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उत्तर प्रदेश

कुंभ में लात जूता रीलबाज खा रहे हैं पर इज्जत जा रही ‘पत्रकार’ नामक शब्द की!

प्रभाकर मणि तिवारी

प्रयागराज में हो रहे महाकुंभ में करोड़ों पुण्यार्थियों के अलावा इस बार हजारों रील बनाने वाले और यूट्यूबर भी पहुंचे हैं. लेकिन लगता है कि इन लोगों का नारा वही है जो ऊपर शीर्षक में लिखा है. दिलचस्प बात यह है कि अब ऐसे लोग भी खुद के पत्रकार होने का दावा करते हैं. लेकिन व्यूज बटोरने के चक्कर में कहीं जूते से पिट रहे हैं तो कहीं लातों से.

कुछ मामलों में सिर्फ गालियां सुन कर ही बच जाते हैं.

ऐसे लोगों को कहां तक महाकुंभ की सुविधाओं के बारे में रील्स बनानी चाहिए ताकि वहां पहुंचने वालों को काम की जानकारी मिल सके. लेकिन भेड़ियाधसान की तर्ज पर तमाम लोग माला बेचने वाली एक युवती और आईआईटी बाबा के ही पीछे पड़ गए हैं. जिसे भी देखिए वह बहती गंगा में हाथ धोते हुए उनके वीडियो ही ठेले जा रहा है.

बाबाओं के वीडियो बनाने के चक्कर में कई लोग चिमटों और चप्पलों से मार खाने के बाद भागते भी नजर आए हैं. इन लोगों ने तो महाकुंभ में बड़े पैमाने पर गंध मचा रखी है.

हद तो यह भी है कि तमाम स्वयंभू शीर्ष चैनल भी इसमें पीछे नहीं हैं. इन चैनलों पर पर माला बेचने वाली मोनालिसा और आईआईटी बाबा के इंटरव्यू जम कर चले हैं. क्या आपको कोई ऐसा चैनल नजर आया जिस पर मेले में पहुंचने वाले आम लोगों की सहूलियत के लिए कोई ढंग की रिपोर्ट चली हो? कम से कम मुझे तो नहीं दिखा.

एक वजह यह भी हो सकती है कि टीवी पर खबरें देखना तो बरसों पहले ही छोड़ दिया था. लेकिन यूट्यूब पर ऐसे क्लिप्स बेशुमार देखने को मिले.

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