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सुख-दुख

आजकल दारूबाजों को दुरुस्त करने में जुटे हैं यशवंत!

यशवंत सिह-

दारू की लत छोड़ पाना बहुत मुश्किल है। दारू को पकड़ना आसान है, मुक्त होना मुश्किल। जेएनयू से पढ़े एक समझदार शख़्स नशेबाजी की गिरफ्त में हैं। वे ट्वेंटी फोर सेवन पीने लगे। उनके बच्चे छोटे हैं। पत्नी बहुत परेशान। मुझे कहा इनको नशा मुक्ति में भर्ती कराइये। मैंने भाई साहब को समझाया। डॉक्टर को दिखाया। वे ठीक हो गए।

दस पंद्रह दिन छोड़े रहे। कल फिर शुरू कर दिया। उनकी स्कूटी से ये बरामद माल है। मेरा सारा प्रयास व्यर्थ जाता दिख रहा है।

सबसे मजेदार बात, आधी वोडका गटकने के बावजूद वो कहते रहे कि नहीं पिया हूँ। आज सुबह बताए कि गांजा पिया था। लेकिन इस बरामदगी ने भेद खोल दिया। पढ़े लिखे विनम्र शरीफ इंसान हैं।

गाली दबंगई जैसे अवगुण उनमें नहीं हैं। पीने के बाद भी नहीं। ये उनका प्लस पॉइंट है। लेकिन पीने के बाद भी न पीने का जो साफ़ झूठ वे बहुत विनम्रता से बोल जाते हैं, वो उनका बड़ा अवगुण है।

देखते हैं अब वो कैसे ठीक किए जा सकते हैं। पर एक बात स्पष्ट है। दारूखोरी की लत से मुक्ति पाना बहुत मुश्किल काम है। ये असंभव सिर्फ मैं ही संभव कर पाया, चाहे जिस भी वजह से। मुझे अब पिलाने में मजा आता है। तो ये जब्त माल कोई पीना चाहता है तो स्वागत है!

(मुझे पता है ये पोस्ट कई भीषण शराबी पढ़ रहे होंगे लेकिन वे चूँ तक न करेंगे क्योंकि उन्हें एडिक्शन है! पीना है और छिपाना भी है। पर अगर वो इस लत से निकलने को इच्छुक हों तो मैं उनकी मदद कर सकता हूँ। संपर्क करें। फ़ीस के नाम पर एक बोतल दे देना, मुझे अपने मित्रों को पिला कर बर्बाद करना है।)


विनीत बिसेन- आप सही लिख रहे हैं शराब पीना बहुत आसान है छोड़ना लगभग नामुमकिन असम्भव तो नहीं क्योंकी आप स्वयं छोड़ चुके हैं। शराब ने मेरे कम से कम सौ परिचितों को मृत्युलोक से मुक्ति दिलाई है मेरी भी इससे जंग जारी है आपका मुझे इस जंग में साथ व शुभाशीष मिला भी है आगे भी मिलेगा मगर आप ही हैं सिर्फ जिसने सक्षमता और सामर्थ्यवान होते हुये भी इसको त्यागा वह भी शराबियों को बिना निषेध करे। आपका अनुभव सभी शराबियों के काम आ सकता है आशा है बीच बीच में आप हम सभी में ट्राई टू से नो हेतु ऐसे ही प्रेरित करते रहेंगे।

अशोक थपलियाल– वाकई दारू छोड़ना अत्यंत दुष्कर होता है। इन श्रीमन को अपने साथ ले जाकर उसी विपश्यना केंद्र में प्रवेश करा दें, जहाँ से आप रिफाइंड होकर आए थे। मेरे एक अनुज मित्र भी कई बरसों से ऐडिक्ट हैं, लेकिन उनका रूटीन विचित्र एवं आकर्षक भी है। चाहे कितनी ही गर्मी हो, वोदका ही पीते हैं। देसी वोदका राजस्थान सरकार वाली भी। शाम ६ से ६.३० बजे देसी मसाला काढ़ा बनाकर परिवार के साथ पीना, फिर ७.३० बजे से ८. ३० तक घर पर ही अकेले “राष्ट्र निर्माण’ में लग जाते हैं। अगर बाहर किसी मित्र या अपने चौपहिया में होते हैं तो मेरा फोन आने पर कहते हैं– दादा सत्संग चल रहा है। फिर रात ९बजे डिनर और सोने से पहले ११ से ११.३०के बीच एक गिलास गर्म मीठा दूध।

विशाल शुक्ला- जेएनयू के एक मित्र थे। पक्के कॉमरेड। 24 कैरेट अनीश्वरवादी। पर जब कोई उनसे गांजा छोड़ने को कहता तो उसे शंकर भगवान का उदाहरण देने लगते थे। करीब 2 महीने पहले कॉमरेड शंकर जी के पास ही चले गए।

मुन्ना सिंह- मैं एक बहुत साधारण परिवार से ताल्लुक रखता हूं,दारू की लत 18 वर्ष की उम्र में लग गयी आज 51 वर्ष का हूं,लत भी इतनी विकराल कि सुबह मिली तो पी लिया अन्यथा सूरज डूबने के बाद कभी नहीं,सब कुछ बर्बाद हो गया, शिक्षा समाज परिवार नात रिश्तेदार यार मित्र, अकेला रह गया,दारू के ऊपर 8/10 नींद की गोलियां मिले तो भी कोई हर्ज नहीं,23 दिसम्बर 2023 का दिन अचानक मन में धार्मिक भावना में एक धार्मिक आयोजन से खुद को जोड़कर देवदूत वानर सेना से जुड़कर सामाजिक कार्यों में भी जुड़ गया, अचानक इसी दिन मन में न जाने कहां से भाव आया दारु गुटका मीट मछली सब एक साथ छोड़ दिया जबकि पत्नी दवा द्वारा दारू छुड़ाने के जिद में अपना जेवर तक बेच चुकी थी लेकिन मुझे दारु की लत से नहीं बचा पाई थी, नशा हमेशा आत्मबल से छूटता हैं,शरीर एकाध साल तक शिथिल रहा ,घर में फांकों तक नौबत आई लेकिन नहीं छुआ फिर कभी,नशा नाश का कारण है बंधुओं मैं भुक्तभोगी हूं कोई साथ नहीं देता जब शरीर जबाब देना शुरू करता हैं।

Alok Nandan- Botal ko maine bhi 3 sal se hath nahi lagaya….nasha se nikalna h to yog aur spritualism ka sahara lekin.

Yashwant Singh- बहुत बधाई इसी जन्म में नया जन्म लेने के लिए। बहुत स्ट्रॉंग विल पॉवर के लोग ही छोड़ पाते हैं।

सतीश सिंह– जब तक स्वयं की इच्छा नहीं जगेगी, कोई इलाज काम नहीं आएगा। व्यक्तिगत स्तर पर काउंसलिंग करके ये जानने का प्रयास करना चाहिए कि किस बात के अफसोस में जी रहे हैं।

Yashwant Singh– ये सच है कि पीने वाले के भीतर ख़ुद छोड़ने की इच्छा नहीं जगेगी तब तक कोई ताक़त उससे दारू नहीं छुड़वा सकती!

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2 Comments

2 Comments

  1. पुनीत

    April 5, 2025 at 6:09 pm

    नौ सौ चूहे खा कर बिल्ली हज को चली

  2. पुनीत शुक्ला

    April 6, 2025 at 9:44 pm

    यशवन्त को अब अपनी बेटी के प्रोफेशन का भी लिहाज करना चाहिए।
    बस ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा। छोटा जो है।

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