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उत्तर प्रदेश

वाह रे बनारस पुलिस, इतना ड्रामैटिक एनकाउंटर मैंने जीवन में नहीं देखा!

अभिषेक उपाध्याय-

इतना ड्रामैटिक एनकाउंटर मैंने जीवन में नहीं देखा! मसला ये है कि बनारस के संकट मोचन मंदिर के महंत के घर हुई लूट का ख़ुलासा हुआ। तीन बदमाशों का हॉफ एनकाउंटर हुआ।

मैंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान सैमुअल बेकेट्स का नाटक “वेटिंग फॉर गोड़ो” कई बार अभिनीत किया है। पर अब तो लग रहा है कि बहुत कुछ सीखना बाक़ी रह गया है।

आप शॉट सीक्वेंस देखते जाइए। पहले OK की आवाज़। फिर विजुअल बनने शुरू। एक ही पोज़ीशन में लेटे हुए तीनों आरोपी।

तीनों के एक पैर में गोली। तीनों को एक तरह से उठाया गया।

तीनों के एक ही तरीक़े से बैग खुलवाए गए। तीनों की एक ही सीक्वेंस से जमा तलाशी!!

वाराणसी पुलिस, आपका खुलासा सही होगा तो कानून, न्याय और आम जन तीनों आपका अभिनंदन करेंगे।

पर इस तरह के वीडियो मेकिंग की ज़रूरत क्या थी? वैसे भी मुझे ये हाफ़ एनकाउंटर का कॉन्सेप्ट आज तक समझ में नहीं आया!!

यह कैसे होता है कि कथित गोलीबारी और आत्म रक्षा के द्वंदयुद्ध के बीच यूपी पुलिस की गोलियाँ पैरों में एक ख़ास स्थान पर ही जाकर लगती हैं?

या ये भी हो सकता है कि ये मिश्रकालीन पिरामिड जैसा कोई चमत्कार हो जो समय की शिला पर यूपी पुलिस की इस उपलब्धि को किसी रोज़ आठवें आश्चर्य के तौर पर अंकित कर जाए!!!!

मुझे नहीं लगता कि सीआरपीसी और आईपीसी में किए गए हालिया संशोधनों का शॉट सीक्वेंस के साथ वीडियो मेकिंग जैसी बातों से कोई रिश्ता होगा!!!!

बाकी ये बनारस है। प्रसिद्ध कवि केदारनाथ सिंह के शब्दों में-

“इस शहर में धूल
धीरे-धीरे उड़ती है

धीरे-धीरे चलते हैं लोग
धीरे-धीरे बजाते हैं घंटे

शाम धीरे-धीरे होती है…..!!”

फिर तो shot sequencing भी धीरे-धीरे ही होगी न!!!!

https://x.com/ranvijaylive/status/1925037623871209738?s=46

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