मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई में आकाशवाणी के पीटीसी की तरफ भी ध्यान दें

यशवंत भाई

नमस्कार… 

पत्रकार साथियों को मजीठिया दिलाने की जो मुहिम आपने शुरू की है, वह मुक्त कंठ से सराहनीय है। आपको बार- बार बधाई। आपके संज्ञान में एक बात यह भी लाना चाहता हूं। सूचना प्रसारण मंत्रालय भी पत्रकारों का शोषण कर रहा है। आकाशवाणी द्वारा देश के प्रत्येक जिले में अंशकालिक संवाददाता रखे हुए है जिन्हें आकाशवाणी की भाषा में पीटीसी यानि पार्ट टाईम करेस्पांडेंट कहा जाता है। इन्हें प्रत्येक माह कुल साढे़ चार हजार रुपये दिया जाता है। इसमें तीन हजार रुपये पारिश्रमिक, और 1500 रुपये मोबाईल व पेट्रोल का शामिल है। यानि पारिश्रमिक के रूप में मात्र सौ रुपये रोज, मनरेगा के मजदूर की मजदूरी से भी कम।

इसके लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं, सब सरकार के रिकॉर्ड पर है। सुप्रीम कोर्ट को सूचना प्रसारण मंत्रालय या प्रसार भारती को भी निर्देश देना चाहिए कि वह मजीठिया के अनुसार अंशकालिक संवाददताओं को भी पिछले एरियर सहित निर्धारित पारिश्रमिक दें। आपके संज्ञान में इसलिए लाया हूं कि आप पत्रकार मित्रों के साथ सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया को लेकर अखबार मालिकों के खिलाफ जा रहे हैं। सो, एक प्रतिष्ठान ये भी है। कृपया मेरे नाम का उल्लेख मत कीजिएगा।

धन्यवाद।

एक वरिष्ठ पत्रकार द्वारा भड़ास को भेजे गए पत्र पर आधारित. आपको भी कुछ कहना-बताना है? हां… तो bhadas4media@gmail.com पर मेल करें.


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Comments on “मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई में आकाशवाणी के पीटीसी की तरफ भी ध्यान दें

  • भाई…………..

    नमस्कार…

    पत्रकार साथियों को मजीठिया दिलाने की जो मुहिम आपने शुरू की है, वह मुक्त कंठ से सराहनीय है। आपको बार- बार बधाई। आपके संज्ञान में एक बात यह भी लाना चाहता हूं। सूचना प्रसारण मंत्रालय भी पत्रकारों का शोषण कर रहा है। आकाशवाणी द्वारा देश के प्रत्येक जिले में अंशकालिक संवाददाता रखे हुए है जिन्हें आकाशवाणी की भाषा में पीटीसी यानि पार्ट टाईम करेस्पांडेंट कहा जाता है। इन्हें प्रत्येक माह कुल साढे़ चार हजार रुपये दिया जाता है। इसमें तीन हजार रुपये पारिश्रमिक, और 1500 रुपये मोबाईल व पेट्रोल का शामिल है। यानि पारिश्रमिक के रूप में मात्र सौ रुपये रोज, मनरेगा के मजदूर की मजदूरी से भी कम।

    इसके लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं, सब सरकार के रिकॉर्ड पर है। सुप्रीम कोर्ट को सूचना प्रसारण मंत्रालय या प्रसार भारती को भी निर्देश देना चाहिए कि वह मजीठिया के अनुसार अंशकालिक संवाददताओं को भी पिछले एरियर सहित निर्धारित पारिश्रमिक दें। आपके संज्ञान में इसलिए लाया हूं कि आप पत्रकार मित्रों के साथ सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया को लेकर अखबार मालिकों के खिलाफ जा रहे हैं। सो, एक प्रतिष्ठान ये भी है।

    धन्यवाद।
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  • भाई…………..

    नमस्कार…

    पत्रकार साथियों को मजीठिया दिलाने की जो मुहिम आपने शुरू की है, वह मुक्त कंठ से सराहनीय है। आपको बार- बार बधाई। आपके संज्ञान में एक बात यह भी लाना चाहता हूं। सूचना प्रसारण मंत्रालय भी पत्रकारों का शोषण कर रहा है। आकाशवाणी द्वारा देश के प्रत्येक जिले में अंशकालिक संवाददाता रखे हुए है जिन्हें आकाशवाणी की भाषा में पीटीसी यानि पार्ट टाईम करेस्पांडेंट कहा जाता है। इन्हें प्रत्येक माह कुल साढे़ चार हजार रुपये दिया जाता है। इसमें तीन हजार रुपये पारिश्रमिक, और 1500 रुपये मोबाईल व पेट्रोल का शामिल है। यानि पारिश्रमिक के रूप में मात्र सौ रुपये रोज, मनरेगा के मजदूर की मजदूरी से भी कम।

    इसके लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं, सब सरकार के रिकॉर्ड पर है। सुप्रीम कोर्ट को सूचना प्रसारण मंत्रालय या प्रसार भारती को भी निर्देश देना चाहिए कि वह मजीठिया के अनुसार अंशकालिक संवाददताओं को भी पिछले एरियर सहित निर्धारित पारिश्रमिक दें। आपके संज्ञान में इसलिए लाया हूं कि आप पत्रकार मित्रों के साथ सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया को लेकर अखबार मालिकों के खिलाफ जा रहे हैं। सो, एक प्रतिष्ठान ये भी है।

    धन्यवाद।

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  • भाई…………..

    नमस्कार…

    पत्रकार साथियों को मजीठिया दिलाने की जो मुहिम आपने शुरू की है, वह मुक्त कंठ से सराहनीय है। आपको बार- बार बधाई। आपके संज्ञान में एक बात यह भी लाना चाहता हूं। सूचना प्रसारण मंत्रालय भी पत्रकारों का शोषण कर रहा है। आकाशवाणी द्वारा देश के प्रत्येक जिले में अंशकालिक संवाददाता रखे हुए है जिन्हें आकाशवाणी की भाषा में पीटीसी यानि पार्ट टाईम करेस्पांडेंट कहा जाता है। इन्हें प्रत्येक माह कुल साढे़ चार हजार रुपये दिया जाता है। इसमें तीन हजार रुपये पारिश्रमिक, और 1250 रुपये मोबाईल व पेट्रोल का शामिल है। यानि पारिश्रमिक के रूप में मात्र सौ रुपये रोज, मनरेगा के मजदूर की मजदूरी से भी कम।

    इसके लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं, सब सरकार के रिकॉर्ड पर है। सुप्रीम कोर्ट को सूचना प्रसारण मंत्रालय या प्रसार भारती को भी निर्देश देना चाहिए कि वह मजीठिया के अनुसार अंशकालिक संवाददताओं को भी पिछले एरियर सहित निर्धारित पारिश्रमिक दें। आपके संज्ञान में इसलिए लाया हूं कि आप पत्रकार मित्रों के साथ सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया को लेकर अखबार मालिकों के खिलाफ जा रहे हैं। सो, एक प्रतिष्ठान ये भी है।

    धन्यवाद।

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  • rakesh.............. says:

    भाई…………..

    नमस्कार…

    पत्रकार साथियों को मजीठिया दिलाने की जो मुहिम आपने शुरू की है, वह मुक्त कंठ से सराहनीय है। आपको बार- बार बधाई। आपके संज्ञान में एक बात यह भी लाना चाहता हूं। सूचना प्रसारण मंत्रालय भी पत्रकारों का शोषण कर रहा है। आकाशवाणी द्वारा देश के प्रत्येक जिले में अंशकालिक संवाददाता रखे हुए है जिन्हें आकाशवाणी की भाषा में पीटीसी यानि पार्ट टाईम करेस्पांडेंट कहा जाता है। इन्हें प्रत्येक माह कुल 4250रुपये दिया जाता है। इसमें तीन हजार रुपये पारिश्रमिक, और 1250 रुपये मोबाईल व पेट्रोल का शामिल है। यानि पारिश्रमिक के रूप में मात्र सौ रुपये रोज, मनरेगा के मजदूर की मजदूरी से भी कम।

    इसके लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं, सब सरकार के रिकॉर्ड पर है। सुप्रीम कोर्ट को सूचना प्रसारण मंत्रालय या प्रसार भारती को भी निर्देश देना चाहिए कि वह मजीठिया के अनुसार अंशकालिक संवाददताओं को भी पिछले एरियर सहित निर्धारित पारिश्रमिक दें। आपके संज्ञान में इसलिए लाया हूं कि आप पत्रकार मित्रों के साथ सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया को लेकर अखबार मालिकों के खिलाफ जा रहे हैं। सो, एक प्रतिष्ठान ये भी है।

    धन्यवाद।
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