अमर उजाला कन्नौज संस्करण इन दिनों दूसरे अखबारों में छपी खबरों का नकल करके अगले दिन प्रकाशित कर रहा है। दूसरे अखबारों में छपे तथ्यों को भी हूबहू प्रकाशित कर रहा है। जब स्टोरी और खास खबरों का यह हाल है तो यह इसमें कोई संशय नहीं कि रूटीन और रोजमर्रा की खबरें भी इसी तरह दूसरे से मांगकर या बांट कर प्रकाशित हो रही होंगी। इस बारे में अमर उजाला के कानपुर संपादक को साक्ष्य सहित शिकायत की जा चुकी है। उसके बावजूद इस प्रकरण पर चुप्पी साधा गया है। इससे यह प्रतीत हो रहा है कि अमर उजाला की संपादकीय टीम और प्रबंधन को अपनी संस्थान की प्रतिष्ठा बनाने या बचाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। दूसरे अखबार में छपी खबर को अगले दिन अपने अखबार में छापने की सहमति दी जा चुकी है। या दूसरे अखबार में छपी खबर को अगले दिन अपने यहां छापना अमर उजाला में सामान्य है। यह सब तब से हो रहा है जब से अमर उजाला के कन्नौज ब्यूरो कार्यालय में कुछ महीने पहले सिफारिश से एंट्री पाने वाले नए-नवेले रिपोर्टर को बिना किसी तजुर्बा के ब्यूरो प्रभारी की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। उसके बाद से खबरों की गुणवत्ता पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासन से जुड़ी कई खबरों को भ्रामक तरीके से प्रकाशित किया गया है, इसका नोटिस जारी हुआ तो खबरों में खेलकर खंडन भी छापना पड़ा है।
नकल एक : अमृत विचार 15 जनवरी अंक

अमर उजाला के 16 जनवरी के अंक में

मिसाल के तौर पर अमृत विचार ने रिपोर्टर के नाम से ,15 जनवरी के अंक में कन्नौज सांसद अखिलेश यादव की सांसद निधि से जुड़ा समाचार प्रकाशित किया। आश्चचर्य यह है कि वही खबर अगले दिन 16 जनवरी के अंक में अमर उजाला में खास खबर के लोगो के साथ प्रकाशित हुई। ध्यान देने वाली बात है कि दूसरे अखबार में छपी खबर अमर उजाला के लिए खास खबर कैसे हो गई। जो तथ्य उसमें दिया गया है, वही अक्षरश: प्रकाशित कर दिया गया। संबंधित का पक्ष लेना भी जरूरी नहीं समझा गया। बिना पक्ष लिए यह समाचार एक पक्षीय होकर रह गया। खबर की नकल करने वाले ने पक्ष लेना जरूरी नहीं समझा। कानपुर कार्यालय की संपादकीय टीम ने भी पक्ष मंगवाना जरूरी नहीं समझा। इसमें एक अधिकारी का जो बयान छपा है, उसी अधिकारी का वही बयान अमृत विचार में भी छपा है। बयान भी पूरी तरह से कॉपी किया गया है, कोई बदलाव नहीं है। खबर में आरोप लगाया गया है कि चुनाव जीतने के बाद अखिलेश यादव जनता का धन्यवाद देने नहीं पहुंचे, जबकि लोकसभा चुनाव नतीजा आने के अगले दिन अखिलेश यादव के कन्नौज आकर कलक्ट्रेट में डीएम से जीत का प्रमाण पत्र लेने का समाचार सचित्र प्रकाशित हुआ है। उस दिन वह कन्नौज सि्थत पार्टी कार्यालय पहुंचकर कार्यकर्ताओं व समर्थकों से भी मिले थे। उसके बाद भी नियमित अंतराल पर अलग-अलग आयोजन में वह कन्नौज पहुंचते रहे हैं। अमर उजाला में भी उनका कार्यक्रम प्रकाशित होता रहा है। ऐसे में खबर यह लिखना कि वह चुनाव जीतने के आठ महीने बाद भी नहीं आए भ्रामक और हास्यास्पद है।
नकल दो : दैनिक जागरण के कानपुर संस्करण में पेज सात पर प्रकाशित खबर

अमर उजाला के चार दिसंबर के अंक में फर्स्ट पेज

दैनिक जागरण के कानपुर संस्करण में 25 November 2024 पेज सात पर प्रकाशित खबर का संज्ञान लें। इटावा-हरदोई एक्सप्रेसवे के निर्माण से जुड़ी खबर रिपोर्टर के नाम से प्रकाशित हुई है। यह खबर कन्नौज, फर्रुखाबाद, हरदोई व इटावा अंक में छपी है। वही खबर अमर उजाला के 04 December 2024 के अंक में कन्नौज से रिपोर्टर के नाम के साथ पहले पन्ने पर एक्सक्लूसिव खबर के रूप में प्रकाशित की गई है।
नकल तीन : अमृत विचार 29 दिसंबर के अंक में

यही खबर अमर उजाला में 31 दिसंबर के अंक में

अमृत विचार में 29 दिसंबर के अंक में समाज कल्याण विभाग से जुड़ी एक स्टोरी का संज्ञान लें। उसमें हाईकोर्ट के निर्देश पर मुआवजा लौटाने से जुड़ी स्टोरी रिपोर्टर के नाम से प्रकाशित हुई है। ठीक यही खबर अमर उजाला में 31 दिसंबर के अंक में अपने रिपोर्टर के नाम से प्रकाशित किया है। पूरी खबर वही है। अमृत विचार में खबर से संबंधित जो तीन केस का उदाहरण दिया गया है, वही तीनों केस अमर उजाला के अंक में भी प्रकाशित कर दिया गया।
यह वह खबरें हैं जो दूसरे अखबारों की नकल करके ठीक एक या दो दिन बाद प्रकाशित की गई हैं। कई ऐसी खबरों को भी खास खबर के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है जो अलग-अलग समय पर दूसरे अखबारों में पहले छप चुकी हैं। इन दिनों कन्नौज जिले के अखबार जगत में यह चर्चा आम है कि अगर कोई खास खबर दूसरे अखबार में छपी है तो वह एक या दो दिन बाद अमर उजाला में भी आवश्य ही प्रकाशित होगी। यह सर्व विदित है कि स्थानीय टीम से जुड़े लोग भ्रामक, तथ्यहीन और हवा-हवाई खबरें प्रकाशित करने में पारंगत हैं।
कन्नौज से एक पत्रकार द्वारा भड़ास को भेजे गए मेल पर आधारित


