उमाशंकर सिंह-
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर डाली गई रिपोर्ट में जस्टिस यशवंत वर्मा का पक्ष भी है जिसमें उन्होंने कहा है कि जिस स्टोर रूम में नोटों की गड्डियां मिलने की बात की जा रही है वहाँ उन्होंने या उनके परिवार ने कभी कोई पैसा नहीं रखा। वो एक ऐसी खुली जगह है जहाँ हर किसी का आना जाना होता है। उन्हें इस मामले में फँसाया जा रहा है।


वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार की ये टिप्पणी पढ़ें-
जस्टिस यशवंत वर्मा का बयान है कि आग उनके घर में नहीं लगी। घर से अलग उस कमरे में लगी जहां रद्दी सामान रखे जाते हैं। वहाँ कोई कैश क्यों रखेगा जहां कोई भी आ जा सकता है। उनके परिवार के किसी ने कैश नहीं रखा। दूसरा जब आग लगी तब वहां मौजूद स्टाफ़ को कैश की बरामदगी नहीं दिखाई गई। किसी ने कैश जलते नहीं देखा। तीसरा जब 15 मार्च की शाम कोर्ट के रजिस्ट्रार ने मौक़े का मुआयना किया तब ऐसा कुछ भी नहीं दिखा था। जहां आग लगी है वहां नोटों के जले या बिखरे होने के निशान तक नहीं है।
तब यह वीडियो कहां का है? आग लगी, नोट जले तो उसके निशान होने चाहिए। यह सब फ़ोरेंसिक जाँच का विषय है । तभी साबित होगा कि उनके कैंपस में नोट था ही नहीं, जला भी नहीं, मिला भी नहीं ।
भयानक केस है। इतने संयोग कैसे हो सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की रिपोर्ट का इंतज़ार किया जाए। तब तक साँसें रोक कर देखिए।
सवाल है कि यह पैसा किसका है ? कौन लेकर आया था इतना नोट ? कोर्ट की जाँच का इंतज़ार है। वीडियो डाल कर चीफ जस्टिस खन्ना ने साहसिक कदम उठाया है। वीडियो को आधिकारिक मंच से जारी किया है। देश की जनता का दिल टूट जाएगा। जजों के बिक जाने की बात से कौन खुश होगा भला ? इन्हें जज कैसे बनाया गया, उसकी भी जाँच होनी चाहिए। बात दूर तक जाएगी।
जस्टिस वर्मा को अगर लगता है कि उन्हें फँसाया गया है तो अब उन्हीं को सफ़ाई देनी पड़ेगी। इस वीडियो के बाद या तो वे जाँच का इंतज़ार कर लें या इस्तीफ़ा दे दें? क्या वाक़ई में जस्टिस वर्मा साबित कर पाएंगे? इस वीडियो के बाद तो मुश्किल लगता है।
एक एक कर सारी संस्थाएं लचर हालत में आ गई। ये बहुत दुखद दिन है। जो बचेगा वो सबके लिए नहीं होगा, जो बचेगा वो सिर्फ़ उसके लिए होगा। सत्यानाश की जय हो !
आरके जैन-
आवास से भारी मात्रा में मिले रूपयो पर जस्टिस वर्मा का दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की दी गई सफाई ।
जस्टिस वर्मा की सफाई- इसमें जो दिखा, ये वैसा नहीं ।
- जस्टिस वर्मा ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को सौंपे जवाब में कहा- 14/15 मार्च की रात बंगले के स्टाफ क्वार्टर के पास स्टोर रूम में आग लगी। कमरा पुराने फर्नीचर, बोतलें, क्रॉकरी, गद्दे, बागवानी उपकरण, सीपीडब्ल्यूडी की सामग्री रखने के लिए इस्तेमाल होता था। कमरा खुला रहता था। इसमें स्टाफ क्वार्टर के पिछले दरवाजे से भी जा सकते थे। यह मेरे मुख्य आवास से अलग था।
2 . घटना के दिन, पत्नी और मैं भोपाल में थे। मेरी बेटी और वृद्ध मां घर पर थीं। मैं 15 मार्च की शाम पत्नी के साथ दिल्ली लौटा। आग लगने के बाद आधी रात को बेटी और निजी सचिव ने दमकल विभाग को फोन किया।
- आग बुझाने के दौरान, सभी स्टाफ और मेरे घर के सदस्यों को सुरक्षा कारणों से घटनास्थल से दूर रहने को कहा गया था। आग बुझाने के बाद वे वहां गए, तो उन्हें वहां कोई नकदी या पैसे नहीं मिले।
- मैंने और न मेरे परिवार के किसी सदस्य ने कभी उस स्टोर रूम में नकदी रखी। यह राशि मेरी नहीं है।
- 15 मार्च की शाम दिल्ली लौटने पर आपका पहला फोन आया था। आपके आग्रह पर आपके पर्सनल प्रोटोकॉल सेक्रेटरी भी घटनास्थल गए। वहां कोई नकदी नहीं मिली। यह बात उस रिपोर्ट से भी स्पष्ट है, जो मुझे सौंपी गई है।
- अगले दिन अदालत शुरू होने से पहले आपने पहली बार वह वीडियो और तस्वीरें दिखाईं, जो आपसे पुलिस आयुक्त ने साझा थीं। इन वीडियो को देखकर मैं स्तब्ध रह गया क्योंकि इसमें दिखाया गया दृश्य उस स्थल से मेल नहीं खा रहा था, जिसे मैंने स्वयं देखा था। इसी कारण मैंने पहली बार यह कहा था कि यह मुझे फंसाने और मेरी छवि धूमिल करने की साजिश प्रतीत होती है।
- घटना ने मुझे यह विश्वास दिलाया है कि यह केवल षड्यंत्र का हिस्सा है, जो दिसंबर 2024 में सोशल मीडिया पर मेरे खिलाफ लगाए गए निराधार आरोपों से जुड़ा हो सकता है।
- मैं आरोप को नकारता हूं कि हमने स्टोर रूम से नकदी हटाई। हमें कभी कोई जली हुई नकदी नहीं दिखाई गई और न ही हमें जली हुई नकदी दी गई। वहां से केवल कुछ मलबा हटाया गया।
- एक जज के लिए उसकी प्रतिष्ठा और चरित्र से बढ़कर कुछ नहीं होता। यह घटना मेरी वर्षों की मेहनत और साख को नुकसान पहुंचाने वाली है।
नोटों के जलते बंडल का वीडियो देखें और पढ़ें मूल खबर-


