


दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर पर जली नोटों की गड्डियों का इंफ़ो और वीडियो सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया की वेबसाइट पर अपलोड किया गया!
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास पर जली हुई नकदी का वीडियो भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपलोड किया गया। न्यायपालिका में ऐसी पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए मुख्य न्यायाधीश खन्ना को बधाई। अभूतपूर्व।
https://x.com/yashbhadas/status/1903513282545107358?s=46
सुप्रीम कोर्ट ने फायर डिपार्टमेंट के झूठ का पर्दाफाश कुछ इस अंदाज में किया…जले हुए नोटों के बंडल को CJI संजीव खन्ना ने वेबसाइट पर अपलोड कर दिया…इसको काला धन कहेंगे कि नहीं?
आदित्य तिवारी की त्वरित टिप्पणी –
यह वीडियो जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली आवास पर लगी आग के समय का है… आग भी लगी, नोट भी जले और सांप भी निकला!
दिल्ली में जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर लगी आग ने तहलका मचा दिया, लेकिन आग से ज्यादा सुर्खियों में वह “रहस्यमयी सांप” है, जो वीडियो में रेंगता नजर आ रहा है। अब सवाल यह उठता है कि यह “सांप” महज एक जीव था या फिर किसी बड़े राज का प्रतीक?
वीडियो में जलती हुई नोटों की गड्डियां भी देखी गईं, जिससे अफवाहों का बाजार गर्म हो गया-“आग लगने से ज्यादा दर्द नोटों को जलते देख हुआ!” उधर, फायर ब्रिगेड के कर्मचारी अपनी पूरी मेहनत से आग बुझाने में जुटे रहे, लेकिन सोशल मीडिया पर बहस कुछ और ही चल रही थी-“आग बड़ी थी या जलते नोटों का दर्द?”
सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस वीडियो को साझा कर दिया, जिससे खबर और भी दिलचस्प हो गई। अब लोग यह भी पूछ रहे हैं कि ये नोट किसके थे? और सांप अंदर कैसे पहुंचा? कुछ तो इसे आग का खेल बता रहे हैं, तो कुछ कह रहे हैं बचपन में सुनी थी नागमणि की कहानी, आज लाइव देख ली!
फिलहाल, जस्टिस यशवंत वर्मा “आग” की तरह खबरों में हैं। देखते हैं कि यह मामला सिर्फ चिंगारी बनकर रह जाता है या फिर कोई बड़ा धमाका करता है!
जस्टिस यशवंत वर्मा का पक्ष पढ़ें-
शरद शर्मा-
CJI जस्टिस संजीव खन्ना ने दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस वर्मा से जुड़ी दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट और आग के दौरान नोटों की गड्डी मिलने के वीडियो को सार्वजनिक करने का जो फैसला लिया वह बहुत साहसिक है…प्रशंसनीय है
इस मामले की CBI,ED जांच तो होनी ही चाहिए और जस्टिस वर्मा साहब पर कार्रवाई भी होनी चाहिए
लेकिन न्यायपालिका की साख को मजबूत करने के लिए भी कुछ बड़े कदम उठाने चाहिए अब CJI साहब को

क्योंकि अब कोई भी जज कोई भी फ़ैसला लेगा तो लोग उसके बारे में कुछ भी अनुमान लगाना शुरू कर देंगे और उदाहरण के तौर पर जस्टिस वर्मा के घर मिले कैश का हवाला देंगे
भारत देश का लोकतंत्र चार स्तंभ पर टिका हुआ है
- विधायिका यानि संसद/विधानसभा
- कार्यपालिका यानी केंद्र सरकार/राज्य सरकार
- न्यायपालिका यानी हमारी अदालतें
- प्रेस यानी मीडिया
विधायिका, कार्यपालिका और प्रेस की विश्वसनीयता के बारे में बताने की ज़रूरत नहीं
न्यायपालिका की विश्वसनीयता फिर भी बची हुई थी भले ही देश में आम आदमी के लिए न्याय मिलना आसान न हो…तुरंत ना हो…
लेकिन फिर भी अदालत के आदेशों का सम्मान किया जाता है…
लेकिन ये एक घटना उन बहुत सी चर्चाओं को बल देगी जो सही है या गलत इसकी कोई पुष्टि नहीं है लेकिन आम जनमानस के मन में चलती रहती थी…फिल्मों में भी दिखाया जाता था
कुछ कीजिये CJI साहब…क्योंकि न्यायपालिका नाम के स्तंभ का मजबूत बने रहना बहुत ज़रूरी है
ताकि हमारे देश का लोकतंत्र बना रहे
वो लोकतंत्र बना रहे जिसको हमारे पूर्वजों ने जाने कितनी कुर्बानी, कितनी मेहनत, कितनी लगन, कितनी हिम्मत और सपनों के साथ बनाया था
जय हिंद
अमित चतुर्वेदी-
जब सुप्रीम कोर्ट ने ख़ुद ये वीडियो जारी किया है, तो सबसे पहले अतुल गर्ग नाम के उस शख्स के ख़िलाफ़ FIR होनी चाहिए जिसने ये कहा था कि ये झूठ फैलाया जा रहा है कि जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में कैश मिला है, जबकि उनके घर जब आग बुझाने उनकी टीम गई तो वहाँ ऐसा कोई कैश नहीं मिला। उसके बाद इस वीडियो में दिख रहे कैश का क्या हुआ, इसके बारे में कोई खबर नहीं, कैश कितना था, किसने हटाया। हटाकर कहाँ ठिकाने लगाया, इसकी भी कोई खबर नहीं…ख़ैर जब जस्टिस वर्मा ने कह ही दिया है कि पैसा उनका नहीं, किसी ने उनके ख़िलाफ़ साज़िश रची है तो अंत में ये सिद्ध हो ही जाएगा, क्यूँकि मुझे अपने देश की “न्याय” व्यवस्था पर पूरा भरोसा है कि वो “ईमानदारी” से न्याय करती है…



Masood Javed Qadri
March 24, 2025 at 1:02 pm
चार स्तंभ में से तीन स्तंभ लड़खड़ाते देश की जनता देख ही रही थी चौथे स्तंभ से ऐसी उम्मीद नहीं थी माननीय CJi महोदय से देश की जनता को उम्मीद है कि वे दूध का दूध और पानी का पानी कर देने वाली कार्यवाही कर सच से पर्दा उठा देंगे