यह भी कहा कि सीईसी को सिर्फ जज की तरह हटाया जा सकता है। पता नहीं, यह बताने की जरूरत है या कि नहीं कि नियुक्ति के नियम और उससे संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में ही अटका है। जिसकी नियुक्ति का मामला तय नहीं है उसे सुप्रीम कोर्ट ने “स्वायत्त संवैधानिक संस्था” माना। खबरों के अनुसार तीन सदस्यों के इस आयोग को मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले चला रहे थे, मनमानी करने दी गई। सेंसरशिप कानून के खिलाफ प्रकाशकों की याचिका पर भी आज ही सुनवाई है – यह खबर सिर्फ इंडियन एक्सप्रेस में है।
संजय कुमार सिंह
अमर उजाला के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में आज और दैनिक भास्कर के अनुसार बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयोग की ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) प्रक्रिया से जुड़ी विपक्षी दलों की संयुक्त याचिका पर सुनवाई होनी है। तमाम अखबारों में सुनवाई किस दिन है यह शुरू में नहीं लिखा है। दो अखबारों में दो दिन लिखे होने से आप समझ सकते हैं कि तथ्यों के प्रति कितनी गंभीरता है और जब सरकार प्रेस कांफ्रेंस नहीं करती है, सूचनाएं रोकने के हर संभव उपाय करती है तो यह कितना मुश्किल होगा। नवभारत लाइव डॉट कॉम के हवाले से एआई कह रहा है सुनवाई आज हो रही है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई करेगी। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं और अन्य ने यह संयुक्त रिट याचिका दायर की है। इसमें एसआईआर पर रोक लगाने के साथ ज्ञानेश कुमार पर लगाए गए आरोपों तथा उनके कामकाज की जांच की मांग की गई है। आज मेरे कई अखबारों की लीड चुनाव आयोग के हलफनामे की खबर है। ज्यादातर शीर्षक फॉर्म 6 में बदलाव नहीं करने और सर्वसम्मति से फैसले लिए जाने का दावा करते हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ने ईसी की खास बातों को हाईलाइट किया है, टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक है, एसआईआर कराने का जून 2025 का निर्णय आम राय से लिया गया था।
दि इंडियन एक्सप्रेस ने आज पहले पन्ने की एक खबर से बताया है कि 21 समाचार प्रकाशकों के एक समूह ने भारत के प्राइवेसी कानून को चुनौती दी है। इनमें दि इंडियन ए्क्सप्रेस के साथ नेटवर्क18 और एनडीटीवी भी है। खबर के अनुसार आज इस पर सुनवाई है। शीर्षक के अनुसार यह मामला सेंसरशिप और जांच रोकने के उपायों के खिलाफ है। द हिन्दू ने चुनाव आयोग के शपथ पत्र से इस दावे को शीर्षक बनाया है कि सीईसी को सुप्रीम कोर्ट के जज की ही तरह हटाया जा सकता है।
यह दिलचस्प है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का तरीका और उससे संबंधित कानून पर सुनवाई कई साल से लंबित है और उसी कोर्ट में यह दावा किया गया है। कोर्ट ने यह सब जानते हुए चुनाव आयोग को स्वायत्त माना है और हाल में जो सबसे बड़ी मनमानी सामने आई थी उससे शपथपूर्वक इनकार किए जाने की खबर है। यही नहीं, फॉर्म 6 में बदलाव का मामला भी है जो सुप्रीम कोर्ट की सहमति और इनकार से भी जुड़ा हुआ है।
आज देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, “ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए सारे हथकंडे अपना रही है सरकार : कांग्रेस”। सुप्रीम कोर्ट में शपथपूर्वक किए गए दावों से स्पष्ट है कि चुनाव आयोग के अंदर के विरोध से संबंधित कागजातों में मिलकर मोर्चा लिया गया है। यह इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक भी है। अखबार ने अपनी पुरानी खबर के स्क्रीन शॉट के साथ बताया है कि (शपथ पत्र के अनुसार) चुनाव आयोग ने कहा है, फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं हुआ है; चुनाव आयुक्तों की राय और उनके सवाल आयोग के निर्णय नहीं हैं, ईसीआई नेट टीम से कहा गया है कि वह ईआरओ के काम की सहजता सुनिश्चित करे। अखबार ने शीर्षक में यह भी लिखा है कि शपथपत्र इस बात पर शांत है कि दो चुनाव आयुक्तों को सूचना क्यों नहीं दी गई थी।
अमर उजाला में यह खबर लीड है। खबर का फ्लैग शीर्षक है – तीनों आयुक्तों की सहमति से चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया। मुख्य शीर्षक है – आयोग ने कहा, एसआईआर के सभी फैसले सहमति से, फॉर्म-6 में बदलाव नहीं। दैनिक भास्कर में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। यह खबर दूसरे वाले पहले पन्ने की लीड है। खबर के अनुसार, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को दिए जवाब या हलफनामा में कहा है, एसआईआर के तीनों आदेश सर्वसम्मति से, फॉर्म 6 नहीं बदला : आयोग। इसके साथ की एक खबर का शीर्षक है, महाराष्ट्र में एसआईआर रोकने की मांग। केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस। खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया था।

नवोदय टाइम्स में यह खबर लीड है। फ्लैग शीर्षक है – निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके दावा किया। मुख्य शीर्षक है – सर्वसम्मति से लिए गए थे एसआईआर पर सभी फैसले और कहा फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं है। अकेले दि एशियन एज में आज यह खबर पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम में है। इसका शीर्षक है, एसआईआर के आदेश आम राय से जारी किए गए, फॉर्म 6 में बदलाव नहीं किया गया है। अमर उजाला की खबर में यह भी लिखा है – खास बात यह है कि इस हलफनामे को मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों – सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी। द टेलीग्राफ में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है एक स्थानीय, भाजपाई मामला लीड है।
दिल्ली के अखबारों में आज पहले पन्ने की कुछ दूसरी खबरें।
1. ई100% : अब सिर्फ इथेनॉल से चलने वाली कारों के लॉन्च का रास्ता साफ (अमर उजाला में दूसरे पहले पन्ने की लीड)
2. न्यूजीलैंड में भारतीयों को 5 हजार वर्क वीसा, इंजीनियर-नर्स के रिकार्ड आवेदन (दैनिक भास्कर – भास्कर एक्सक्लूसिव)
3. 2.12 लाख करोड़ से मजबूत होगी रक्षा (नवोदय टाइम्स)
4. भाजपा का खरगे के आवास के पास प्रदर्शन (नवोदय टाइम्स)
5. जम्मू कश्मीर में 16,397 महिलाएं व बच्चियां लापता (देशबन्धु में एंकर)
6. एसआईआर अपील पर आदेश अपलोड करने के लिए बंगाल के ट्रिब्यूनल्स के जजों ने चुनाव आयोग से कहा कि पोर्टल ठीक करें, आधार ऑथेन्टीकेशन खत्म करें। (इंडियन एक्सप्रेस)
7. उत्तर पश्चिम दिल्ली में बिल्डिंग गिरने से दो मरे (हिन्दुस्तान टाइम्स)
8. गुवाहाटी के होटल में गोली चली, 5 मरे, एक परिवार (टाइम्स ऑफ इंडिया)
9. लूला ने धुर-दक्षिणपंथी नेता को हराया, चौथी बार राष्ट्रपति बने। पहले दौर में पीछे रहने के बाद ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने शानदार वापसी की; चुनावों में धुर-दक्षिणपंथी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो के पक्ष में अमेरिका की कथित दखलंदाज़ी के बीच उन्होंने कहा, ‘ब्राज़ील किसी के भी प्रभाव क्षेत्र (बैकयार्ड) में नहीं है।’ (द हिन्दू में लीड)
इनमें कुछ खबरें दूसरे अखबारों में भी हैं। आज एक और खास खबर है। यह मानहानि के 2018 के मामले में राहुल गांधी को बरी किए जाने की है। अदालत के फैसले से साफ पता चलता है कि राहुल गांधी को परेशान करने के लिए भाजपा की साजिश का हिस्सा था और इसे स्वीकार ही नहीं किया जाना चाहिए था। हालांकि, इससे भी हल्के एक मामले में राहुल गांधी को सजा हुई थी, उनकी सदस्यता चली गई थी और बंगला खाली करा लिया गया था। यह सब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले। इस लिहाज से यह खबर भाजपाई खेल का सच बताती है। पहले ऐसा फैसला नहीं आता था और राहुल गांधी की खबर पहले पन्ने पर नहीं होती थी। अब जब यह फैसला है और कई अखबारों में पहले पन्ने पर है तो तथ्य है कि इन अखबारों ने उपरोक्त खबरों को उससे ज्यादा महत्व दिया है।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



