बरेली | कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने बरेली स्थित केशलता हॉस्पिटल (रोहिलखंड एंटरप्राइजेज) के खिलाफ पीएफ बकाया मामले में सख्त रुख अपनाते हुए धारा 7A के तहत बकाया निर्धारण की कार्रवाई तेज कर दी है। आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत न करने पर EPFO ने हॉस्पिटल प्रबंधन पर ₹1000 का जुर्माना लगाया है।
EPFO कार्यालय में हुई सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि हॉस्पिटल प्रबंधन ने बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद कर्मचारियों से जुड़े अहम रिकॉर्ड जमा नहीं किए। इनमें वेतन/मजदूरी रजिस्टर, बैलेंस शीट की प्रतियां, पीएफ जमा विवरण, अपवर्जित कर्मचारियों के फॉर्म-11 और आधार संबंधी दस्तावेज शामिल हैं। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए आकलन अधिकारी संजीव सिंह ने दंडात्मक कार्रवाई की।
सुनवाई के दौरान प्रतिष्ठान की ओर से अंकित मिश्रा और संदीप बत्रा (HR) उपस्थित रहे, जबकि विभाग की ओर से सौरभ मिश्रा (DR/EO) और मयूर भारतीया (SSA) ने पक्ष रखा। EPFO ने निर्देश दिया है कि प्रतिष्ठान के जिम्मेदार व्यक्ति को CPC-30 के तहत समन जारी कर भौतिक अथवा वर्चुअल उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
मामले की अगली और निर्णायक सुनवाई 16 जनवरी 2026 को तय की गई है।
नामांकन अभियान 2025 का हवाला
EPFO ने केंद्र सरकार की कर्मचारी नामांकन अभियान 2025 अधिसूचना का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि 01 जुलाई 2017 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच नियुक्त सभी ऐसे कर्मचारियों, जिनका अब तक पीएफ में नामांकन नहीं हुआ है, उनका नामांकन अनिवार्य होगा। इस अवधि के लिए कर्मचारी और नियोक्ता—दोनों का पीएफ अंशदान देय होगा।
ऑनलाइन घोषणा और क्षतिपूर्ति अनिवार्य
हॉस्पिटल प्रबंधन को EPFO के ऑनलाइन पोर्टल पर—कर्मचारियों का विवरण अपलोड करना होगा। ई-चालान-कम-रिटर्न से लिंक कर भुगतान करना होगा। साथ ही ₹100 की क्षतिपूर्ति राशि भी जमा करनी होगी।
विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि 29 अक्टूबर 2025 को जारी EPFO मुख्यालय के सर्कुलर की प्रति प्रतिष्ठान को उपलब्ध कराई जाए, ताकि अभियान से जुड़े दिशा-निर्देशों की जानकारी सुनिश्चित हो सके।
सवालों के घेरे में हॉस्पिटल प्रबंधन
लगातार रिकॉर्ड न देने और पीएफ मामलों में लापरवाही के चलते केशलता हॉस्पिटल प्रबंधन अब श्रम विभाग के रडार पर आ गया है। आगामी सुनवाई में सख्त कार्रवाई की आशंका के चलते प्रबंधन में हलचल मची हुई है।



