अश्विनी कुमार श्रीवास्तव-
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बिना हल्ला – गुल्ला किए जिस खामोशी से यूपी के विभागों पर नकेल कसकर अधिकारियों, कर्मचारियों और विभागों को जनता के लिए जवाबदेह बना रहे हैं, वह अदभुत और वाकई काबिले तारीफ है।
हालांकि ऐसा नहीं है सरकार के जरिए होने वाले जनता के काम आसानी से होने लगे हैं या भ्रष्टाचार पूरी तरह खत्म हो गया है लेकिन सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ है कि पारदर्शिता, डेडलाइन और जवाबदेही को लेकर सरकार ने न सिर्फ चाक चौबंद सिस्टम बना दिया है बल्कि अब ऑफिस से लेकर फील्ड तक तकरीबन हर बड़ा अधिकारी एक्शन में दिखने भी लगा है।
जाहिर है, दशकों से जमी गंदगी इस बेहतरीन सिस्टम से अचानक तो साफ नहीं हो जाएगी लेकिन योगी जिस अंदाज में काम कर रहे हैं, आने वाले कुछ बरसों में यूपी निसंदेह देश के बेहतरीन राज्यों में अपना नाम शामिल करवाने में कामयाब हो जाएगा।

दरअसल, यूपी में ज्यादातर विभाग और फील्ड के अफसर- कर्मचारी मुख्यमंत्री या लखनऊ में बैठे आला आधिकारियों को कागजी लिखा पढ़ी में उलझा कर अपनी मनमानी चलाते रहे हैं इसलिए यूपी का हाल बदहाल रहा है।
मगर अब विभाग कोई भी हो, फाइल और कामों की जिम्मेदारी को कागजी लिखापढ़ी में जलेबी बनाकर आला अधिकारियों या शासन तक पहुंचाने वाले अधिकारी – कर्मचारी आसानी से पकड़ में आ जा रहे हैं। इसके लिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऑनलाइन सिस्टम, उसकी निगरानी, फीडबैक, कार्यवाही आदि का चौतरफा जाल बिछाकर सबकी जवाबदेही और टाइमलाइन आदि का सिस्टम बनाने में लंबी कोशिश के बाद अब लगभग पूरी तरह से कामयाबी हासिल कर ली है।
यूपी का लॉ एंड ऑर्डर हो या शासन प्रशासन पर नकेल कसने का काम, योगी सरकार का एक्शन हर कहीं सफल होता भी नजर आ रहा है।
बहरहाल, यूपी की कमान संभालना और यहां क्रांतिकारी बदलाव लाना आसान नहीं है इसलिए योगी सरकार के कामों का व्यापक असर कब तक दुनिया को दिखेगा, यह तो नहीं बताया जा सकता। लेकिन यूपी में रहने वाले लोगों को संभवतः फर्क थोड़ा बहुत तो महसूस होने ही लगा होगा।
लेखक अश्विनी कुमार श्रीवास्तव बिजनेस स्टैण्डर्ड समेत कई अख़बारों में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे हैं.


