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NDTV में अजय शर्मा का होना सिर्फ एक कुर्सी का भरा जाना नहीं, बल्कि भरोसा था!

सुशील मोहापात्रा-

कुछ लोग किसी संस्था में सिर्फ काम करने नहीं आते, वे उस संस्था की आत्मा बन जाते हैं। अजय शर्मा जी, NDTV के ऐसे ही लोगों में से एक रहे। 22 वर्षों तक लगातार, निष्ठा के साथ, एक ही जगह काम करना आज के दौर में जितना दुर्लभ है, उतना ही प्रेरणादायक भी।

22 साल के बाद अजय जी एनडीटीवी से रिटायर्ड हो गए हैं। Output Editor की भूमिका में उन्होंने जो जिम्मेदारियाँ निभाईं, वह बाहर से देखने पर एक शिफ्ट या एक काम जैसा दिख सकता है, लेकिन जो लोग उनके साथ काम कर चुके हैं वे जानते हैं कि अजय जी का होना सिर्फ किसी कुर्सी का भरा जाना नहीं था, बल्कि एक भरोसे का बना रहना था।

वे बहुत कम बोलते थे — लेकिन उनकी मौजूदगी में एक गंभीर सादगी होती थी।वे किसी मीटिंग में भाषण नहीं देते थे, लेकिन वक्त पर उनकी चुप सलाहें बड़ी समस्याओं को हल कर देती थीं।

वे कैमरे के पीछे रहते, headlines को तराशते, खबरों की भाषा को सधा करते और कभी खुद को खबर नहीं बनने देते। मेहनती, समय के पाबंद, और अपने काम में पूरी तरह लीन अजय जी को देखकर समझ आता था कि शोर करना जरूरी नहीं, असर पैदा करना ज़रूरी है।

वो कभी देर नहीं करते थे, कभी शिकायत नहीं करते थे, कभी ज़रूरत से ज़्यादा नहीं बोलते थे लेकिन जब भी ज़रूरत होती, वहाँ मौजूद होते थे। यही उनकी खूबसूरती थी। बहुत से नए पत्रकारों ने NDTV में अपने करियर की शुरुआत की और अजय जी की नज़रों के सामने बढ़े।

22 साल कोई मामूली समय नहीं होता। ये वो अवधि है जिसमें दुनिया बदल गई लेकिन अजय जी के अंदर जो चीज़ नहीं बदली, वह थी उनकी ईमानदारी, संयम और कर्मनिष्ठा। कभी कुछ कहे बिना, बहुत कुछ सिखा जाना।

हमारी शुभकामनाएं आप के आगे की जीवन के लिए जिस में अब शायद थोड़ा राहत हो, थोड़ा विश्राम और ढेर सारा सम्मान

मूल खबर…

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