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TOI का फ्रंट पेज देखिए; 17 मौतों की खबर है, लेकिन सत्ता से सवाल की हिम्मत नहीं!

टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) दिल्ली संस्करण के फ्रंट पेज को देखिए—एक नहीं, दो नहीं, बल्कि कई खबरें ऐसी हैं जिनमें सीधे-सीधे “टाली जा सकने वाली मौतें” दिखती हैं। लेकिन जो नहीं दिखता, वो है—सवाल।

  • सबसे बड़ी खबर: पालम में आग, एक ही परिवार के 9 लोगों की मौत, जिनमें 3 बच्चे शामिल।
  • नीचे खबर: इंदौर में EV चार्जर की आग से 8 लोगों की मौत।
  • साइड में: रायपुर में सेप्टिक टैंक हादसे में 3 मजदूरों की मौत।
  • और भी छोटी खबरें—हर जगह एक ही पैटर्न: लापरवाही, सिस्टम फेल, और मौत।

लेकिन सवाल कहाँ है?

  • क्या बिल्डिंग सेफ्टी ऑडिट हुआ था?
  • क्या फायर NOC सिर्फ कागजों में थी?
  • क्या अवैध वायरिंग, ओवरलोड और प्रशासन की मिलीभगत पर कोई सवाल है?
  • EV चार्जिंग सेफ्टी के नियम किसने बनाए और लागू क्यों नहीं हुए?

फ्रंट पेज पर हर घटना मौजूद है कि यह सब “कैसे हुआ” है, लेकिन “क्यों हुआ” और “किसकी जिम्मेदारी है”—ये गायब है।

यहीं से उठता है बड़ा सवाल—

  • क्या मीडिया अब सिर्फ घटनाओं का रिकॉर्ड कीपर बनकर रह गया है?
  • या फिर सत्ता से सवाल पूछने की अपनी मूल भूमिका से पीछे हट रहा है?

जब देश में Narendra Modi के नेतृत्व वाली Bharatiya Janata Party सरकार है, तो क्या इन मौतों पर प्रशासनिक जवाबदेही तय करना मीडिया का काम नहीं?

पत्रकारिता का मूल सवाल है—“क्यों?” और अगर यही सवाल गायब हो जाए, तो हेडलाइन चाहे जितनी बड़ी हो, पत्रकारिता छोटी पड़ जाती है।

आज का फ्रंट पेज यही बता रहा है— मौतें बड़ी हैं, लेकिन सवाल छोटे कर दिए गए हैं।


I just see the death of TOI Delhi because no where it questions the BJP Govt -सौरभ भारद्वाज, विधायक, AAP


This is the front page of today’s times of india. Count the number of avoidable deaths. -वीना

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