कर्मचारियों के वेतन से करीब 10 साल तक पीएफ काटने के बावजूद जमा न करने का आरोप, बकाया राशि 1200 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई…
राजीव तिवारी बाबा-
लखनऊ। सहारा ग्रुप के कर्मचारियों के वेतन से भविष्य निधि (पीएफ) की कटौती करने के बावजूद उसे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के खाते में जमा नहीं करने के मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। करीब तीन महीने की सुनवाई के बाद कोर्ट ने लखनऊ पुलिस को उचित धाराओं में सहारा ग्रुप के पीएफ ट्रस्टियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई।
आरोप है कि सहारा ग्रुप की विभिन्न कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन से लगातार पीएफ की कटौती की जाती रही, लेकिन पूरी राशि क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त कार्यालय, लखनऊ में जमा नहीं कराई गई। कर्मचारियों की शिकायत के बाद ईपीएफओ स्तर से कार्रवाई शुरू हुई तो सहारा ग्रुप की ओर से करीब 14 महीने का पीएफ जमा कराया गया। हालांकि, कर्मचारियों के वेतन से काटी गई करीब 10 साल की पीएफ राशि अब भी जमा नहीं कराई गई है।
बताया जा रहा है कि बकाया पीएफ की राशि 1200 करोड़ रुपये से अधिक है। इस मामले को लेकर क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त अश्वनी कुमार ने तत्कालीन लखनऊ पुलिस कमिश्नर सेंगर से भी मुलाकात की थी। आरोप है कि कई आश्वासनों के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की।
ईपीएफओ को लखनऊ पुलिस की ओर से यह भी बताया गया था कि शासन के पंचम तल पर तैनात एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एफआईआर दर्ज किए जाने के पक्ष में नहीं हैं। इससे मामला और पेचीदा हो गया।
पुलिस की ओर से कार्रवाई न होने से क्षुब्ध क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त अश्वनी कुमार ने न्यायालय का रुख किया। करीब तीन महीने तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाते हुए सहारा ग्रुप के पीएफ ट्रस्टियों के खिलाफ उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
अब संभावना जताई जा रही है कि अगले दो-चार दिनों में सहारा ग्रुप के संबंधित पीएफ ट्रस्टियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती है। एफआईआर के बाद मामले में जांच आगे बढ़ेगी और कर्मचारियों के पीएफ की कथित तौर पर बकाया राशि के संबंध में जिम्मेदारी तय किए जाने की प्रक्रिया शुरू होगी।




