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जिस रुचि तिवारी को पत्रकार बताकर बवाल काटा जा रहा है, उसका पूरा चैनल दुष्प्रचार पर टिका हुआ है!

पिछले दो दिनों से दिल्ली विश्वविद्यालय में हुए विवाद को अलग एंगल देकर हवा दी जा रही है, जबकि जिस रुचि तिवारी को पत्रकार बताकर इंटरनेट पर बवाल मचाया जा रहा है वह प्लांटेड बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि उसके पीछे कोई और है जिसे सामने लाया जाना चाहिए। नीचे पढ़िए…


साक्षी जोशी-

जब पत्रकारिता गुंडागर्दी बन जाए, आराम से सवाल पूछने की बजाय माहौल बिगाड़ने का तरीक़ा बन जाए, तो ग़लत को ग़लत कहना ही होगा। साफ़ देखा जा सकता है उस महिला को कैसे नीचे पटका।

क्या उस महिला के सिर से उसे नीचे हत्या के इरादे से फेंका गया? किसी शख़्स का फ़ोन छीनने की कोशिश चोरी के इरादे से की गई? क्या हक़ बनता है आपको किसी का भी मोबाइल छीनने का! दिल्ली विश्वविद्यालय का माहौल बिगाड़ने के लिए एक सोची समझी साज़िश के तहत इन्हें ‘पत्रकार’ की आड़ में भेजा गया? इसके पीछे बहुत बड़ी साज़िश की बू आ रही है।

सुनने में आ रहा है एक बड़ी ‘सवर्ण’ पत्रकारों की लॉबी है इसके पीछे। प्रदर्शनकारियों से सवाल पूछने का सिलसिला यहाँ तक कैसे पहुँचा ये बड़ा जाँच का विषय है और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं पता कीजिए।


आवेश तिवारी-

दिल्ली में सवर्ण यूट्यूबर्स का एक बड़ा गैंग है।रूचि तिवारी, अमनीषा पाल और दीपक लाल आदमी इसमें शामिल हैं। चित्रा त्रिपाठी जैसे दुकड़हे पत्रकारों ने इन्हें संरक्षण दिया हुआ है। इसे गोरखपुर या पूर्वांचल गैंग भी कहा जा रहा है।

रूचि तिवारी, अमनीषा पाल और झंडू लाल दीपक आदि आदि। एक साथी कहते हैं कि हर जगह पहुंचकर चिल्लाना, बदतमीजी करना, मुँह में जबरदस्ती माइक ठूंसना, दलितों पिछड़ों को हड़काना इन लोगों का काम है. ये लोग आपस में ही कैमरामैन और ऑडियंस बनते रहते हैं। इस गैंग में तकरीबन 50 लोग शामिल हैं।

आगे की कहानी यह है कि यूजीसी एक्ट हटाने के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के दौरान रुचि तिवारी दिल्ली विश्विद्यालय पहुंच गई।

पहले दो वीडियो में आपको वो दिख जाएगा कि वो कैसे जबरदस्ती दलित छात्रों को ट्रोल कर रही है। किसी के मुंह में माइक घुसेड़ कर कह रही कि 5000 साल से पानी नहीं पिए हो जब एक लड़की ने प्रतिवाद किया तो उसे धकेल गिरा दिया। लड़के लड़कियां नाराज हो गए तो विक्टिम गेम शुरू हो गया कि कपड़ा फट गया। हिंसा कत्तई समाधान नहीं है। लेकिन पत्रकारिता के नाम पर लुच्चई, जातिगत अहंकार और किसी को नीचा दिखाना भी ठीक नहीं है।


क्रांति कुमार-

Ruchi Tiwari : पानी नही मिला, तुमलोगों को पानी नही मिला… पानी पिलाओ पानी पिलाओ.

Bahujan Youth : बहस करो, ठीक से बहस करो.

वीडियो में साफ साफ दिख रहा है, Ruchi Tiwari बहुजन समाज का अपमान कर रही है, मजाक उड़ा रही है. Victim होने की अफवाह फैलाई जा रही है.

जाति वर्ण अव्यवस्था और जातीय मानसिकता भारत को कमजोर कर रही है. जातीय हेजेमनी खत्म कर भारत को बचाना है.

इसी कारण यह लोग हर रोज रो कर बोलता है HINDU खतरे में है. HINDU कभी भी खतरे नहीं था, ना है. खतरे में इनकी जातीय हेजेमनी है.


अभिषेक उपाध्याय-

रुचि तिवारी के मामले का पूरा सच जानिए। रुचि तिवारी के साथ “बाद” में जो हुआ, उसकी निंदा के साथ, एक बार “पहले” ये भी देख लीजिए कि रुचि तिवारी वहां कर क्या रहीं थीं?

ये उनके ही चैनल का वीडियो है। ये किस कोने से पत्रकारिता लग रही है? आप दलितों के बीच जाकर उन्हें उकसाएंगी। उन पर चीखे चिल्लाएंगी।

हाथ में माइक लेकर वहां ताल ठोंककर झगड़ा करने जाएंगी, और उसके बाद आप चाहेंगी कि देश भर के ब्राह्मण अपने तमाम ज़रूरी मुद्दे छोड़कर इस ड्रामे में शरीक हो जाएं?

यहां योगी आदित्यनाथ की सरकार में ब्राह्मणों की चोटी खींच खींचकर उन्हें मारा जा रहा है। पुलिस ऐसे भयावह कृत्य को अंजाम देती हुई कैमरे पर है। मगर किसी के मुंह से चूं तक नहीं निकल रही है!

ब्राह्मणों के सारे ठेकेदार हाथों में फिरोजाबाद की रंग-बिरंगी कांच वाली चूड़ियां पहनकर बैठे हुए हैं?

क्योंकि योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बोलने की ताकत नहीं है?

क्योंकि सूचना के कुबेर कोष की सप्लाई लाइन से आपके हाथों में स्टाइलिश घड़ियां सज रही हैं और पैरों में प्यूमा ब्रांड के जूते चमचमा रहे हैं।

न कभी एक भी गरीब ब्राह्मण को दो जून का निवाला दीजिए, न कभी किसी गरीब ब्राह्राण परिवार के बच्चे की फीस के पैसे भरिए, न कभी किसी गरीब ब्राह्राण की कन्या की शादी में एक साड़ी खरीदने भर की उदारता रखिए, बस सोशल मीडिया पर ही खाइए, वहीं पर पीजिए, वहीं अघाइए और सारा ब्राह्मणवाद दलितों और पिछड़ों से झगड़ने में दिखाइए।

खुद कंक्रीट की आलीशान छतों के नीचे रहिए, और फूस की झोपड़ियों में माचिस दिखाइए!!


शादाब खान-

रुचि तिवारी को पत्रकार बता कर बवाल काटा जा रहा है, लेकिन उसका पूरा यूट्यूब चैनल दुष्प्रचार पर टिका हुआ है, सिवाय नफरत और सत्ता समर्थित एजेंडे के इन्होंने अपने यूट्यूब करियर में कुछ नहीं किया है।

आई मीन पत्रकारिता तो नहीं ही की है, लेकिन फिर भी हम अम्बेडरवादियों द्वारा की गई अभद्रता की निंदा करते हैं, महिला सम्मान का ज्ञान पेलने वालों को ऐसे हरामीपन पर नहीं उतरना चाहिए था।

दूसरी बात रुचि तिवारी जैसे सैकड़ों दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश के कई शहरों में माइक और कैमरा लिए स्वघोषित पत्रकार अथवा यूट्यूबर घूम-घूम कर समाज में जहर ही घोल रहे हैं, इन पर लगाम लगानी चाहिए।


जातीवादी मीडिया कितना बड़ा ब्राह्मणवादी है अंदाजा लगाइए, ANI ने तीन इंटरव्यू किए, रुचि तिवारी, सार्थक पाठक, आकाश पाठक, सभी ब्राह्मण हैं! रुचि तिवारी ने जानबूझकर प्रोटेस्ट को बदनाम करने के लिए साज़िश रची, एक लड़की को नीचे फेंका, मनु मीडिया ने सारे अपराध छुपा दिए और रुचि को इनोसेंट बता दिया, ANI द्वारा ली गई बाइट सारे मैन स्ट्रीम मीडिया में चल रही है, यह सिंडिकेट है बहुजनों को समझना होगा, इन जातंकियों के साथ पूरा मीडिया प्रशासन मिलार्ड ब्यूरोक्रेसी सब है, इसी ब्राह्मणवाद के खिलाफ़ लड़ाई लड़नी होगी। -नेशनल दस्तक


अश्विनी सोनी-

पहले रुचि सफेद शर्ट पहने और BAMCEF का माइक पकड़े हुए व्यक्ति पर हमला करती है। ये देखके एक लड़की जिसका नाम अंजली बताया जा रहा है उसे रोकने आई, लेकिन रुचि ने अंजली पर भी जानलेवा हमला किया और उसे जमीन पर पकट दिया।

फिर छात्राएं इस हमलावर महिला को पकड़कर पुलिस स्टेशन ले लाने लगी। तो ये जाति और पत्रकार होने का विक्टिम कार्ड चलने लगी।

इस हमलावर रुचि की पत्रकारिता की डिग्री चेक हो। इसपर SC-ST Act और जानलेवा हमले की कोशिश का केस दर्ज हो। इसकी व्हाट्सएप, कॉल डिटेल्स और बैंक ट्रांजेक्शन सार्वजनिक हो।

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