्व ऊर्जा मंत्री झूठ बोल रहे हैं, इतना बड़ा आरोप लगा रहे हैं तो उनका पर्दाफाश कर दिया जाए? चुप्पी क्यों ओढ़ ली जाती है? आर के सिंह पूरे तर्क के साथ आरोप रख रहे हैं। इसका तो एक ही तरीका है। उसी तर्क के साथ उन आरोपों का जवाब दिया जाए। बिहार सरकार को दस्तावेज़ सामने रख देने चाहिए।
कोई आर के सिंह को नोटिस भेजने की हिम्मत क्यों नहीं करता? क्या इसलिए कि कोर्ट के डर से लोग चुप होते जाएंगे और यह आरोप ग़ायब हो जाएगा? जिस इंटरव्यू को एक चैनल ने डिलिट कर दिया, अजीत अंजुम ने करके दिखा दिया और यह उनके चैनल पर है।
यू ट्यूबर पर तरह तरह के सवाल करने वाले लोग ऐसे वीडियो शेयर नहीं करते। सैंकड़ों यू ट्यूबर हैं। सबकी अपनी-अपनी कहानी है। गोदी चैनलों की तरह इनमें एकतरफा पैटर्न नहीं है। यह चालाकी की जाती है जब सब धान बाईस पसेरी किया जाता है। इस चुुनाव में भी प्रभावशाली रिपोर्ट यू ट्यूबर के ज़रिए ही सामने आई है। कइयों की अच्छी मंशा के बाद भी रिपोर्ट औसत रही है लेकिन उन्हीं का एक दो वीडियो प्रभावशाली रहा है।
गोदी चैनल का एक पत्रकार जिन संसाधनों से लैस होता है उससे सौ गुना कम संसाधन यू ट्यूबर के पास है। फिर भी उनमें से कुछ अपने कंटेंट को पाक साफ रखने की कोशिश करते हैं। इतनी आसानी से आप उनके काम को खारिज नहीं कर सकते हैं। उन्हें गोदी चैनलों का विकल्प मान लेने में ही समस्या है। एक अखबार में दर्जनों रिपोर्टर होते हैं। उनका मुकाबला यू ट्यूबर कैसे कर सकता है।
इसके बाद भी नहीं भूलना चाहिए कि SIR का पूरा मामला एक यू ट्यूबर ने ही एक्सपोज़ किया था। उन्हीं के चैनल पर यह इंटरव्यू है। जिनकी यह शिकायत है कि यू ट्यूबर से निष्पक्ष जानकारी नही्ं मिल रही है वो अजीत अंजुम के इस इंटरव्यू का ज़िक्र कर सकते हैं और शेयर कर सकते हैं। अगर यह इंटरव्यू निष्पक्षता के खाते में नहीं आता है तो कौन सा आता है। एक और बात है। अदाणी समूह नोटिस भेज देता है। एक चैनल में दस वकील होते हैं। एक यू ट्यूबर का रिस्क सब कुछ उसका होता है। इसके बाद भी अजीत अंजुम ने आर के सिंह का इंटरव्यू किया है।
देखें वीडियो-
https://youtu.be/Fqg6ibGWG2A?si=RaaZVTEj0xMNdyeU



