
संजय कुमार सिंह
होली के बाद ईद ठीक-ठाक गुजर गई। नागपुर में जो हुआ, होने दिया गया या कराया गया उसके बारे में आपकी अपनी राय जो हो, वह है ही। अब रामनवमी का मौका है। ईद पर नमाज से जिन लोगों को परेशानी होती है उन लोगों को रामनवमी पर बिजली काटे जाने से कोई दिक्कत नहीं होती है। और बिजली इसलिये काटी जाती है कि शोभा यात्रा हर क्षेत्र में जा सके। वहां भी जहां बिजली की नंगी तारें कम उंचाई पर हैं और दुर्घटना की आशंका रहती है। ऐसे में सरकार की ओर से हिन्दू-मुसलमान का विवाद बनाये रखने की कोशिश जारी है। अखबारों ने आज उसे पूरा प्रचार दिया है। आज की लीड है, सरकार इस हफ्ते वक्फ विधेयक संसद में पेश करने पर विचार कर रही है। बंगाल में राम नवमी पर भाजपा की योजना एक अहम आउटरीच प्रोग्राम की है (दि एशियन एज)। नवोदय टाइम्स का शीर्षक ज्यादा स्पष्ट है, वक्फ बिल पर सरकार तैयार। उपशीर्षक है, संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू का बयान है, कुछ दल समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स का एक शीर्षक है, “औरंगजेब का मकबरा कानून से सुरक्षित है : मुख्यमंत्री”। आप जानते हैं कि ऐसा कब हुआ होगा और किसने किया होगा। नहीं जानते तो याद कीजिये लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस के बारे में क्या सब कहा था और वक्फ कानून के बारे में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा ही है, “कांग्रेस राज में बने वक्फ कानून ने बनाया देश का मजाक”।
कुल मिलाकर, भारतीय जनता पार्टी की सरकार खुलकर हिन्दू-मुसलमान कर रही है और अगर चुनाव के समय चुनाव आयोग को नहीं दिखा तो अभी कौन देखने वाला है। अखबार भी सरकार का साथ दे रहे हैं। यह अलग बात है कि आरएसएस की ओर से यह भी प्रचारित किया जा रहा है कि औरंगजेब के मकबरे पर विवाद अनावश्यक है। अगर ऐसा ही है तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणविस को बार-बार यह कहने की क्या जरूरत है कि औरंगजेब हमें पसंद हों या नहीं, उनका मकबरा सुरक्षित स्मारक है। हम किसी को उनका महिमामंडन नहीं करने देंगे। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि औरंगजेब का मकबरा सुरक्षित क्यों है और अगर है तो उनका महिमामंडन क्यों नहीं करने देंगे और महिमामंडन नहीं करने देंगे तो मकबरा क्यों सुरक्षित है। मुख्यमंत्री के बयान से यह विवाद तो होगा ही उसपर सहयोगी दलों में एक, शिवसेना ने औरंगजेब के मकबरे को मिला ‘संरक्षित स्मारक’ का दर्जा खत्म करने की मांग की है। आप जानते हैं कि महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर (पहले औरंगाबाद) में बनी मुगल शासक औरंगजेब की कब्र पर राजनीति चल रही है। विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मांग है कि औरंगजेब की कब्र को संजोए रखने का कोई मतलब नहीं है, इसे हटा दिया जाना चाहिए। हिन्दू संगठनों की इस मांग को खुद सीएम देवेंद्र फडणीस के साथ-साथ सत्ता पक्ष ने समर्थन किया है। वहीं, शिवसेना नेता संजय निरुपम ने भी इस मांग का समर्थन किया है। कुल मिलाकर, भाजपा की हिन्दू मुसलमान की राजनीति में अखबारों के पास खबरें भी ऐसी ही हैं।
इन खबरों में आज एक खबर है, 75 की उम्र में मार्ग दर्शक मंडल की शर्त नरेन्द्र मोदी के लिए नहीं है। द टेलीग्राफ की आज की लीड यही है और इसका फ्लैग शीर्षक है, भाजपा ने (नरेन्द्र मोदी के) रिटायरमेंट की चर्चा मुगलों के उपहास के साथ खारिज की। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि “जब पिता जीवित हों” तो उत्तराधिकार पर चर्चा करना “मुगल संस्कृति” है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस साल के अंत में 75 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने की अटकलों को खारिज कर दिया। अखबार ने लिखा है कि फडणवीस को संभवतः यह बात समझ में नहीं आई कि मोदी सरकार ने पार्टी के दो प्रमुख और वरिष्ठ नेताओं – लालकृष्ण आडवाणी तथा मुरली मनोहर जोशी को उम्र के कारण “मार्गदर्शक मंडल” के एकांतवास में भेज दिया है। नरेन्द्र मोदी के आरएसएस मुख्यालय जाने के एक दिन बाद यह विषय तब सार्वजनिक हुआ जब शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने दावा किया कि संघ चाहता है कि प्रधानमंत्री 75 वर्ष की आयु में रिटायर हो जायें और एक नया राजनीतिक नेतृत्व कार्यभार संभाले। मोदी, इस साल 17 सितंबर को 75 साल के हो जाएंगे। 2014 में सत्ता में आने के बाद उन्होंने भाजपा के पुराने नेताओं के कई सदस्यों को किनारे करने के लिए खुद 75 वर्ष की अनौपचारिक सेवानिवृत्ति आयु का आह्वान किया था।
स्पष्ट है कि सत्ता में बने रहने और नए राज्यों को नियंत्रण में लेने के लिए भाजपा हिन्दू-मुसलमान के अपने पुराने फॉर्मूले का ही इस्तेमाल कर रही है। बिहार और बंगाल में उसे उचित जवाब भी मिल रहा है। इस क्रम में आज की एक खबर पश्चिम बंगाल की है। इसके अनुसार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईद पर कहा है कि वे मुसलमानों के लिए लड़ेंगी (द टेलीग्राफ)। यह खबर आज इंडियन एक्सप्रेस और हिन्दुस्तान टाइम्स में भी है। इंडियन एक्सप्रेस में इसका शीर्षक है, “उत्तेजित किये जाने के प्रभाव में न आयें… वामपंथी, भाजपा एकजुट हो गये हैं, पर मैं अकेले पर्याप्त हूं : ममता”। हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक है, ममता ने भाजपा की विभाजक राजनीति, उकसावों से सतर्क किया। आज की खबरों में 45 लाख की ईनामी महिला माओवादी नेता गुमा दिवेली रेणुका उर्फ भानु के मारे जाने की खबर दि एशियन एज में सिंगल कॉलम में है। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह और छोटी खबर है। कहने की जरूरत नहीं है कि नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने के बाद से माओवादियों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई में कई मुठभेड़ शामिल हैं। इनमें महिलाओं की भी मौत हुई है। इस साल अब तक 110 से ज्यादा माओवादी मारे जा चुके हैं। गये महीने दो अलग अलग मुठभेड़ों में 30 माओवादियों की मौत हुई। लेकिन 45 लाख की ईनामी को अब मारा जा सका। पहले मारे गये माओवादियों का कोई विवरण या परिचय तो सार्वजनिक नहीं ही होता है। और यह दिलचस्प है कि माओवादी हिंसा खत्म किये जाने के दावे के बाद 45 लाख की ईनामी माओवादी को मारा जा चुका है। इंडियन एक्सप्रेस की आज की लीड, रूसी तेल की खरीद पर नए अमेरिकी टैरिफ के डर से संबंधित खबर है। अखबार ने लिखा है कि पारस्परिक टैरिफ पर छूट की उम्मीद कम हो रही है क्योंकि 2 अप्रैल की तारीख नजदीक आ रही है। ऐसी ही खबर टाइम्स ऑफ इंडिया में सेकेंड लीड है। यह ट्रम्प के हवाले से है। इसके अनुसार, किसी देश के लिए कोई अपवाद नहीं होगा ट्रैरिफ की शुरुआत 2 अप्रैल से होगी। देश दुनिया के मतलब की इस खबर को छोड़कर आज के अखबारों हेडलाइन मैनेजमेंट वाली खबरों को प्राथमिकता दी गई है।



