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उत्तर प्रदेश

बीएचयू में डिजिटल लाक ले रहा है मरीजों की जान : प्रो. ओमशंकर

भाष्कर गुहा नियोगी

रोगियों के स्वास्थ्य के अधिकार के लिए करूंगा जन आंदोलन

वाराणसी । आम जन के स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हृदय रोग विभागाध्यक्ष ओम शंकर सर सुंदरलाल अस्पताल में हृदय रोगियों के अधिकारों के हनन को लेकर आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में है। उन्होंने कहा अधिकारीयों ने सुपर स्पेशियलिटी भवन में बने हृदय रोग विभाग को आवंटित बेडों पर जो डिजीटल लाक लगा रखा है उससे मरीजों की जान जा रही है, जो एक आपराधिक कृत्य है।

ज्ञात हो कि डिजिटल लाक एक लाकिंग डिवाइस है जिसे विद्युत प्रवाह के माध्यम से संचालित किया जाता है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक ताले को एक एक्सेस कंट्रोल से जोड़ा जाता है। डिजिटल लाक को दूर से भी मानिटर और नियंत्रित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल लाक के चलते पिछले डेढ़ साल में 21000 मरीज बिना इलाज के लौट गए। सैकड़ों की मौत हो गई तो हजारों मरीज इलाज के लिए निजी चिकित्सालयों के जाल में फंसाकर आर्थिक शोषण के शिकार हुए। बावजूद इसके ‌चिकित्सा अधीक्षक, निदेशक महोदय और कुलपति इस मामले को लेकर गंभीर नहीं है। प्रोफेसर ओमशंकर ने आधिकारिक रूप से चिकित्सा अधीक्षक, आईएमएस के निदेशक और कुलपति को पत्र लिखकर हृदय रोग विभाग को आवंटित बेड विभाग को दिए जाने की मांग की है उन्होंने इसके लिए तीन महीने का समय दिया है। मांग न मानने पर उन्होंने जन आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

लम्बे समय से स्वास्थ्य के अधिकार की लड़ाई लड़ने वाले डॉ ओमशंकर का कहना है कि पुराने हृदय रोग विभाग में पहले से 45 बेड है नये बने सुपर स्पेशियलिटी भवन में हमें 41बेड दिया गया है। अधिकारीगण का कहना है कि हम उन्हें 45 बेड देकर 41 बेड ले ले जो सरासर मानसिक दिवालियापन है। उन्होंने कहा कि दिन-प्रतिदिन हृदय रोगियों की संख्या बढ़ रही है ऐसे में ज्यादा बेड और बेहतर सुविधाओं की जरूरत है पर यहां बेड कम कर मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में अस्पताल में रोगियों की बढ़ती संख्या को देखते सरकार ने एम्स जैसी सुविधाओं देने के लिए अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार किया है। मैं आम आदमी को स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार के लिए लम्बे समय से लड़ रहा हूं। जिसके चलते मेरा निलंबन हुआ। मुझे प्रताड़ित भी किया गया और अब जब सुविधाओं का विस्तार हुआ तो हृदय रोगियों से उनका जीने का अधिकार छीना जा रहा है। रोगियों के लिए बेड की संख्या घटाई जा रही है। ऐसे में मरीजों का भला कैसे हो सकता हैं?

उन्होंने कहा विश्वविद्यालय के अधिकारीगण की नजर में रोगियों के लिए सुविधाओं को कम कर देना ही चिकित्सा सेवा का विस्तार है। आधिकारिक रूप से भेजें गए पत्र में उन्होंने अन्य गंभीर मुद्दों को उठाते हुए उनके निस्तारण की मांग की है।

देखें ये वीडियो-

https://fb.watch/lXk-Yqvd1M/?mibextid=omYERt

बनारस से भाष्कर गुहा नियोगी की रिपोर्ट.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
2 Comments

2 Comments

  1. lav kumar singh

    July 20, 2023 at 6:24 pm

    खबर समझ में नहीं आई। किस प्रकार से डिजिटल लॉक से मरीजों की जान जा रही है, यह पल्ले नहीं पड़ा।

  2. Bhaskar ghua y

    July 20, 2023 at 7:34 pm

    दरअसल बीएचयू प्रशासन अपनी हठधर्मिता के चलते सुपरस्पेशलिटी भवन हृदय रोगियों के लिए बने वार्ड में लगे डिजिटल लाक को खोल नहीं रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बेड की संख्या को पहले से कम कर देना चाहती है। जबकि हृदय रोगियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में गंभीर रूप से बीमार रोगियो का इलाज नहीं हो पा रहा है।

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