
खबरों के नाम पर हिंदुस्तान इटावा के रिपोर्टर अपने संस्थान को धोखा देने के साथ ही अपने पाठकों के साथ भी भद्दा मजाक कर रहे हैं। हिंदुस्तान में इटावा में 25 नवंबर को सरकारी कार्यालयों की एक पड़ताल प्रकाशित की है। इस पड़ताल में एक ऐसे अधिकारी को अपने कार्यालय की कुर्सी पर बैठकर कामकाज करते हुए बताया गया है जो अधिकारी 2 महीने पहले सेवानिवृत्ति हो चुके हैं।
यह अधिकारी मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ मनोज गुप्ता है जो 2 महीने पहले सेवानिवृत्ति हो चुके हैं, लेकिन हिंदुस्तान की इस खबर में लिखा है कि मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी मनोज गुप्ता अपने कार्यालय में बैठकर कामकाज कर रहे थे। मनोज गुप्ता सेवा निवृत्त होकर अपने घर जा चुके हैं अब वे इटावा में भी नहीं है, लेकिन हिंदुस्तान के रिपोर्टर को कार्यालय में बैठे मिले।
इस खबर में यह भी लिखा है कि जिला विकास अधिकारी अवकाश पर हैं, इसके बाद जिला विकास अधिकारी के बंद कार्यालय की फोटो छापकर यह दिखाया गया है कि वह कार्यालय से अनुपस्थित है ।
जिले में परियोजना अधिकारी डीआरडीए की पिछले 2 साल से तैनाती नहीं की गई है, उनका कार्यभार जिला विकास अधिकारी के पास है और जिला विकास अधिकारी अवकाश पर हैं। अखबार ने यह लिखा है, इसके बाद भी परियोजना निदेशक को अनुपस्थित दिखाया गया है।
उपायुक्त मनरेगा के पद पर भी 2 वर्ष से किसी अधिकारी की तैनाती नहीं है इनका कार्यभार भी जिला विकास अधिकारी के पास है लेकिन यह बात हिंदुस्तान के रिपोर्टर को पता ही नहीं है। उसने उपायुक्त मनरेगा को भी अनुपस्थित दिखाया है जबकि इसी खबर में लिखा है कि जिला विकास अधिकारी अवकाश पर हैं।
परियोजना अधिकारी नेडा विजय सिंह 31 अगस्त 2025 को सेवा निवृत हो चुके हैं उन्हें भी कार्यालय से अनुपस्थित दिखाया गया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी के पद पर पिछले 6 महीने से किसी अधिकारी की तैनाती नहीं की गई लेकिन इस खबर में उन्हें भी अनुपस्थित दिखाया गया है।
यह पूरी खबर फर्जीवाड़ा का एक बड़ा उदाहरण है। ऐसा लगता है कि किसी ने एक स्थान पर बैठकर ही खबर लिखी और उस व्यक्ति को कार्यालय और अधिकारियों के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। यह भी हो सकता है कि यह शरारत जानबूझ कर की गई हो।
कुछ भी हो हिंदुस्तान इटावा के रिपोर्टर ने अपने ही अखबार को जिले में मजाक का विषय बना दिया है। हिंदुस्तान रिपोर्टरों की इस कवरेज को लेकर इटावा के मीडिया खेमे में तरह-तरह की बातें भी हो रही हैं।
भड़ास को भेजे गए मेल पर आधारित


