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उत्तर प्रदेश

खबरों से चिढ़े दारू माफिया ने पत्रकार पर लिखाया मुकदमा, प्रेस काउंसिल ने 7 अफसरों को नोटिस भेजा, अब पुलिस बना रही दबाव

कानपुर | शहर में पत्रकारों के खिलाफ माफिया गठजोड़ और पुलिस की भूमिका एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कर्म कसौटी समाचार पत्र से जुड़े पत्रकार शलभ जायसवाल द्वारा शराब और खनन माफिया की करतूत उजागर करने के बाद दोनों ने पुलिस की मिलीभगत से उल्टा उनपर ही मुकदमा दर्ज करवा दिया था।

पत्रकार का कहना है कि उन पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए हैं। यही नहीं, इन मुकदमों के खिलाफ शलभ ने भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India – PCI) में शिकायत दर्ज कराई। परिषद ने शलभ की शिकायत का संज्ञान लेते हुए शराब माफिया के अलावा 7 पुलिस/आबकारी के अधिकारियों को 27 मार्च 2025 को नोटिस भेजा है।

नोटिस और शिकायत…

मामले में नया एंगल ये आया है कि पीसीआई से नोटिस मिलने के बाद पत्रकार को नजदीकी थाने बुलाकर पुलिस शिकायत वापस लेने का दबाव बना रही है।

क्या कहा पीड़ित पत्रकार ने-

“मैंने जो भी मामला उठाया उसके मेरे पास पुख्ता साक्ष्य थे। शिकायत की तो मुझपर उल्टा मुकदमा दर्ज करवा दिया गया। इसे लेकर भारतीय प्रेस परिषद में शिकायत की, जिस पर परिषद ने 27 मार्च 2025 को पुलिस कमिश्नरेट कानपुर समेत आठ अधिकारियों को नोटिस भेजा। इसके तुरंत बाद पुलिस ने थाने बुलाकर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। पीड़ित पत्रकार का कहना है कि उन्हें धमकाया गया और कहा गया कि अगर शिकायत वापस नहीं ली गई तो उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया जाएगा।”

यहां समझिए एफआईआर के बाबत पूरा मामला….

शराब माफिया की धमकी और FIR:
जून 2024 में कर्म कसौटी में एक खबर प्रकाशित होने के बाद शराब ठेकेदार दीपू द्विवेदी ने पत्रकार शलभ जायसवाल को फोन पर गालियां दीं और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। इस बात की सूचना डीसीपी साउथ को दी गई और जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर शिकायत भी दर्ज कराई गई। इसके बावजूद, दीपू द्विवेदी द्वारा दिनांक 5 अगस्त 2024 को थाना बर्रा में एफआईआर संख्या 399/2024 दर्ज कराई गई, जिसमें पत्रकार पर झूठे आरोप लगाए गए।

खनन माफिया की भूमिका:
वहीं, मोहित बाजपेई नामक खनन माफिया द्वारा थाना नौबस्ता में एफआईआर संख्या 372/2024 दर्ज कराई गई है। आरोप है कि मोहित बाजपेई के ट्रक अवैध तरीके से नंबर हाइड कर मौरंग की आड़ में संदिग्ध तस्करी करते रहे हैं, जिसकी रिपोर्ट पहले भी कर्म कसौटी में प्रकाशित की गई थी। दो साल पूर्व इसी कवरेज के दौरान पत्रकारों से मारपीट की गई थी, जिसकी एफआईआर भी दर्ज हुई थी। अब मोहित बाजपेई ने तीन माह पुरानी एक अस्पष्ट घटना को आधार बनाकर एफआईआर दर्ज कराई है, जिसमें तारीखों तक का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

नीचे देखें, जिन खबरों और शिकायत से चिढ़े थे दारू व खनन माफिया…

अंत में शराब की अवैध बिकवाली का यह वीडियो भी देखें…

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