विनय मौर्या-
भाई कोडीन सिरप तस्करी को किसी जाति से जोड़कर देख रहे हैं तो एक बार वायरल एफआईआर उठा कर देख लीजिए पूरा मामला खुद साफ हो जाएगा। शुभम ने सिर्फ “बाहुबल” को ही नहीं, बल्कि “सर्वजन” को भी बराबर का मौका दिया था। मगर लोगों की नज़र सिर्फ बाहुबली पर ही अटक रही है।
अरे भाई, एफआईआर पढ़िए… पूरी पड़ताल करिए… देखिए कि बाकियों के साथ हमारे बंधु भी इस पूरी कहानी में नामजद हैं।
यह मामला किसी एक जाति या एक वर्ग तक सीमित है ही नहीं। असल खेल तो उस तरीके में था जिससे कोडीन सिरप के बिल अलग-अलग नामों और फर्मों पर काटे जाते थे, लेकिन सिरप उन दुकानों तक पहुँचता ही नहीं था। उसकी जगह पहुंचती थीं नोटों की गड्डियाँ। ऊपर से सब कागजों में दुरुस्त, लेकिन भीतर से पूरा सिस्टम ही उल्टा चलता था।
इस धंधे में जाति नहीं, पैसा और पहुंच काम करती थी। जिनके हाथ लंबे थे, जिनके तार मजबूत थे, वही इस पूरे नेटवर्क में फल-फूल रहे थे। इसलिए इसे किसी विशेष नजर से देखना असल सच से दूर भागने जैसा है।
मामले को पत्रकारीय पारखी दृष्टि से देखिए। यह कोई एक समुदाय का खेल नहीं था, बल्कि उन कई चेहरों का गठजोड़ था जो पर्दे के पीछे रहकर इस कालेधंधे को चलाते रहे। सच समझना है तो पूरी तस्वीर देखिए, सिर्फ एक कोने को नहीं। उसने तो पूरी समानता बरती है। यानी सिर्फ बाहुबल नहीं सर्वजन को जोड़े रखा।
अनिल कुमार-
मैं तमाम पत्रकारों को देख रहा हूँ कि वो सिरप के दो अलग-अलग मामलों को एक में घालमेल कर पाठकों को गलत सूचनाएं दे रहे हैं!
दरअसल, कोल्ड्रिफ सिरप पीने से मध्यप्रदेश और राजस्थान में दर्जनों मासूम बच्चों की मौत हुई, जिसे तमिलनाडु की “सन फॉर्मास्युटिकल” ने बनाया था. इस सिरप के एक खेप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (एथिलीन ग्लाइकॉल) की मात्रा अधिक पाई गई, जिसके सेवन से कई बच्चों की किडनी फेल हुई और उनकी मौत हो गई. सरकार ने इस कंपनी पर कार्रवाई की, और मुकदमा दर्ज किया. यूपी में कोल्ड्रिफ सिरप से किसी बच्चे की मौत नहीं हुई.
उत्तर प्रदेश में जो सिरप का मामला है, वह बच्चों के मरने का नहीं बल्कि कोडिनयुक्त सिरप के अवैध तस्करी का मामला है, जो नशे के काम आता है. कोडिनयुक्त इस सिरप की बड़े पैमाने पर बिहार, बंगाल और बांग्लादेश तक गलत तरीके से तस्करी हो रही थी. नशेड़ियों को सिरप बेचा जा रहा था. जांच एजेंसियां कोडिन सिरप के तस्करी में लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं.
दोनों ही मामले अलग हैं, लेकिन तमाम मूर्ख दोनों मामलों को एक साथ मिलाकर अपनी मूर्खता का प्रदर्शन कर रहे हैं या फिर वो किसी एजेंडे के तहत जानबूझकर गलत रिपोर्ट कर रहे हैं.



