इस्लामाबाद। पाकिस्तान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर कड़े प्रतिबंध लागू करते हुए नई ‘फॉरेन मीडिया फैसिलिटेशन गाइडलाइंस-2026’ जारी की हैं। नए नियमों के तहत अब विदेशी मीडिया संस्थानों और पत्रकारों को इस्लामाबाद, कराची और लाहौर के अलावा देश के किसी भी हिस्से से रिपोर्टिंग करने से पहले सरकार से अनुमति लेनी होगी। यह नियम विदेशी पत्रकारों के साथ-साथ उन पाकिस्तानी नागरिकों पर भी लागू होगा, जो अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लिए काम करते हैं।
बताया जा रहा है कि ये नए नियम पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में प्रदर्शनकारियों की मौत और वहां हुई कार्रवाई की अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कवरेज के बाद लागू किए गए हैं। PoK में विरोध प्रदर्शनों और क्षेत्रीय चुनावों के बहिष्कार की खबरें प्रसारित करने के बाद अल जज़ीरा की वेबसाइट पाकिस्तान में प्रतिबंधित कर दी गई। हालांकि सरकार ने औपचारिक प्रतिबंध की घोषणा नहीं की है, लेकिन वेबसाइट बिना VPN के उपलब्ध नहीं है।
इसी तरह BBC ने भी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से रिपोर्टिंग करते हुए प्रदर्शनकारियों के आरोप प्रकाशित किए थे कि सुरक्षा बलों ने निहत्थे लोगों पर गोलीबारी की। इसके बाद पाकिस्तान सरकार ने इन दावों का खंडन किया और विदेशी पत्रकारों को तत्काल कश्मीर छोड़ने के निर्देश दिए।
नई गाइडलाइंस के मुताबिक, पाकिस्तान में काम करने वाले सभी विदेशी मीडिया संस्थानों और पत्रकारों के लिए मान्यता (Accreditation) और पंजीकरण (Registration) अनिवार्य होगा। साथ ही, यदि कोई पत्रकार पाकिस्तान की “विचारधारा, संप्रभुता, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था” के खिलाफ गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है। कानूनी विशेषज्ञों और पत्रकार संगठनों का कहना है कि ये प्रावधान बेहद अस्पष्ट हैं और इनका मनमाना इस्तेमाल किया जा सकता है।
पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के पूर्व महासचिव और वरिष्ठ पत्रकार नासिर जैदी ने इन नियमों की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार विरोध प्रदर्शनों, विपक्ष पर कार्रवाई और राजनीतिक हालात की स्वतंत्र रिपोर्टिंग रोकना चाहती है। उन्होंने कहा कि सैन्य शासन के दौर में भी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर इतने कड़े प्रतिबंध नहीं देखे थे और मौजूदा स्थिति “मार्शल लॉ से भी बदतर” है।
गौरतलब है कि विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक (World Press Freedom Index) में पाकिस्तान 180 देशों में 153वें स्थान पर है। पत्रकार संगठनों का कहना है कि नए नियम प्रेस की स्वतंत्रता को और सीमित करेंगे तथा दुनिया के सामने पाकिस्तान की छवि को नुकसान पहुंचाएंगे।
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