
हफ़ीज़ किदवई-
अब कोई यह नही कह सकता कि किसी एक अकेले को हराने के लिए सब इकट्ठे हुए हैं । चुनाव करीब आ रहे हैं तो देश की राजनीति भी दो ध्रुवीय हुई जा रही है । एक तरफ़ उन लोगों का गठबंधन है, जिसे अपनी सत्ता बरकरार रखनी है । तो दूसरी तरफ़ वह लोग हैं, जिन्हें इस सत्ता को उखाड़ फेंकना है । एक तरफ़ अहंकार है तो दूसरी तरफ उस अहंकार का ईलाज मगर यह सच है कि अब कोई एक अकेला नही है । चाहे शेर कहिए या खरगोश,सबको दूसरे दलों की ज़रूरत है, यह लड़ाई अकेले किसी एक के बस की नही है, क्योंकि यह देश की बुनियाद को ढहाने और बचाने के दरमियान खिसक गई है।
दोनों ही गठबंधन में करीब दो दर्जन दल हैं । दस साल की प्रचंड बहुमत वाली सरकार चलाने के बावजूद उन्हें गठबंधन के साथियों की आज मदद की दरकार है, इसलिए वह भी छोटे छोटे दल लेकर,थाल सजाए खड़े हैं । वह चाहे जितना कहें कि हम ताकतवर हैं, उनमें भी अकेले लड़ने की हिम्मत नही है । दूसरी तरफ विपक्ष है, वह भी अपने दलबल के साथ उनसे लड़ने को अपने सारे मतभेद भुलाकर इकट्ठा हो रहा है ।
अब अगर दोनों गठबंधन को देखें,तो सत्तापक्ष के गठबंधन के पास सांसद ज़्यादा हैं मगर ऐसे दलों की संख्या बहुत छोटी है, जिसके पास पांच से ज़्यादा हों या अपना मुख्यमंत्री हो या विधायकों की संख्या अधिक हो मगर विपक्ष के पास जो दल इकट्ठे हुए हैं, उन्हें गौर से देखना होगा ।
विपक्षी गठबंधन के पास सांसद की संख्या कम है मगर मुख्यमंत्री कई हैं, विधायक ज़्यादा हैं और वोट प्रतिशत भी अधिक है । यह है सत्ता को डराने वाली बात,क्योंकि उधर एक ही लीडर के जादू पर पूरा शो टिका है, उसे भी सहायक साथियों की ज़रूरत पड़ रही और इधर एक से एक युवा और वरिष्ठ लीडर खड़ा है, जो अगर सड़क पर निकल गया,तो इतिहास बनता देखेंगे हम सब,यह कोई ख़्वाब नही हक़ीक़त है ।
इधर सबसे मज़ेदार हुआ यह है कि जो सत्ता, पूरे यूपी में अंसारी भाइयों के ख़िलाफ़ लड़ती रही, उन्हीं अंसारी भाई का बेटा आज सत्ता के गठबन्धन का हिस्सा है। राजभर की पार्टी का विधायक, जिसे आजतक निकाला नही गया है और वह पार्टी सत्ता गठबंधन का हिस्सा है। जिससे लड़ने का मंच मंच पर ज़ोर देते थे, माहौल बनाते थे, मटियामेट करने की कसमें खाते थे,अब वह यार हो गए हैं और तिसपर तुर्रा यह कि विपक्ष का गठबन्धन ठगबंधन है ।
ख़ैर हमें उनसे क्या,इधर तो लड़ाई बहुत अंतिम चरण में है । देश के ख़ातिर विपक्ष के लीडर एक हो रहे हैं । अगर यह एक नही हुए, तो सब के सब खत्म किये जाएँगे । वह कहते हैं कि विपक्ष का दूल्हा कौन है, अरे यह दूल्हों की बारात है भाई, यहाँ हर एक प्रधानमंत्री बनने की योग्यता रखता है और सबके पास देश को लेकर ऊँचे सपने हैं । सबने अपने राज्य में शानदार शासन दिया है, इसलिए इनमें जब भी कोई उठ खड़ा होगा, वह ही श्रेष्ठ होगा ।
मेरा बस इतना कहना है कि अब चाहे जितने इंच का सीना हो,अकेले लड़ने की हिम्मत उनमें भी नही है । विपक्ष तो एक होगा मगर सत्ता डरकर अगर गठबंधन करेगी,तो कहीं तो कुछ खतरा है, कोई तो कर्म ऐसे हैं, जिनसे भय है कि यह जा रहे हैं । दो तीन दर्जन दल लेकर वह विपक्ष से लड़ने निकल रहे हैं ।
विपक्ष में दल भले अलग हों,व्यवहार और राजनीति भले ही अलग हो मगर विचार एक है । विपक्ष का कोई भी दल दिल बांटकर, लोगों को ज़हरीला करके सत्ता नही हासिल करता है । विपक्ष की धमक सत्ता के कानों में गूंजने लगी है, इसलिए उसे तोड़कर,नया दल बनाकर, अपनी गिनती पूरी की जा रही है और लोग कहते हैं कि विपक्ष कमज़ोर हैं ।
एक अकेले राहुल ने इनकीं नींद उड़ा रखी है, अभी तो सभी बाकी हैं, देखते जाइये क्या होने जा रहा है । हम इकट्ठे हुए हैं और जब जब इकट्ठे हुए हैं, अहंकार टूट गया है…विपक्ष की मुस्कुराहट किसी के दिल पर गर्म हवा के झोंके तो ला ही रही होगी,तभी वह एक एक दल चुनकर अपना गठबंधन बड़ा कर रहा, गलती हो गई,एक दल हमभी बना देते,तो मोटा भाई,अंगौछा पहनाकर आज गिनती में ले लेता मगर सच है, सत्ता पाते ही सबके लात भी पड़ती,मगर अभी तो सब मगन हैं…

सीएम योगी ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि अमित शाह इतना बड़ा खेल कर देगे उनके साथ । सीएम की सारी ब्रांडिंग मुख़्तार अंसारी को ज़मीन में मिला देने पर टिकी थी । उनके प्रशंसक उनकी इस बात की सराहना करते थे पर अमित शाह के राजभर को शामिल करने के बाद मुखतार अंसारी का विधायक बेटा और खुद योगी एक ही सत्ता के गठबंधन में शामिल हो गये ।पर लोग कहते हैं कि योगी भी बहुत ज़िद्दी है लोकसभा चुनाव से पहले अपनी इसी ब्रांडिंग को क़ायम रखने के लिये कोई ऐसा दॉव चल सकते हैं जो दिल्ली दरबार के भी पसीने छुड़ा दे ।
-संजय शर्मा

राजभर समाज के विकास के लिए ओमप्रकाश राजभर एक पुत्र के लिए राज्यसभा की सदस्यता, दूसरे पुत्र के लिए लोकसभा का टिकट और स्वयं के लिए उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में मंत्री पद पर समझौते के लिए तैयार होकर NDA में शामिल हो गए । सामाजिक न्याय का संघर्ष अपनी पूर्णाहुति तक पहुँच गया! सिर्फ़ निषाद नेता परिवार ही सत्तासुख प्राप्त करें यह तो अनुचित है ! दारा सिंह चौहान के भी सामाजिक न्याय के संघर्ष की पूर्णाहुति अमित शाह जी के दरबार में दाखिल हो चुकी है , यह सब माननीय कांशीराम स्कूल ऑफ थाट्स से उपजे नवरत्न हैं जो सनातनी व्यवस्था की सेवा को मचल रहे हैं ।
-शीतल पी सिंह




s kumar
July 18, 2023 at 4:53 pm
अरे भाई ये पोर्टल अब अपने मकसद से भटक गया है …पूरा कॉंग्रेसमय हो गया है ….मीडिया की खबर तो अब दिखती ही नही है …सिर्फ राजनीतिक खबर और वो भी सिर्फ एकतरफा
सतीश झा
July 20, 2023 at 8:01 am
भाई साहब,
कुछ तो निष्पक्ष दिखने की कोशिश करिए। ये तो पुरा एकतरफा कर दिया।