अब अमृतसर हादसे का दोषी तलाश रहे हैं अखबार वाले

नवजोत कौर सिद्धू, ट्रेन का ड्राइवर, फाटक वाला और आयोजन समिति निशाने पर …

आज के अखबारों में अमृतसर रेल हादसे का फॉलो अप प्रमुखता से छपा है। इसमें मुख्य बात यह है कि हादसे के कारण अमेरिका यात्रा छोड़कर लौटे रेल मंत्री की कोई सूचना कहीं प्रमुखता से नहीं है। रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के हवाले से कहा गया है कि रेलवे ने अपनी गलती नहीं मानी।

नवभारत टाइम्स ने इसे लीड बनाया है और प्रमुखता से चार कॉलम में बड़े अक्षरों में लिखा है, अमृतसर में शुक्रवार को रावण दहन देख रही भीड़ के ट्रेन की चपेट में आने से 59 लोगों की मौत हो चुकी है और 57 लोग अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं, लेकिन इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद हर कोई अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने में जुटा हुआ है। ट्रेन से कटकर मौत के देश के इसे सबसे बड़े मामले में रेलवे ने कह दिया है कि उसकी कोई गलती या लापरवाही नहीं है। उधर, रामलीला कमिटी भी पुलिस की एनओसी दिखाते हुए जिम्मेदारी से किनारा करने की फिराक में है जबकि पंजाब सरकार भी खुद को बचा रही है।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस खबर को नेट पर उपलबध मुंबई एडिशन में लीड बनाया है पर दिल्ली एडिशन में यह खबर पहले पेज से पहले के आधे पर है। अखबार की लीड दिल्ली पुलिस का यह दावा है कि, दिल्ली में इस साल बड़े अपराध 27 से 70 प्रतिशत कम हुए। मुंबई में पहले पन्ने से पहले का आधा पन्ना नहीं है। नवभारत टाइम्स का शीर्षक है, “ट्रेन से कुचल गए 116 लोग … पर जिम्मेदार कोई नहीं”। चार कॉलम को तीन हिस्से में बांट कर बीच के बड़े वाले कॉलम में सवाल है, “अमृतसर रेल हादसे का राणव कौन”? इसके दोनों तरफ दो कॉलम में एक खबर का शीर्षक है, “रेलवे : हमारी गलती नहीं ना जांच होगी ना मुआवजा देंगे”।

इसके नीचे एक और सिंगल  कॉलम का शीर्षक है, “…. लेकिन इन सवालों के क्या हैं जवाब”। इसके तहत तीन बिन्दु हैं, दो सवाल हैं और तीसरा बिन्दु है, मान भी लें कि रेलवे की चूक नहीं थी, तब भी क्या मानवीयता के नाते उसे मुआवजा नहीं देना चाहिए। दूसरी ओर की ओर की खबर का शीर्षक है, राम लीला कमिटी को पता था, भीड़ पटरियों पर है। अखबार ने नवजोत कौर सिद्धू का पक्ष फोटो के साथ प्रमुखता से रखा है। उनका कोट है, एक अतिथि के तौर पर यह जांचना मेरी जिम्मेदारी नहीं है कि समारोह की अनुमति थी या नहीं। …. मैं जब तक मंच पर थी, अफरा-तफरी की संभावना नहीं थी। लोगों को ग्राउंड में बुलाने के लिए चार बार मंच से घोषणा भी की गई थी।

दैनिक हिन्दुस्तान ने इस खबर को पांच कॉलम में लीड बनाया है। एक लाइन का शीर्षक है, ट्रेन हादसे पर सबने पल्ला झाड़ा। इसके ऊपर फ्लैग हेडिंग है, रेल राज्य मंत्री ने जांच कराने से इनकार किया, नगर निगम ने कहा – नगर निगम ने कहा आयोजन की अनुमति नहीं दी। खबर के साथ दो कोट हैं। एक तो रेल राज्य मंत्री का ही है दूसरा पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह है। उन्होंने कहा है, कमिश्नर के नेतृत्व में मजिस्ट्रेट जांच होगी। रिपोर्ट चार हफ्ते में मांगी गई है। अखबार ने सामूहिक दाह संस्कार की फोटो छापी है और बड़े अक्षरों में, पर पांच लाइन सिंगल कॉलम में कैप्शन लगाया है, अमृतसर में शवों के सामूहिक दाह संस्कार के दौरान बदहवाज परिजन। इसी मौके की एक तस्वीर अंग्रेजी दैनिक टेलीग्राफ ने पहले पन्ने ही खबर के साथ छापी है। मेरे ख्याल से फॉलोअप छापने का यह अंदाज ज्यादा अभिनव है।

नवोदय टाइम्स ने घटना के फॉलोअप को, “रो उठा अमृतसर, 3 दिन का शोक शीर्षक से छापा है”। उप शीर्षक है, “रेल हादसा – मुख्यमंत्री पहुंचे, दिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश”। यहां भी सामूहिक दाह संस्कार की तस्वीर है और फोटो पर ही लिखा है, एक साथ जली कई चिताएं। इसके साथ अखबार ने डेढ़ कॉलम में एक लाइन के शीर्षक से एक खबर छापी है, चालक ने नहीं बजाया हॉर्न : सिद्धू। सिद्धू की छोटी सी फोटो के साथ इस खबर में कहा गया है, पंजाब के स्थानीय निकाय मंत्री, नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि बड़ी लापरवाही हुई। उन्होंने अपने आलोचकों से इस घटना पर राजनीति नहीं करने के लिए कहा है। नवोदय टाइम्स ने तीन कॉलम में एक छोटी सी खबर छापी है जिसका शीर्षक है, सिद्धू को बचाने के लिए ‘ऑपरेशन कवर अप’ : सुखबीर। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की फोटो के साथ छपी इस खबर में मुआवजे को पांच लाख रुपए की राशि को कम बताया गया है।

दैनिक जागरण ने इस खबर को पांच कॉलम में एक लाइन के शीर्षक से छापा है, जिम्मेदार हम नहीं सभी ने झाड़ा पल्ला। दूसरी लाइन में उपशीर्षक है, अमृतसर हादसा : जीआरपी की कमजोर एफआआईआर में आरोपित का नाम नहीं, गैर इरादतन हत्या की धाराएं। अखबार में हादसे पर सियासत शीर्षक से रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह, कैबिनेट मंत्री व स्थानीय विधायक नवजोत सिंह सिद्धू कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नवजोत कौर सिद्धू के बयान हैं। इसके साथ अखबार ने घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे मुख्यमंत्री की फोटो छापी है और दूसरी ओर ऊपर नीचे सिद्धू दंपति के बयान छापे हैं।

ऊपर मंत्री का बयान है कि दुर्घटना को राजनीति रूप न दिया जाए जबकि नीचे मुख्यअतिथि का बयान है कि क्या गेटमैन को दिखा नहीं। राजस्थान पत्रिका ने भी इसे लीड बनाया है और शीर्षक लगाया है, रेलवे ने कहा हादसे की ना जांच होगी न होगी सजा,  सिद्धू बोले ट्रेन का हॉर्न तक नहीं बजाया। अखबार ने इस खबर के साथ सिंगल कॉलम की दो खबरें छापी हैं। पहली का शीर्षक है, प्रशासन ने इजाजत तो दी लोगों को ट्रैक पर जाने से नहीं रोका। दूसरी खबर का शीर्षक है, 500 ट्रेनें गुजर जाएं, तब भी 5,000 लोग ट्रैक पर खड़े रहेंगे। खबर में एक वायरल वीडियो के हवाले से कहा गया है, नवजोत कौर सिद्धू को पहले से रेलवे ट्रैक पर खड़ी भीड़ के बारे में पता था लेकिन सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए गए। वीडियो में आयोजनकर्ता करते हैं, मैडम इन लोगों को कोई तकलीफ नहीं है, 500 ट्रेन भी गुजरे 5000 लोग आपके लिए खड़े रहेंगे।

अमर उजाला ने भी अमृतसर हादसे के फॉलो अप को लीड बनाया है। शीर्षक है, ‘रेलवे ने नहीं मानी चूक, महज मजिस्‍ट्रेटी जांच के आदेश’ । दूसरी लाइन में उपशीर्षक है, मौत की ट्रेन : रेल राज्य मंत्री बोले नहीं ली थी आयोजन की अनुमति, सीएम अरमिंदर ने चार हफ्ते में मांगी रिपोर्ट  है। एक कॉलम में छपा है, मजिस्ट्रेट जांच में उठेंगे ये सवाल …।

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट। संपर्क : anuvaad@hotmail.com

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